100 साल पुरानी भट्टी का कमाल! पांच पीढ़ियों ने नहीं बदलने दिया स्वाद, 25 रोस्टेड आइटम से हर साल 10 लाख की कमाई

Last Updated:July 10, 2026, 09:21 IST
Barmer Hindi News: एक 100 साल पुरानी पारंपरिक भट्टी आज भी स्वाद और भरोसे की मिसाल बनी हुई है. इस अनोखे पारिवारिक व्यवसाय को पांच पीढ़ियां लगातार आगे बढ़ा रही हैं, जिसने समय के साथ आधुनिकता अपनाई लेकिन अपने पारंपरिक स्वाद से कभी समझौता नहीं किया. इस भट्टी पर 25 तरह के रोस्टेड आइटम, जैसे चना, मूंगफली, मक्का, जौ और अन्य पारंपरिक खाद्य पदार्थ तैयार किए जाते हैं. शुद्ध स्वाद और गुणवत्ता के कारण इन उत्पादों की स्थानीय बाजार में जबरदस्त मांग है. यही वजह है कि यह पारिवारिक कारोबार हर साल करीब 10 लाख रुपये की कमाई कर रहा है. यह सफलता की कहानी बताती है कि परंपरा, गुणवत्ता और ग्राहकों का विश्वास किसी भी छोटे व्यवसाय को बड़ी पहचान दिला सकता है. आज यह भट्टी न केवल स्वाद की विरासत है.
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बाड़मेर. बदलते दौर में जहां पुश्तैनी कारोबार धीरे-धीरे खत्म होते जा रहे हैं वहीं बाड़मेर का एक परिवार करीब 100 साल पुरानी परंपरा को आज भी उसी जुनून के साथ जीवित रखे हुए है. केदार अग्रवाल ने जिस भट्टी से रोस्टेड मसालों की शुरुआत की थी उसे अब परिवार की पांचवीं पीढ़ी के नारायण अग्रवाल संभाल रहे हैं.
पश्चिम सरहद पर बसे बाड़मेर में एक परिवार करीब एक सदी पुरानी परंपरा को आज भी उसी शिद्दत से जीवित रखे हुए है. केदार अग्रवाल ने जिस भट्टी की शुरुआत की थी आज उसे परिवार की पांचवीं पीढ़ी के नारायण अग्रवाल आगे बढ़ा रहे हैं. पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाले इन रोस्टेड आइटमों का स्वाद आज भी लोगों को अपनी ओर खींचता है. करीब 100 वर्ष पहले केदार अग्रवाल ने इस कारोबार की नींव रखी थी.
पांचवी पीढ़ी सम्भाल रही विरासत, भट्टी पर भुने अनाज का नही है कोई मुकाबलासमय के साथ लक्ष्मण अग्रवाल, मिश्रीमल अग्रवाल और किशोरीलाल अग्रवाल ने इस विरासत को संभाला. अब परिवार की पांचवीं पीढ़ी के नारायण अग्रवाल इस व्यवसाय को आगे बढ़ा रहे हैं. नारायण अग्रवाल लोकल18 से बातचीत करते हुए बताते है कि बदलते दौर में आधुनिक मशीनें और पैक्ड स्नैक्स बाजार में जरूर आए हैं लेकिन पारंपरिक भट्टी पर भुने अनाज का स्वाद आज भी लोगों की पहली पसंद बना हुआ है.
मुल्तानी मिट्टी में पककर 25 तरह के रोस्टेड आइटम होते है तैयारनारायण अग्रवाल की भट्टी पर करीब 25 प्रकार के रोस्टेड आइटम तैयार किए जाते हैं. इनमें काला चना, सफेद चना, पोदीना चना, मतीरा बीज,चावल,मक्का, मूंगफली, बाजरा, ज्वार, मूंग, मोठ सहित कई प्रकार के अनाज शामिल हैं. हर आइटम को पारंपरिक विधि से भुना जाता है जिससे उसका प्राकृतिक स्वाद और पौष्टिकता बनी रहती है. सबसे खास बात यह है कि इन रोस्टेड आइटम को मुल्तानी मिट्टी में पकाकर तैयार किया जाता है.
स्वास्थ्य के साथ सेहत भी… 10 लाख का होता है व्यवसायनारायण अग्रवाल बताते हैं कि पुश्तैनी तरीके से चल रहे इस व्यवसाय से उनका सालाना टर्नओवर करीब 10 लाख रुपये है. उनका कहना है कि यह केवल कारोबार नहीं बल्कि परिवार की विरासत है जिसे अगली पीढ़ियों तक सुरक्षित पहुंचाना है. वे बताते है कि बिना तेल और मसालों के तैयार होने के कारण यह स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद है. आज जब फास्ट फूड और पैक्ड स्नैक्स का दौर है तब भी बाड़मेर की यह पारंपरिक रोस्टेड भट्टी लोगों के बीच अपनी अलग पहचान बनाए हुए है.
About the AuthorJagriti Dubey
Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
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