आर्टिकल 370 खत्म होने के 7 साल बाद कितना बदल गया जम्मू-कश्मीर? अब घाटी में दौड़ रही ट्रेन और टूरिज्म भी फुल

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आर्टिकल 370 खत्म होने के 7 साल बाद कितना बदल गया जम्मू-कश्मीर? जानें
Last Updated:August 05, 2026, 04:31 IST
5 अगस्त 2019 का फैसला जम्मू-कश्मीर के इतिहास में एक बड़ा मोड़ माना जाता है. 5 अगस्त 2019 को केंद्र सरकार ने इन प्रावधानों को समाप्त कर दिया और राज्य को दो केंद्रशासित प्रदेशोंजम्मू-कश्मीर और लद्दाख में विभाजित कर दिया. इस ऐतिहासिक कदम के सात साल पूरे होने के बाद भी, इस फैसले को लेकर लोग क्या कह रहे हैं.
5 अगस्त 2019, यह तारीख जम्मू-कश्मीर के इतिहास में एक बड़े संवैधानिक बदलाव के रूप में दर्ज है. इसी दिन केंद्र सरकार ने आर्टिकल 370 के ज्यादातर प्रावधानों को हटाने का फैसला लिया था. इसके साथ ही आर्टिकल 35ए भी समाप्त हो गया. जम्मू-कश्मीर का पुनर्गठन कर उसे दो केंद्रशासित प्रदेशों जम्मू-कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया. (PTI)
सात साल बाद भी इस फैसले को लेकर चर्चा जारी है. कुछ लोग इसे विकास और बदलाव की दिशा में बड़ा कदम मानते हैं, जबकि इस मुद्दे पर अलग-अलग राजनीतिक और सामाजिक राय भी सामने आती रही हैं. (PTI)
साल 1947 में महाराजा हरि सिंह ने इंस्ट्रूमेंट ऑफ एक्सेशन पर साइन कर जम्मू-कश्मीर का भारत में विलय किया था. इसके बाद राज्य को संविधान के तहत विशेष दर्जा मिला. इसे आर्टिकल 370 के जरिए लागू किया गया. वहीं, आर्टिकल 35ए के तहत राज्य के स्थायी निवासियों को कुछ खास अधिकार दिए गए थे. (PTI)
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विमल मेहरा का कहना है कि 5 अगस्त 2019 के बाद जम्मू-कश्मीर में बड़ा बदलाव देखने को मिला है. उनके मुताबिक, आज पर्यटक श्रीनगर के लाल चौक में खुलकर घूमते हैं, तिरंगे के साथ तस्वीरें खिंचवाते हैं और सोशल मीडिया पर वीडियो बनाते हैं. (PTI)
उन्होंने कहा कि पहले जिस जगह को तनाव से जोड़ा जाता था, वहां अब तिरंगा लहरा रहा है. उनके अनुसार, घर-घर तिरंगा अभियान चल रहा है, धार्मिक आयोजन हो रहे हैं. कई मंदिरों को फिर से खोला गया है. (PTI)
उन्होंने कहा कि पहले जिस जगह को तनाव से जोड़ा जाता था, वहां अब तिरंगा लहरा रहा है. उनके अनुसार, घर-घर तिरंगा अभियान चल रहा है, धार्मिक आयोजन हो रहे हैं. कई मंदिरों को फिर से खोला गया है. (PTI)
दीपक सिंह का कहना है कि पहले घाटी में अक्सर हड़ताल, बंद और कर्फ्यू जैसी स्थिति बन जाती थी. उनका दावा है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद ऐसी घटनाओं में कमी आई है और पत्थरबाजी की घटनाएं भी पहले के मुकाबले काफी कम हुई हैं. (PTI)
जम्मू चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के अध्यक्ष अरुण गुप्ता के मुताबिक, पिछले सात साल में जम्मू-कश्मीर में विकास की रफ्तार बढ़ी है. उनका कहना है कि अब घाटी तक ट्रेन पहुंच चुकी है, पर्यटन बढ़ा है और कई विकास परियोजनाओं पर काम हो रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि आतंकवादी घटनाओं में कमी आई है. हालांकि हाल के कुछ हमले अब भी चिंता का विषय हैं. (PTI)
श्री सनातन धर्म सभा के अध्यक्ष पुरुषोत्तम दधीचि का कहना है कि अनुच्छेद 370 हटने के बाद गोरखा समुदाय, वाल्मीकि समुदाय और पीओजेके से विस्थापित लोगों को राजनीतिक और रोजगार से जुड़े अधिकार मिले हैं. उनके अनुसार, अब ये लोग चुनाव में वोट डाल सकते हैं और राजनीतिक प्रक्रिया का हिस्सा बन सकते हैं. उन्होंने यह भी कहा कि आज देशभर से आने वाले सैलानी और वैष्णो देवी जाने वाले श्रद्धालु पहले की तुलना में खुद को अधिक सुरक्षित महसूस करते हैं. (PTI)
अनुच्छेद 370 हटाने के फैसले को सात साल पूरे हो चुके हैं. इस दौरान जम्मू-कश्मीर में कई बदलाव देखने को मिले हैं. हालांकि, इस फैसले को लेकर अलग-अलग राजनीतिक दलों, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों की राय आज भी अलग-अलग है. इसलिए यह मुद्दा अब भी देश की राजनीति और सार्वजनिक चर्चा का अहम विषय बना हुआ है. (PTI)
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August 05, 2026, 04:31 IST



