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डेंगू से जूझ रहीं ‘बालिका वधू’ फेम अविका गौर, जानिए कैसे फैलता है ये वायरस और बचने का देसी जुगाड़

‘बालिका वधू’ में आनंदी के किरदार से घर-घर पहचान बनाने वाली एक्ट्रेस अविका गौर की तबीयत को लेकर उनके पति मिलिंद चंदवानी ने नया हेल्थ अपडेट शेयर किया है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, अविका डेंगू से संक्रमित होने के बाद अस्पताल में भर्ती हुई थीं. कई दिनों तक तेज बुखार रहने के बाद उन्हें मेडिकल निगरानी की जरूरत पड़ी. अब उनकी रिकवरी चल रही है और डॉक्टरों ने उन्हें आराम करने की सलाह दी है.

मिलिंद चंदवानी ने सोशल मीडिया के जरिए अविका की सेहत से जुड़ी जानकारी साझा की थी. नए अपडेट में बताया गया कि उनकी हालत में सुधार की प्रक्रिया जारी है, लेकिन अभी पूरी तरह ठीक होने में समय लग सकता है. डॉक्टरों ने उन्हें करीब 15 दिनों तक बेड रेस्ट की सलाह दी है. डेंगू के दौरान शरीर को पर्याप्त आराम देना महत्वपूर्ण माना जाता है, क्योंकि संक्रमण के दौरान कमजोरी और थकान काफी समय तक बनी रह सकती है.

डेंगू आखिर होता कैसे है?

डेंगू एक वायरल संक्रमण है, जो संक्रमित Aedes mosquito के काटने से फैलता है. यह मच्छर आमतौर पर दिन के समय ज्यादा सक्रिय रहता है और साफ पानी में पनप सकता है. किसी संक्रमित व्यक्ति को काटने के बाद मच्छर वायरस को दूसरे व्यक्ति तक पहुंचा सकता है.

यही वजह है कि डेंगू से बचाव सिर्फ मच्छर भगाने तक सीमित नहीं है. घर और आसपास पानी जमा न होने देना भी उतना ही जरूरी है. कूलर, गमले, बाल्टी, टंकी या किसी भी खुले कंटेनर में जमा पानी मच्छरों के लिए प्रजनन की जगह बन सकता है.

शरीर में डेंगू वायरस पहुंचने के बाद क्या होता है?

मच्छर के काटने के बाद वायरस शरीर में प्रवेश करता है और कुछ दिनों बाद लक्षण दिखाई दे सकते हैं. डेंगू में अचानक तेज बुखार, सिरदर्द, आंखों के पीछे दर्द, शरीर और जोड़ों में दर्द, मितली, उल्टी या त्वचा पर लाल चकत्ते जैसे लक्षण हो सकते हैं.

हर मरीज में सभी लक्षण दिखाई दें, यह जरूरी नहीं है. कुछ लोगों में संक्रमण हल्का रहता है, जबकि कुछ मामलों में बीमारी गंभीर रूप ले सकती है. गंभीर डेंगू में शरीर में रक्तस्राव, प्लेटलेट्स में कमी और रक्त वाहिकाओं से तरल पदार्थ बाहर निकलने जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिससे ब्लड प्रेशर खतरनाक स्तर तक गिर सकता है.

इसलिए सिर्फ प्लेटलेट्स की संख्या देखकर बीमारी की गंभीरता तय करना सही नहीं है. मरीज की पूरी क्लिनिकल स्थिति, लक्षण और डॉक्टर की जांच महत्वपूर्ण होती है.

बुखार कम होते ही लापरवाही न करें

डेंगू में एक खास बात यह है कि गंभीर चेतावनी संकेत कई बार बुखार कम होने के आसपास दिखाई दे सकते हैं. लगातार पेट दर्द, बार-बार उल्टी, नाक या मसूड़ों से खून आना, उल्टी या मल में खून, बहुत ज्यादा कमजोरी, बेचैनी, अत्यधिक नींद या सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण नजर आएं तो तुरंत चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए.

डेंगू में खुद से दवा लेने से भी बचना चाहिए. खासतौर पर aspirin और ibuprofen जैसी NSAIDs रक्तस्राव का खतरा बढ़ा सकती हैं. बुखार या दर्द की दवा डॉक्टर की सलाह के अनुसार ही लेनी चाहिए.

डेंगू से बचने का ‘देसी’ तरीका क्या है?

डेंगू से बचने का सबसे असरदार घरेलू उपाय किसी काढ़े या खास खाद्य पदार्थ पर निर्भर रहना नहीं, बल्कि मच्छरों को पनपने से रोकना है. घर में सप्ताह में कम से कम एक बार उन जगहों की जांच करें जहां पानी जमा हो सकता है. कूलर का पानी बदलें, गमलों की ट्रे खाली रखें, पानी की टंकियों को ढककर रखें और बेकार पड़े डिब्बे या टायर जैसी चीजों में पानी जमा न होने दें.

इसके अलावा दिन में भी मच्छर से बचाव के लिए पूरी बांह के कपड़े पहनना, मच्छर भगाने वाले सुरक्षित रिपेलेंट का इस्तेमाल करना और खिड़कियों-दरवाजों पर जाली लगाना उपयोगी हो सकता है.

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