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कभी कंधे पर था स्कूल बस्ता, आज अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट में धमाका! वैभव सूर्यवंशी की ये तस्वीर कर देगी भावुक

Last Updated:July 05, 2026, 13:21 IST

Vaibhav Suryavanshi: वैभव सूर्यवंशी आज पहतान की मौहताज नही है. पर एक समय था जब समस्तीपुर के लाल वैभव कभी स्कूल का बस्ता लटकाते थे. उस समय की तस्वीरें आज वायरल हो रही हैं. अब वे भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे हैं. उनका संघर्ष और परिवार का त्याग लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा है. तस्वीरों में देखिए वैभव सूर्यवंशी की अनकही कहानी.

समस्तीपुर जिले के ताजपुर प्रखंड अंतर्गत मोतीपुर गांव के रहने वाले वैभव सूर्यवंशी आज भारतीय क्रिकेट के उभरते सितारे बन चुके हैं. लेकिन उनकी सफलता के पीछे वर्षों का संघर्ष, अनुशासन और परिवार का त्याग छिपा हुआ है. आज सोशल मीडिया पर वैभव के बचपन की कई तस्वीरें तेजी से वायरल हो रही हैं. जिनमें वह कंधे पर स्कूल का बस्ता लटकाए, बेहद साधारण और शांत अंदाज में नजर आते हैं. इन तस्वीरों को देखकर शायद ही कोई अंदाजा लगा सकता था कि यही बच्चा एक दिन अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट के मैदान पर भारत का प्रतिनिधित्व करेगा. गांव की गलियों से निकलकर दुनिया के बड़े क्रिकेट मंच तक पहुंचने का उनका सफर लाखों युवाओं के लिए प्रेरणा बन गया है. उनकी पुरानी तस्वीरें यह साबित करती हैं कि बड़े सपनों की शुरुआत अक्सर छोटी जगहों और साधारण परिस्थितियों से ही होती है.

वैभव सूर्यवंशी की सफलता के पीछे उनके पिता संजीव सूर्यवंशी और माता का सबसे बड़ा योगदान माना जाता है. बताया जाता है कि उनके पिता भी क्रिकेट के प्रति बेहद जुनूनी थे और इस क्षेत्र में आगे बढ़ने का सपना देखते थे, लेकिन परिस्थितियों ने उनका साथ नहीं दिया. इसके बाद उन्होंने वही सपना अपने बेटे की आंखों में देखा और उसे पूरा करने के लिए हर संभव प्रयास किया. सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने कभी वैभव के अभ्यास में कमी नहीं आने दी. परिवार ने आर्थिक और सामाजिक चुनौतियों का सामना किया, लेकिन बेटे के हौसले को कभी कमजोर नहीं पड़ने दिया. आज जब वैभव अंतरराष्ट्रीय मंच पर भारत की जर्सी पहनकर मैदान में उतरते हैं तो उनके माता-पिता के वर्षों के त्याग और संघर्ष की मेहनत भी लोगों को साफ दिखाई देती है.

मोतीपुर जैसे छोटे से गांव से निकलकर अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट तक पहुंचना किसी सपने से कम नहीं है. वैभव ने अपनी मेहनत और शानदार प्रदर्शन के दम पर यह साबित कर दिया कि प्रतिभा किसी बड़े शहर की मोहताज नहीं होती. उनकी सफलता ने समस्तीपुर ही नहीं बल्कि पूरे बिहार का गौरव बढ़ाया है. क्रिकेट प्रेमियों के बीच वैभव को लेकर जबरदस्त उत्साह देखने को मिल रहा है. गांव के युवा उन्हें अपना आदर्श मान रहे हैं और उनके संघर्ष से प्रेरणा ले रहे हैं. वैभव के बचपन के दोस्तों, जिनमें चंद्रदीप, चंदन और अभिषेक जैसे साथी शामिल हैं, के साथ उनकी पुरानी तस्वीरें भी सोशल मीडिया पर खूब साझा की जा रही हैं. ये तस्वीरें उनके सरल स्वभाव और जमीन से जुड़े व्यक्तित्व की गवाही देती हैं.

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वैभव सूर्यवंशी ने इंग्लैंड दौरे पर भारत की टी-20 टीम के लिए डेब्यू कर अपने क्रिकेट करियर का नया अध्याय शुरू किया. अपने दूसरे टी-20 मुकाबले में उन्होंने 10 गेंदों पर 14 रन बनाकर आत्मविश्वास की झलक दिखाई. भले ही यह पारी बड़ी नहीं थी, लेकिन सबसे कम उम्र में भारतीय टीम तक पहुंचना अपने आप में एक बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है. क्रिकेट विशेषज्ञों का मानना है कि वैभव में भविष्य का बड़ा खिलाड़ी बनने की पूरी क्षमता है. उनकी तकनीक, आत्मविश्वास और निडर बल्लेबाजी ने उन्हें शुरुआत से ही अलग पहचान दिलाई है. यही कारण है कि उनके प्रदर्शन पर पूरे देश की नजर बनी हुई है.

वैभव सूर्यवंशी की सफलता केवल एक क्रिकेटर की उपलब्धि नहीं, बल्कि यह उस विश्वास की जीत है कि मेहनत और समर्पण के सामने कोई भी बाधा बड़ी नहीं होती. स्कूल का बस्ता उठाने वाला एक साधारण ग्रामीण बालक आज करोड़ों भारतीयों की उम्मीद बन चुका है. उनकी कहानी यह संदेश देती है कि यदि लक्ष्य स्पष्ट हो, परिवार का साथ मिले और मेहनत ईमानदारी से की जाए तो कोई भी सपना असंभव नहीं रहता. आज समस्तीपुर का यह बेटा अंतरराष्ट्रीय मंच पर अपनी पहचान बना रहा है और आने वाली पीढ़ियों को यह विश्वास दिला रहा है कि छोटे गांवों से भी बड़े सितारे निकल सकते हैं. वैभव सूर्यवंशी का संघर्ष, उनका सफर और उनकी सफलता आने वाले वर्षों तक युवाओं को प्रेरित करती रहेगी.

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