सावन में उमड़ रही भक्तों की भीड़! मेवाड़ का कमलनाथ महादेव मंदिर, जहां शिव के साथ रावण की भी होती है पूजा

Last Updated:August 06, 2026, 15:16 IST
Kamalnath Mahadev Mandir: मेवाड़ का प्राचीन कमलनाथ महादेव मंदिर अपनी अनोखी धार्मिक मान्यताओं और पौराणिक इतिहास के कारण श्रद्धालुओं के बीच विशेष आस्था का केंद्र है. मान्यता है कि यहीं रावण ने भगवान शिव को खुश करने के लिए अपना शीश अर्पित किया था. इसी कारण इस मंदिर में भगवान शिव के साथ रावण की भी विशेष श्रद्धा से पूजा की जाती है. सावन माह में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं. प्राकृतिक सौंदर्य से घिरा यह मंदिर धार्मिक, ऐतिहासिक और पर्यटन की दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जाता है और मेवाड़ की विरासत का अनूठा प्रतीक है.
उदयपुर जिले की अरावली की पहाड़ियों के बीच स्थित कमलनाथ महादेव मंदिर अपनी धार्मिक मान्यताओं और अनोखी परंपराओं के कारण श्रद्धालुओं के बीच खास पहचान रखता है.उदयपुर शहर से करीब 40 किलोमीटर दूर झाड़ोल क्षेत्र में स्थित इस प्राचीन मंदिर को लेकर ऐसी मान्यता है कि यहां लंकापति रावण ने भगवान शिव की कठोर तपस्या की थी. यही वजह है कि इस मंदिर में भगवान शिव के साथ रावण की भी पूजा की जाती है. सावन के महीने में यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार रावण भगवान शिव का परम भक्त था.कहा जाता है कि उसने भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए 108 कमल अर्पित करने का संकल्प लिया था. जब पूजा के दौरान एक कमल कम पड़ गया तो रावण ने अपने संकल्प को पूरा करने के लिए अपना शीश ही भगवान शिव को अर्पित कर दिया.उसकी इस कठिन भक्ति से प्रसन्न होकर भगवान शिव ने उसे दर्शन दिए और उसका शीश पुनः जोड़ दिया. इसी घटना के कारण इस स्थान का नाम कमलनाथ महादेव पड़ा.
मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यहां आज भी रावण की प्रतिमा स्थापित है. देश के बहुत कम मंदिर ऐसे हैं जहां भगवान के साथ रावण की भी पूजा की जाती है. स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां आने वाले श्रद्धालु भगवान शिव के दर्शन करने के साथ रावण की प्रतिमा के भी दर्शन करते हैं.यह परंपरा वर्षों से चली आ रही है और आज भी पूरी श्रद्धा के साथ निभाई जाती है.
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इस मंदिर की देखरेख और पूजा-अर्चना में आसपास के आदिवासी समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका है. आदिवासी समाज लंबे समय से यहां भगवान शिव और रावण दोनों की पूजा करता आ रहा है.स्थानीय लोगों का मानना है कि यह परंपरा उनके पूर्वजों के समय से चली आ रही है और आज भी उसी आस्था के साथ निभाई जा रही है. सावन, महाशिवरात्रि और अन्य धार्मिक अवसरों पर यहां विशेष पूजा और आयोजन होते हैं.
कमलनाथ महादेव मंदिर को लेकर यह भी मान्यता है कि यहां स्वयंभू शिवलिंग विराजमान है. श्रद्धालुओं का विश्वास है कि सच्चे मन से यहां की गई प्रार्थना भगवान शिव अवश्य स्वीकार करते हैं. प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह मंदिर धार्मिक महत्व के साथ-साथ पर्यटन की दृष्टि से भी आकर्षण का केंद्र बना हुआ है. हर साल राजस्थान सहित देश के विभिन्न हिस्सों से लोग यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
झाड़ोल की पहाड़ियों के बीच स्थित यह मंदिर प्रकृति और आस्था का सुंदर संगम भी है.चारों ओर हरियाली और शांत वातावरण श्रद्धालुओं को आध्यात्मिक अनुभव कराता है. विशेष रूप से बरसात और सावन के दौरान यहां का नजारा बेहद मनमोहक हो जाता है. यही कारण है कि धार्मिक यात्रा के साथ-साथ प्रकृति प्रेमी और पर्यटक भी इस स्थान को देखने पहुंचते हैं.
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August 06, 2026, 15:16 IST



