
मुख्यमंत्री और कई कैबिनेट मंत्री जयपुर संभाग से, फिर भी हैरिटेज सिटी में कथित अवैध निर्माण पर नहीं लग रही लगाम

1745 और 1732 पर सीज कार्रवाई, 1767 को लेकर सवाल बरकरार • सरकारी गली तक समेटने के आरोप • निगम की कार्यशैली कटघरे में

जयपुर। राजस्थान में डबल इंजन भाजपा सरकार है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित राज्य सरकार के कई कैबिनेट मंत्री जयपुर संभाग का प्रतिनिधित्व करते हैं। इसके बावजूद विश्व धरोहर का दर्जा प्राप्त गुलाबी नगरी की हैरिटेज विरासत पर लगातार उठ रहे सवाल थमने का नाम नहीं ले रहे। नगर निगम जयपुर के किशनपोल जोन में विरासत भवनों को ध्वस्त कर कथित रूप से व्यावसायिक परिसरों में बदलने, सरकारी गली तक को परियोजना में शामिल करने और कार्रवाई के बावजूद निर्माण गतिविधियां जारी रहने के आरोपों ने हैरिटेज संरक्षण व्यवस्था की प्रभावशीलता पर गंभीर प्रश्न खड़े कर दिए हैं।

हाल ही में संभागीय आयुक्त वी. श्रवण कुमार के आकस्मिक निरीक्षण के दौरान भवन संख्या 1745 और 1732 पर सीज की कार्रवाई हुई, लेकिन भवन संख्या 1767 को लेकर स्थानीय लोगों के सवाल अब भी कायम हैं। आरोप है कि एक ओर कार्रवाई हुई, वहीं दूसरी ओर आसपास के निर्माण कार्यों पर अपेक्षित सख्ती दिखाई नहीं दी।

जब मुख्यमंत्री सहित कई वरिष्ठ मंत्री जयपुर संभाग से हैं, तब भी यदि विश्व धरोहर शहर में विरासत भवनों पर कथित अवैध निर्माण, ध्वस्तीकरण और प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगातार सामने आ रहे हैं, तो आखिर जवाबदेही किसकी तय होगी? क्या हैरिटेज संरक्षण केवल कागजों तक सीमित रह जाएगा या जिम्मेदार एजेंसियां प्रभावी कार्रवाई करेंगी?



