रेल मंत्री के आदेश भी बेअसर, पाली का अंडरब्रिज अब भी अधूरा, जनता 5 किमी घूमने को मजबूर

पाली. अक्सर देखा जाता है कि जब भी कोई केंद्रीय मंत्री या बड़े नेता किसी शहर के प्रवास पर आते हैं, तो अफसरशाही अचानक हरकत में आ जाती है. मंत्री के निर्देशों पर काम जिस तेजी से कागजों पर शुरू होता है, उतनी ही तेजी से वह जमीनी हकीकत का रूप नहीं ले पाता. जैसे ही वीवीआईपी दौरा खत्म होता है, अधिकारियों की चाल भी सुस्त पड़ जाती है. कुछ ऐसा ही हाल पाली शहर का है. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव के पाली दौरे के बाद पुलिस लाइन अंडरब्रिज में जलभराव की समस्या खत्म करने का काम आनन-फानन में शुरू तो कर दिया गया, लेकिन आज महीनों बीत जाने के बाद भी यह काम अधर में अटका हुआ है.
अप्रैल में शुरू हुआ काम अगस्त बीतने को आया मगर पूरा नहीं हुआ. नतीजा यह है कि आम जनता 5 किलोमीटर का लंबा चक्कर काटने को मजबूर है और स्थानीय व्यापारियों का धंधा पूरी तरह ठप्प हो चुका है. पाली शहर के पुलिस लाइन स्थित अंडरब्रिज में लंबे समय से जलभराव की गंभीर समस्या बनी हुई थी. बारिश के दिनों में यह मार्ग पूरी तरह से अवरुद्ध हो जाता था, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता था. इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने अपने पाली प्रवास के दौरान सख्त निर्देश दिए थे. मंत्री के आदेश मिलते ही प्रशासनिक अमला सक्रिय हुआ और अंडरब्रिज के सुधार का काम शुरू कर दिया गया. लेकिन अधिकारियों का यह उत्साह केवल शुरुआती दिनों तक ही सीमित रहा.
डेडलाइन खत्म होने के बाद भी काम अधूरा
तय समय-सीमा के अनुसार, अप्रैल माह में शुरू हुआ यह निर्माण कार्य इसी अगस्त महीने तक हर हाल में पूरा किया जाना था. लेकिन जमीनी हकीकत यह है कि मौके पर अभी भी काफी काम बाकी है. कछुआ चाल से चल रहे इस निर्माण कार्य के कारण समय पर काम पूरा होना असंभव नजर आ रहा है. वीवीआईपी दौरों के समय तेजी दिखाने वाले विभागों की इस लचर कार्यशैली से अब स्थानीय लोगों में भारी रोष व्याप्त है.
व्यापारियों का कारोबार पूरी तरह से ठप
अंडरब्रिज का निर्माण कार्य शुरू होने के साथ ही इस मुख्य मार्ग को यातायात के लिए पूरी तरह बंद कर दिया गया था. मार्ग बंद होने का सबसे ज्यादा और सीधा असर आसपास के स्थानीय दुकानदारों और व्यवसायियों पर पड़ा है. महीनों से रास्ता बंद रहने के कारण दुकानों तक ग्राहकों की पहुंच खत्म हो चुकी है, जिससे व्यापारियों का कारोबार पूरी तरह ठप्प हो गया है. व्यापारी रोजाना दुकानें तो खोलते हैं, लेकिन दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है, जिससे उनके सामने आर्थिक संकट खड़ा हो गया है.
मरीजों को लगाना पड़ रहा 5 किमी का अतिरिक्त चक्कर
यह रास्ता शहर को अस्पताल और अन्य मुख्य इलाकों से जोड़ने वाली एक महत्वपूर्ण कडी है. मार्ग बंद होने की वजह से सबसे ज्यादा परेशानी आपातकालीन स्थिति में देखने को मिल रही है. मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने के लिए एम्बुलेंस और परिजनों को करीब 4 से 5 किलोमीटर का लंबा और घुमावदार चक्कर काटना पड़ रहा है. आपात समय में एक-एक मिनट की कीमत होती है, ऐसे में यह अतिरिक्त दूरी मरीजों की जान पर भारी पड़ रही है.
अधिकारियों की चुप्पी से जनता में बढ़ रहा आक्रोश
निर्माण कार्य की धीमी गति और ठेकेदार की लापरवाही को लेकर स्थानीय निवासियों ने कई बार संबंधित अधिकारियों का ध्यान आकर्षित कराने का प्रयास किया, लेकिन स्थिति में कोई बदलाव नहीं आया. लोगों का कहना है कि अगर मंत्री के निर्देशों का यह हाल है, तो आम जनता की सुनवाई का स्तर क्या होगा? क्षेत्रवासियों ने प्रशासन से मांग की है कि निर्माण कार्य में तेजी लाकर इसे जल्द से जल्द पूरा किया जाए, ताकि जनता को इस रोज-रोज की आफत से मुक्ति मिल सके.



