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राजस्थान में गूंजेगा ‘जय जगन्नाथ’ का जयघोष!195-196 साल पुराने रथ बनेंगे आकर्षण, उमड़ेगा श्रद्धालुओं का सैलाब

Alwar News: अलवर शहर और राजगढ़ में भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा को लेकर तैयारियां चल रही हैं. परंपरागत श्रद्धा और उत्साह के साथ इस वर्ष भी दोनों स्थानों पर भगवान जगन्नाथ का रथ विशेष रूप से सजाया जाएगा. अलवर शहर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 196 वर्ष पुराने ऐतिहासिक इंद्र विमान पर निकाली जाएगी. इस विमान को हर वर्ष की तरह इस बार भी जगन्नाथ पुरी की प्रसिद्ध रथयात्रा की तर्ज पर आकर्षक ढंग से सजाया जा रहा है.

वहीं, राजगढ़ में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा 195 वर्ष पुराने गरुड़रूपी विमान रथ पर निकाली जाएगी. इस रथ को भी पारंपरिक शैली में सजाया जा रहा है. स्थानीय परंपरा के अनुसार, राजगढ़ में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा का इतिहास 172 वर्ष पुराना है और इसे आज भी पूरी धार्मिक परंपरा एवं विधि-विधान के साथ आयोजित किया जाता है. आयोजकों के अनुसार, भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की परंपरा को जीवंत बनाए रखने वाले प्रमुख स्थलों में राजगढ़ का विशेष महत्व है. श्रद्धालुओं में रथयात्रा को लेकर खासा उत्साह है.

जगन्नाथ की रथ यात्रा को पूरी परंपरा के आधार पर निभायाराजगढ़ कस्बे के चौपड़ बाजार स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर से 16 जुलाई को जन-जन के आराध्य देव भगवान जगन्नाथ जी की रथ यात्रा निकाली जाएगी. मंदिर के महंत मदनमोहन शास्त्री ने बताया कि भगवान जगन्नाथ जी का गरूड़रूपी विमान रथ 195 वर्ष पुराना है. उसको जगन्नाथ पुरी के तर्ज पर सजाया जाएगा. उन्होंने बताया कि जगन्नाथ पुरी के बाद अलवर जिले के राजगढ़ तहसील का द्वितीय स्थान है जो भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को पूरी परंपरा के आधार पर निभाया जा रहा है.

रथ यात्रा को आकर्षक रूप मिलाभगवान जगन्नाथ के रथ यात्रा को 172 वर्ष हो गए. लेकिन यह गरुड़ रूपी विमान को लगभग 195 वर्ष हो गए, यह रथ 195 वर्ष पुराना है. जगन्नाथ मंदिर के सर्वप्रथम महंत केशव जी महाराज के द्वारा जगन्नाथ पुरी से आए कारीगरों के द्वारा इस रथ का निर्माण कराया गया. महंत केशव दास जी महाराज के द्वारा भगवान जगन्नाथ की सर्वप्रथम रथ यात्रा के रूप में इस रथ काम में लिया गया. प्राचीन ऐतिहासिक काल से भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में पूर्व में हाथी, घोड़े, कच्ची घोड़ी, बम रसिया नृत्य, पलटन, बैंड आदि निकलते थे. लेकिन समय के परिवर्तन के साथ रथ यात्रा को आकर्षक रूप मिला. भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा को नया आकर्षित रूप देने की तैयारी मेला कमेटी और मंदिर के द्वारा की जा रही है.

मेले और रथ यात्रा के लिए अर्पण कर दियासर्वप्रथम 1855 में भगवान जगन्नाथ की प्रथम रथ यात्रा राजगढ़ में निकाली गई. गंगा बाग स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर को लगभग 217 साल हो गए. गंगा बाग स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर है, जिसे अलवर नरेश अलवर नरेश शो दान सिंह ने संपूर्ण गंगा बाग और मंदिर भवन को भगवान जगन्नाथ जी के मेले और रथ यात्रा के लिए अर्पण कर दिया. महंत केशव दास जी के सहयोग से वर्ष 1855 में प्रथम रथ यात्रा का शुभारंभ हुआ. पूरे भारत में जगन्नाथ पुरी के बाद अलवर जिले के राजगढ़ तहसील में ही सबसे प्राचीन भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा निकलती हुई आ रही है. वर्तमान में महंत पूर्ण दास, पंडित मदन मोहन शास्त्री, पंडित रोहित शर्मा, इस महंत परंपरा की दसवीं पीढ़ी के रूप में मंदिर में श्री जगन्नाथ जी महाराज की सेवा पूजा अर्चना करते चले आ रहे हैं.

जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर निका ली जाती है यह रथ यात्रामंदिर के महंत मदन मोहन शास्त्री ने बताया कि राजगढ़ स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा की सभी धार्मिक परंपराओं का निर्वहन जगन्नाथ पुरी की तर्ज पर किया जाता है. रथयात्रा से 15 दिन पहले भगवान जगन्नाथ का 108 जल कलशों एवं पंचामृत से विधि-विधानपूर्वक अभिषेक किया जाता है. इसके बाद भगवान 15 दिनों तक गर्भगृह में विश्राम करते हैं. इस दौरान उन्हें औषधीय काढ़े सहित पारंपरिक उपचार दिए जाते हैं. उन्होंने बताया कि आषाढ़ शुक्ल प्रतिपदा को भगवान जगन्नाथ गर्भगृह से बाहर विराजमान होंगे. इसी दिन नेत्रोत्सव का आयोजन होगा तथा सायंकाल माता जानकी की सवारी गंगाबाग स्थित श्री जगन्नाथ मंदिर पहुंचेगी. यहां गणेश पूजन एवं मंदिर मार्जन का कार्यक्रम मंदिर महंत परिवार और मेला समिति के सानिध्य में संपन्न होगा.

महंत ने बताया कि 16 जुलाई को भगवान जगन्नाथ का दूल्हा स्वरूप में विशेष श्रृंगार किया जाएगा. उन्हें वृंदावन की शाही पोशाक पहनाई जाएगी, जबकि जयपुर का शाही मोगरा और सऊदी अरब का विशेष इत्र अर्पित किया जाएगा. वहीं, 20 जुलाई को भगवान जगन्नाथ और माता जानकी के वरमाला महोत्सव का आयोजन होगा. इस अवसर पर आकर्षक पुष्प मालाएं विशेष रूप से दिल्ली और हरियाणा से मंगवाई जाएंगी.

1948 में इंद्र विमान को जगन्नाथ मंदिर को दान कर दियावहीं अलवर शहर में सुभाष चौक स्थित जगन्नाथ मंदिर से 22 जुलाई को भगवान जगन्नाथ की भव्य रथयात्रा निकाली जाएगी. मंदिर के महंत राजेंद्र प्रसाद शर्मा ने बताया कि रथयात्रा शाम 6 बजे शुरू होकर देर रात रूपबास स्थित मेला स्थल पहुंचेगी. रथयात्रा की विशेषता यह रहेगी कि श्रद्धालु बारातियों के रूप में शामिल होंगे. यात्रा में हरियाणा का प्रसिद्ध बमरसिया नृत्य, पांच शंखवादक, 16 सदस्यीय घड़ियाल पार्टी, करतब दिखाते पट्टेबाज, ऊंट-घोड़े, बैंड, पुलिस बैंड, ताशा पार्टी, शहनाई वादन, प्याऊ और आकर्षक झांकियां शामिल रहेंगी. इंद्र विमान की दूसरी मंजिल पर भगवान जगनाथ की प्रतिमा विराजमान रहेगी. तिजारा के महाराजा बलवंत सिंह ने वर्ष 1830 में इंद्र विमान बनवाया था. वर्ष 1845 में उनके निधन के बाद तिजारा का अलवर में विलय हुआ और इंद्र इंद्र विमान भी अलवर आ गया. पहले दशहरा और होली के अवसर पर महाराजा इसी विमान में सवार होकर निकलते थे. वर्ष 1903 में महाराजा जयसिंह ने पहली बार इसे भगवान जगन्नाथ की रथयात्रा के लिए उपलब्ध कराया. इसके बाद यह परंपरा हर वर्ष जारी रही. अलवर के अंतिम शासक महाराजा तेज सिंह ने वर्ष 1948 में इंद्र विमान को जगन्नाथ मंदिर को दान कर दिया.

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