Rajasthan

बेटी के जन्म पर ऐसा जश्न पहले नहीं देखा होगा! दो थार में घर पहुंची नवजात, हर कोई कर रहा तारीफ

Last Updated:July 10, 2026, 07:00 IST

Bhilwara News: भीलवाड़ा के मोहम्मद यूसुफ ने अपनी नवासी के जन्म पर दो सजी-धजी थार गाड़ियों का काफिला निकालकर भव्य स्वागत किया. समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक संदेश देने के लिए उन्होंने इस पल को त्योहार की तरह मनाया. नाना के अनुसार, बेटियां खुदा का अनमोल तोहफा हैं और उनके जन्म पर बेटे जैसा ही जश्न मनाया जाना चाहिए. इस अनोखी पहल से उन्होंने समाज में बेटी बचाने और उन्हें सम्मान देने का अनूठा उदाहरण पेश किया है.

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Bhilwara News: भीलवाड़ा में एक ऐसी तस्वीर देखने को मिली जिसने समाज के लिए बेटी के जन्म पर खुशियां मनाने की एक नई परिभाषा गढ़ दी है. आमतौर पर बेटे के जन्म पर धूमधाम और जश्न की खबरें तो आम हैं, लेकिन भीलवाड़ा के भवानी नगर निवासी मोहम्मद यूसुफ ने अपनी नवासी के आगमन पर जो उत्साह दिखाया, वह चर्चा का विषय बन गया है. बेटी के जन्म को ‘अल्लाह की रहमत’ मानते हुए उन्होंने न केवल भव्य जश्न मनाया, बल्कि समाज में बेटियों के सम्मान का एक मजबूत संदेश भी दिया है.

भीलवाड़ा के महात्मा गांधी चिकित्सालय स्थित मातृ एवं शिशु इकाई में जब मोहम्मद यूसुफ की बेटी ने नन्ही परी को जन्म दिया, तो नाना का उत्साह सातवें आसमान पर था. इस खुशी को यादगार बनाने के लिए उन्होंने दो शानदार थार गाड़ियों को विशेष रूप से सजाया. इन सजी-धजी गाड़ियों का काफिला अस्पताल पहुंचा, जहां से वे अपनी बेटी और नवासी को लेकर भव्य अंदाज में भवानी नगर स्थित अपने घर पहुंचे. घर के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही ढोल-नगाड़ों और फूलों की वर्षा के साथ नन्ही नवासी का गर्मजोशी से स्वागत किया गया.

“बेटियां बोझ नहीं, खुदा का अनमोल तोहफा हैं”नवजात बच्ची के नाना मोहम्मद यूसुफ ने इस अनूठे जश्न के पीछे का उद्देश्य स्पष्ट करते हुए कहा कि आज भी समाज के कुछ हिस्सों में बेटियों के जन्म को लेकर संकीर्ण सोच कायम है. उन्होंने कहा, “बेटी का जन्म हमारे परिवार के लिए किसी त्योहार से कम नहीं है. जिस घर में बेटी आती है, वहां बरकत और प्यार का वास होता है.” उन्होंने आगे जोड़ा कि उनकी यह कोशिश केवल दिखावा नहीं, बल्कि समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक नजरिया विकसित करने का एक छोटा सा प्रयास है.

बेटियों का सम्मान ही समाज का भविष्यमोहम्मद यूसुफ का मानना है कि बेटियां परिवार की शान और समाज का भविष्य हैं. उनका यह संदेश स्पष्ट है कि जिस तरह बेटे के जन्म पर खुशी मनाई जाती है, उसी स्तर पर बेटियों का स्वागत भी होना चाहिए. उनके इस भावुक और उत्साहपूर्ण कदम ने न केवल उनके परिवार, बल्कि पूरे क्षेत्र के लोगों का दिल जीत लिया है. फूलों की बारिश और खुशियों के इस कारवां ने यह साबित कर दिया है कि अगर सोच बदल जाए, तो हर बेटी का जन्म एक उत्सव बन सकता है.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें

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