1 नाम वाली दो फिल्में, 33 साल पहले एक ही दिन हुईं रिलीज, 1 ने आते ही काट दिया गदर, दूसरी के खाली पड़े रहे थिएटर

Last Updated:July 09, 2026, 10:30 IST
कई बार ऐसा होता है कि एक जैसी स्टारकास्ट या एक जैसे नाम वाली दो फिल्में एक साथ रिलीज होती हैं. लेकिन बहुत कम चांस है कि दोनों फिल्मों को सफलता मिले. ऐसा ही कुछ साल 1993 में हुआ था. जब जितेंद्र और संजय दत्त की फिल्म एक साथ एक ही दिन रिलीज हुई थी. लेकिन संजय दत्त ने जितेंद्र को कड़ी टक्कर दी थी.
हम बात कर रहे हैं साल 1993 में रिलीज हुई फिल्म ‘खलनायक’ की. संजय दत्त माधुरी दीक्षित और जैकी श्रॉफ स्टारर इस फिल्म ने जब सिनेमाघरों में दस्तक दी, तो सिनेमाघर खचाखच भर गए थे. फिल्म लोगों ने इतनी पसंद की थी कि फिल्म के टिकट तक मिलना मुश्किल हो गया था.
1993 में रिलीज हुई इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कमाई से गदर काट दिया था. फिल्म का लीड हीरो होते हुए भी संजय दत्त ने विलेन बनकर फिल्म में अपने रोल से इतिहास रच दिया था. इसके मुकाबले फिल्म में हीरो बने जैकी श्रॉफ का रोल काफी हल्का पड़ता नजर आया था.
सुभाष घई द्वारा डायरेक्ट और प्रोड्यूस की गई इस फिल्म ने संजय दत्त के करियर को पूरी तरह बदल दिया था. माधुरी दीक्षित ने तो एक ही गाने चोली के पीछे क्या है से ऐसी धाक जमाई थी कि ये फिल्म आज उनके नाम से ही जानी जाती हैं.फिल्म का ये गाना आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.
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वहीं दूसरी तरफ इसी दिन अनु अग्रवाल,जितेंद्र और जया प्रदा की फिल्म खलनायिका भी रिलीज हुई थी. फिल्म के नाम काफी मिलते जुलते थे या कहे कि एक जैसे ही थे. इस फिल्म को उस दौर के पॉपुलर डायरेक्टर सावन कुमार लेकर आए थे.
फिल्म को लेकर उस वक्त काफी कंट्रोवर्सी हुई थी. क्योंकि फिल्म का नाम लगभग एक ही तरह का, फिर रिलीज भी एक ही दिन हुई थी, तो उसे लेकर लोगों ने काफी चर्चा की थी. खुद सावन कुमार ने तो ये तक कहा था कि उनकी सुभाष घई से बात भी हो चुकी है.
दरअसल, फिल्म की रिलीज से पहले सावन कुमार शत्रुघ्न सिन्हा के घर डिनर के लिए वहां उनकी मुलाकात सुभाष घई से हुई. उन्होंने खलनायिका को लेकर अपनी बात रखी और सुभाष घई ने उन्हें कहा कि आप फिल्म बना सकते हैं. फिर क्या था हरी झंडी मिल गई और उन्होंने फिल्म ‘खलनायिका’ को बनाने का फैसला कर लिया.
साल 1993 में ही 6 अगस्त के दिन संजय दत्त, माधुरी की फिल्म खलनायक के साथ खलनायिका भी रिलीज हुई. दोनों फिल्मों में तो यूं तो कड़ी टक्कर थी. लेकिन जितेंद्र के होते हुए भी ये फिल्म बुरी तरह फ्लॉप साबित हुई. फिल्म अनु अग्रवाल के किरदार के इर्द-गिर्द ही बूनी गई थी. ज्यादातर थिएटर खाली ही पड़े रहे.
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