राजस्थान में अनार उत्पादन को मिलेगा नया बूस्ट, कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर तैयार करेगा विशेषज्ञ

Last Updated:August 06, 2026, 21:35 IST
Jodhpur News : कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर ने अनार प्रूनिंग के लिए स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षित किया. इससे किसानों की लागत घटेगी और युवाओं को रोजगार मिलेगा. राजस्थान में अनार उत्पादन बढ़ेगा. अनार प्रूनिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी सोच का परिणाम है. आने वाले समय में इस पहल का और विस्तार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवा स्वरोजगार से जुड़ सकें.
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जोधपुर. राजस्थान में अनारा उत्पादन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए कृषि विश्वविद्यालय, जोधपुर ने अनार की कटाई-छंटाई के लिए ग्रामीण यूथ को प्रशिक्षित कर एक्सपर्ट तैयार करने की पहल शुरू की है. अब तक इस काम के लिए महाराष्ट्र और गुजरात से मजदूर बुलाने पड़ते थे, जिससे किसानों पर एक्सट्रा खर्च आता था. विश्वविद्यालय की इस पहल से स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित श्रमिक उपलब्ध होंगे, किसानों की लागत कम होगी और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी खुलेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि इस तकनीक के प्रसार से प्रदेश में अनार उत्पादन और गुणवत्ता, दोनों में सुधार होगा. इससे किसानों की आय बढ़ेगी और राजस्थान अनार उत्पादन के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाएगा.
कृषि विश्वविद्यालय ने पहली बार स्थानीय युवाओं को वैज्ञानिक प्रूनिंग का संस्थागत प्रशिक्षण देकर उन्हें आधुनिक तकनीकों में दक्ष बनाया है. प्रशिक्षण के दौरान पौधों की सही कटाई, शाखाओं का चयन, रोग प्रबंधन और बेहतर उत्पादन से जुड़ी व्यावहारिक जानकारी दी गई. प्रशिक्षण पूरा करने के बाद कई युवा अपने खेतों में इस तकनीक का सफल उपयोग कर रहे हैं. वहीं आसपास के किसानों के बागों में सेवाएं देकर अच्छी आय भी अर्जित कर रहे हैं. इससे गांवों में कृषि आधारित सेवा क्षेत्र को नई पहचान मिलने लगी है.
ड्रिप सिंचाई के विस्तार से बढ़ी खेती, अब तकनीक से बढ़ेगा मुनाफाड्रिप सिंचाई के विस्तार के बाद जोधपुर, जालोर, सिरोही, बाड़मेर, पाली और जैसलमेर सहित पश्चिमी राजस्थान के कई जिलों में अनार की खेती किसानों की आय का प्रमुख स्रोत बन चुकी है. पूरे क्षेत्र में करोड़ों अनार के पौधों की हर वर्ष मानसून से पहले वैज्ञानिक प्रूनिंग जरूरी होती है. पहले बाहरी राज्यों से आने वाले विशेषज्ञ प्रति पौधा 20 से 30 रुपये तक शुल्क लेते थे. इससे किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ता था. अब स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित युवाओं की उपलब्धता से यह खर्च कम होगा और प्रदेश का पैसा भी प्रदेश में ही रहेगा.
किसानों की आय बढ़ाने की दिशा में नई पहलकृषि विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. डॉ. वी.एस. जैतावत ने बताया कि विश्वविद्यालय का लक्ष्य केवल शोध करना नहीं, बल्कि ऐसी तकनीकों को सीधे किसानों तक पहुंचाना है, जिनसे खेती अधिक लाभकारी बन सके. अनार प्रूनिंग प्रशिक्षण कार्यक्रम इसी सोच का परिणाम है. आने वाले समय में इस पहल का और विस्तार किया जाएगा, ताकि अधिक से अधिक युवा स्वरोजगार से जुड़ सकें और किसानों को स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षित विशेषज्ञ उपलब्ध हो सकें. इससे अनार उत्पादन की गुणवत्ता बढ़ने के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
August 06, 2026, 21:35 IST



