गमले में नहीं खिल रहे फूल? 50 साल के एक्सपर्ट माली ने बताया अचूक फॉर्मूला, मोगरा-गुलाब देंगे भरपूर फूल

कोटा. घर की बालकनी, छत, आंगन या गार्डन में हरे-भरे पौधे और रंग-बिरंगे फूल हर किसी का मन मोह लेते हैं. मोगरा, गुलाब, चमेली, बेला, हरसिंगार और चांदनी जैसे फूलों वाले पौधे लगभग हर घर में लगाए जाते हैं, लेकिन अक्सर लोगों की शिकायत रहती है कि नर्सरी से लाए गए पौधे कुछ दिन बाद फूल देना बंद कर देते हैं या फिर धीरे-धीरे सूखने लगते हैं. कई बार लोग इसे मौसम की वजह मान लेते हैं, जबकि असल कारण पौधों की सही देखभाल, संतुलित सिंचाई और उचित पोषण का अभाव होता है. केवल रोजाना पानी देना ही पर्याप्त नहीं है.
पौधों को समय-समय पर खाद, सही मात्रा में नमी और उचित देखभाल की भी जरूरत होती है. यदि इन बातों का ध्यान रखा जाए, तो छोटे से गमले में लगा पौधा भी सालभर भरपूर फूल दे सकता है. कोटा के अनुभवी माली बच्चू सिंह, जिन्हें बागवानी का करीब 50 वर्षों का अनुभव है, ने लोकल 18 से बातचीत में ऐसे आसान और व्यावहारिक उपाय बताए हैं, जिन्हें अपनाकर कोई भी अपने पौधों को स्वस्थ, हरा-भरा और फूलों से लदा हुआ बना सकता है.
पौधों में फूल नहीं आने की असली वजह
अनुभवी माली बच्चू सिंह ने बताया कि मोगरा, बेला, चमेली, चांदनी, हरसिंगार, मधुकामिनी और गुलाब जैसे पौधों को नियमित रूप से फूल देने के लिए पर्याप्त पोषण की आवश्यकता होती है. अधिकांश लोग पौधों में रोज पानी तो डालते हैं, लेकिन समय पर खाद देना भूल जाते हैं. यही सबसे बड़ी गलती है. उन्होंने बताया कि यदि पौधों में हर महीने नियमित रूप से खाद डाली जाए, तो उनमें लगातार और अधिक मात्रा में फूल आते हैं. सही पोषण मिलने पर पौधे स्वस्थ रहते हैं, जबकि पोषण की कमी होने पर वे केवल हरे दिखाई देते हैं और फूल कम या बिल्कुल नहीं आते.
जरूरत से ज्यादा पानी देना पड़ सकता है भारी
बच्चू सिंह के अनुसार पौधों के खराब होने का सबसे बड़ा कारण जरूरत से ज्यादा पानी देना है. कई लोग पौधों को हरा-भरा रखने के लिए रोजाना या आवश्यकता से अधिक पानी डाल देते हैं, जिससे जड़ों में सड़न शुरू हो जाती है. वहीं बहुत कम पानी देना भी नुकसानदायक होता है. उन्होंने बताया कि बरसात के मौसम में विशेष सावधानी बरतनी चाहिए. गमले को हमेशा ऊपर तक मिट्टी से भरकर रखें. ऐसा करने से बारिश का अतिरिक्त पानी गमले में जमा नहीं होगा, बल्कि बाहर निकल जाएगा. इससे जड़ों में जलभराव नहीं होगा और पौधे सुरक्षित रहेंगे.
DAP और वर्मीकंपोस्ट से मिलेगा बेहतर परिणाम
खाद के बारे में बच्चू सिंह ने बताया कि बगीचे के पौधों के लिए डीएपी (डाई-अमोनियम फॉस्फेट) और वर्मीकंपोस्ट (केंचुआ खाद) अच्छे विकल्प हैं. इनके अलावा अच्छी गुणवत्ता वाली जैविक खाद का भी उपयोग किया जा सकता है. नियमित अंतराल पर संतुलित मात्रा में खाद देने से पौधों की वृद्धि बेहतर होती है और फूलों की संख्या भी बढ़ती है.
घर की बनी खाद इस्तेमाल करने से पहले रखें यह सावधानी
उन्होंने बताया कि घर पर गोबर, रसोई के जैविक कचरे या अन्य सामग्री से तैयार की गई खाद को सीधे पौधों में नहीं डालना चाहिए. ऐसी खाद में मीथेन सहित कुछ गर्म गैसें मौजूद रहती हैं, जो पौधों की जड़ों को नुकसान पहुंचा सकती हैं. बच्चू सिंह की सलाह है कि घर पर तैयार की गई जैविक खाद को कम से कम दो से तीन दिन तक धूप या खुली हवा में अच्छी तरह सुखाने के बाद ही पौधों में डालें. इससे उसमें मौजूद हानिकारक गैसें निकल जाती हैं और खाद पौधों के लिए पूरी तरह सुरक्षित हो जाती है.
सही देखभाल से सालभर खिलेंगे फूल
बच्चू सिंह का कहना है कि यदि पौधों को समय पर खाद, संतुलित सिंचाई और मौसम के अनुसार उचित देखभाल मिलती रहे, तो वे लंबे समय तक स्वस्थ रहते हैं और लगातार फूल देते हैं. थोड़ी-सी सावधानी और नियमित देखभाल से घर का छोटा-सा गार्डन भी सालभर रंग-बिरंगे फूलों से महक सकता है.



