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Til Crop Disease Alert | Til Crop Disease Alert | तिल की फसल पर रोगों का खतरा

Last Updated:September 26, 2026, 06:22 IST

Agriculture Department issues alert for Til crop: भरतपुर जिले में तिल की फसल इन दिनों पकाव के चरण में है. लेकिन इस अहम समय पर फसल में फिल्यूड और पत्ती धब्बा जैसे खतरनाक रोगों का प्रकोप बढ़ने का खतरा पैदा हो गया है. कृषि विभाग ने इसे लेकर अलर्ट जारी किया है और किसानों को खेतों की नियमित निगरानी करने की सख्त हिदायत दी है. अधिकारियों का कहना है कि फूल और पत्तियों के सिकुड़ने या पीले पड़ने पर तुरंत विशेषज्ञों की सलाह लें. बचाव के लिए डाइथोनेट-54 के छिड़काव की सिफारिश की गई है. सही समय पर जल निकासी और उचित देखभाल से किसान अपनी फसल को भारी नुकसान से बचा सकते हैं और उच्च गुणवत्तापूर्ण उत्पादन प्राप्त कर सकते हैं.

भरतपुर: भरतपुर जिले में इन दिनों तिल की फसल अपने अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण चरण यानी पकाव की कगार पर पहुंच चुकी है. यह समय किसानों के लिए खुशी का होता है, लेकिन इस वर्ष इसी चरण में विभिन्न रोगों और हानिकारक कीटों का खतरा अचानक बढ़ गया है. तिल एक प्रमुख तिलहन फसल है, जिसकी खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. फसल के इस नाजुक समय में अगर उचित देखभाल नहीं की गई, तो पूरी मेहनत पर पानी फिर सकता है. समय रहते रोगों की पहचान और उनकी रोकथाम नहीं होने पर इसका सीधा और नकारात्मक असर तिल की फसल के कुल उत्पादन और उसकी गुणवत्ता पर पड़ सकता है. इस गंभीर स्थिति को देखते हुए कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों के लिए एक विशेष अलर्ट जारी किया है.

कृषि विभाग ने किसानों को अपने खेतों की नियमित और सूक्ष्म निगरानी करने की सख्त सलाह दी है. किसानों से कहा गया है कि वे फसल में दिखाई देने वाले किसी भी असामान्य लक्षण को बिल्कुल भी नजरअंदाज न करें. कृषि विभाग के अतिरिक्त निदेशक देशराज ने इस विषय पर विस्तार से जानकारी दी है. उन्होंने बताया कि तिल की फसल में पकाव के समय बहुत ही विशेष सावधानी बरतने की जरूरत होती है. यह वह समय होता है जब पौधे की रोग प्रतिरोधक क्षमता में बदलाव आता है और मौसम में होने वाला मामूली सा परिवर्तन भी बीमारियों को निमंत्रण दे सकता है.

तिल में फिल्यूड और पत्ती धब्बा रोग का प्रकोपइस समय खेतों में विशेष रूप से तिल में फिल्यूड रोग का भयंकर प्रकोप देखा जा सकता है. इस रोग के कारण पौधों में कई तरह के बदलाव आते हैं. इस बीमारी की चपेट में आने पर पौधों के फूल और पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं तथा कुछ ही समय में वे पूरी तरह से सूखने लगती हैं. इसके अलावा, पकाव के समय पत्ती धब्बा रोग की समस्या भी प्रमुखता से सामने आ सकती है. पत्ती धब्बा रोग में पत्तियों पर गहरे रंग के निशान बन जाते हैं, जो धीरे-धीरे पूरी पत्ती को नष्ट कर देते हैं. इससे पौधे की प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया बाधित होती है और फलियों में दाने ठीक से नहीं भर पाते हैं.

बचाव के उपाय और दवाओं का छिड़कावअतिरिक्त निदेशक ने किसानों को यह भी सलाह दी कि वे नियमित रूप से खेत का निरीक्षण करें और पौधों की पत्तियों, तनों तथा फलियों पर किसी भी तरह के असामान्य लक्षण दिखाई देने पर तुरंत उस पर ध्यान दें. रोग के प्रारंभिक लक्षण मिलने पर कृषि विभाग द्वारा सुझाई गई डाइथोनेट-54 दवा का छिड़काव किया जा सकता है. हालांकि, विभाग ने यह स्पष्ट चेतावनी दी है कि किसी भी तरह की रासायनिक दवा का इस्तेमाल कृषि विशेषज्ञों की उचित सलाह और निर्धारित मात्रा के अनुसार ही किया जाना चाहिए. गलत मात्रा में दवा का प्रयोग फसल को फायदे की जगह भारी नुकसान पहुंचा सकता है.

जलभराव से बचें और विशेषज्ञ से लें रायकृषि विभाग के अनुसार पत्तियों पर धब्बे उभरना, पत्तियों का अचानक पीला पड़ना, पौधों का बिना कारण मुरझाना या तने और फलियों पर किसी भी प्रकार के रोग के लक्षण दिखाई देने पर किसान बिना कोई देरी किए तुरंत अपने नजदीकी कृषि अधिकारी या फसल विशेषज्ञ से संपर्क करें. इसके साथ ही खेतों में जल प्रबंधन का भी विशेष ध्यान रखने की जरूरत है. खेत में अनावश्यक नमी जमा न होने दें और बारिश या सिंचाई के बाद जल निकासी की उचित व्यवस्था हमेशा तैयार रखें. जलभराव की स्थिति में फंगस जनित रोगों का खतरा कई गुना बढ़ जाता है.

बेहतर उत्पादन के लिए निरंतर निगरानीअंत में, कृषि विभाग ने जिले के सभी किसानों से अपील की है कि पकाव के समय फसल की निरंतर निगरानी करना ही बचाव का सबसे बेहतरीन तरीका है. समय पर रोग की सही पहचान और उचित कृषि प्रबंधन अपनाकर तिल की फसल को होने वाले भारी नुकसान से आसानी से बचाया जा सकता है. इस तरह की जागरूकता से न केवल फसल सुरक्षित रहेगी, बल्कि किसान बेहतर उत्पादन और उच्च गुणवत्ता की पैदावार भी हासिल कर सकेंगे, जिससे उन्हें बाजार में अपनी फसल का अच्छा मूल्य मिल सकेगा.

About the Authorvicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…

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Bharatpur,Bharatpur,Rajasthan

First Published :

September 26, 2026, 06:22 IST

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