एक हाथ गंवाया, हौसला नहीं; आंखों पर पट्टी बांधकर बैडमिंटन खेलती है 13 साल की केसर, अब ओलंपिक है सपना

Last Updated:August 04, 2026, 13:37 IST
Women Inspirational Story : हम छोटी-छोटी बातों पर जहां परेशान होने लगते हैं वहीं 13 साल की केसर पारीक ने सड़क हादसे में हाथ गंवाने के बाद भी हार नहीं मानी. वह आंखों पर पट्टी बांधकर बैडमिंटन खेलती हैं और शूटिंग में पदक जीत रही हैं. उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी दर्ज है. अब उनका सपना ओलंपिक है. केसर की कहानी हमें हौसला देती है. अपने काम के प्रति लग्न के लिए. जानें केसर की पूरी दास्तां.
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Success Story: उम्र महज 13 साल, लेकिन हौसले इतने बुलंद कि बड़े-बड़े खिलाड़ी भी सीख लें. डीडवाना-कुचामन जिले के चावंडिया गांव की केसर पारीक आज राजस्थान ही नहीं, बल्कि देशभर में अपनी अनोखी प्रतिभा और जज्बे के कारण पहचान बना चुकी हैं. नन्ही केसर ने चार साल पहले एक दर्दनाक सड़क हादसे में अपना दायां हाथ गवां दिया था. लेकिन, इस नहीं गुड़िया ने हालात के आगे घुटने टेकने के बजाय उन्हे अपनी सबसे बड़ी ताकत बना लिया. आज वह आंखों पर पट्टी बांधकर बैडमिंटन खेलती हैं, शूटिंग में पदक जीत रही हैं और ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना संजोए लगातार मेहनत कर रही हैं.
करीब चार वर्ष पहले चावंडिया से जयपुर जाते समय हुए बस हादसे ने केसर की जिंदगी बदल दी. हादसे में उनका दायां हाथ कट गया. इतनी छोटी उम्र में इतना बड़ा दर्द किसी भी बच्चे का आत्मविश्वास तोड़ सकता था, लेकिन केसर ने हार मानने से इनकार कर दिया. उन्होंने बाएं हाथ से खेलना और डेली रूटीन के सभी काम करना सीख लिए. खेल ही नहीं, केसर एक बेहतरीन डांसर, स्केच आर्टिस्ट और पेंटर भी हैं. दायां हाथ खोने के बाद उन्होंने बाएं हाथ से ऐसी शानदार ड्रॉइंग बनानी सीख ली कि देखने वाले दंग रह जाते हैं.
इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में भी नाम दर्ज केसर की सबसे अनोखी पहचान उनकी ब्लाइंड फोल्ड बैडमिंटन है. आंखों पर पट्टी बांधकर बैडमिंटन खेलना आसान नहीं, लेकिन कठिन प्रैक्टिस के दम पर उन्होंने इसे अपना हुनर बना लिया. इसी हुनर के कारण उनका नाम इंडिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स में लॉन्ग ड्यूरेशन ब्लाइंड फोल्ड बैडमिंटन के लिए दर्ज हुआ. इसके बाद एशिया बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, इन्फ्लुएंसर बुक ऑफ रिकॉर्ड्स और वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया में भी उन्होंने अपनी जगह बनाई.
शूटिंग चैंपियनशिप में गोल्ड और सिल्वर मेडल जीते बैडमिंटन के साथ-साथ केसर शूटिंग में भी तेजी से आगे बढ़ रही हैं. हाल ही में आयोजित 24वीं राजस्थान शूटिंग चैंपियनशिप में उन्होंने अपनी श्रेणी में दो गोल्ड और एक सिल्वर पदक जीते हैं. फिलहाल वह जयपुर की शूटिंग रेंज में रोजाना प्रैक्टिस के लिए जाती है. वह अब भविष्य में ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करने का सपना देख रही हैं. इसके अलावा वह शूटिंग में कड़ी मेहनत कर रही है. नन्ही केसर का कहना है कि वह एक दिन भारत का प्रतिनिधित्व जरूर करेगी.
मां नंदा के साथ से केसर को मिली नई जिंदगी केसर पारीक की सफलता के पीछे उनकी मां नंदा पारीक का संघर्ष और हौसला सबसे बड़ी ताकत बना. सड़क हादसे के बाद जब परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा, तब नंदा ने खुद को संभालने के साथ-साथ बेटी का आत्मविश्वास भी कभी कमजोर नहीं होने दिया. उन्होंने केसर को यह विश्वास दिलाया कि शारीरिक कमी कभी भी सपनों की राह में बाधा नहीं बन सकती. नंदा ने बताया कि हादसे के बाद कुछ समय के लिए ऐसा लगा मानो जिंदगी थम गई हो, लेकिन पोजिटिव सोच, परिवार का सहयोग और मजबूत इरादों ने केसर को फिर से आगे बढ़ने की ताकत दी.
About the Authorआनंद पाण्डेयContent Producer
आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
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Location :
Nagaur,Nagaur,Rajasthan
First Published :
August 04, 2026, 13:37 IST



