आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण ने बुखार के लिए बताया आयुर्वेदिक उपाय, भट्टी की तरह तप रहा हो शरीर तो करें ये 1 काम

Last Updated:August 09, 2026, 09:46 IST
Ayurvedic Remedy For Fever: ज्यादातर लोग बुखार होने पर तुरंत पेरासिटामोल लेते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं पुराने समय में बुखार उतारने के लिए क्या किया जाता था? आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण ने बहुत ही असरदार और आसान घरेलू नुस्खा के बारे में बताया है, जिन्हें आप इस लेख में जानेंगे.
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भारत में कई ऐसे पारंपरिक उपाय हैं जो पीढ़ियों से इस्तेमाल किए जाते रहे हैं. इन्हीं में से एक उपाय हाल ही में चर्चा में आया, जब योग गुरु और आयुर्वेदाचार्य बालकृष्ण ने अपने फेसबुक वीडियो में तेज बुखार के लिए लौकी का एक पुराना घरेलू नुस्खा बताया. उन्होंने कहा कि अगर किसी व्यक्ति को तेज बुखार हो तो लौकी को गोल टुकड़ों में काटकर पैरों के तलवों पर हल्के हाथों से रगड़ा जा सकता है या कुछ समय के लिए तलवों पर रखा जा सकता है.
उनके अनुसार यह उपाय शरीर को आराम पहुंचाने और बुखार के दौरान होने वाली बेचैनी को कम करने में मदद कर सकता है. हालांकि यह कोई नया उपाय नहीं है. भारतीय आयुर्वेद और घरेलू चिकित्सा में लौकी का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. आइए जानते हैं कि आयुर्वेद में इस उपाय को क्यों महत्व दिया जाता है और आधुनिक चिकित्सा इसके बारे में क्या कहती है.
लौकी से बुखार का इलाज लौकी जिसे कई जगह घिया भी कहा जाता है, दुनिया की सबसे पुरानी सब्जियों में से एक मानी जाती है. माना जाता है कि इसकी खेती हजारों साल पहले एशिया और अफ्रीका के कुछ क्षेत्रों में शुरू हुई थी. आयुर्वेद में लौकी को ठंडी तासीर वाली सब्जी माना जाता है.आयुर्वेदिक भाषा में इसे “शीत वीर्य” कहा जाता है. यही कारण है कि इसे शरीर की गर्मी और बुखार से जुड़ी समस्याओं में उपयोगी माना जाता है.
इन बीमारियों में भी फायदेमंदलौकी में 90 प्रतिशत से अधिक पानी होता है. इसकी यही विशेषता त्वचा पर ठंडक का एहसास देती है. आयुर्वेद के अनुसार पैरों के तलवों पर लौकी लगाने से शरीर को शांति मिलती है और बुखार के दौरान होने वाली असहजता कम हो सकती है. पारंपरिक ग्रंथों में लौकी का उपयोग खांसी, अस्थमा, त्वचा संबंधी समस्याओं और शरीर की अतिरिक्त गर्मी को कम करने के लिए भी बताया गया है.
डाइट में शामिल करने के फायदेपोषण की दृष्टि से भी लौकी फायदेमंद है. इसमें विटामिन C, कई प्रकार के B विटामिन, कैल्शियम और आयरन पाए जाते हैं. ये पोषक तत्व शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बेहतर बनाने में मदद करते हैं. साथ ही लौकी हल्की और आसानी से पचने वाली होती है, इसलिए बुखार के दौरान जब भूख कम लगती है तब भी इसे आसानी से खाया जा सकता है.
क्या कहता है साइंसहालांकि आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के पास अभी ऐसा कोई ठोस शोध नहीं है जो यह साबित करे कि तलवों पर लौकी लगाने से शरीर का तापमान कम हो जाता है. इस उपाय का आधार मुख्य रूप से आयुर्वेदिक परंपराएं हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यह उपाय आराम जरूर दे सकता है, लेकिन बुखार के असली कारण का इलाज नहीं है. यदि बुखार लंबे समय तक बना रहे या ज्यादा तेज हो तो डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
About the Authorशारदा सिंहSenior Sub Editor
शारदा सिंह एक अनुभवी लाइफस्टाइल पत्रकार हैं, जिनके पास डिजिटल मीडिया और कंटेंट लेखन के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से…
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New Delhi,Delhi
First Published :
August 09, 2026, 09:46 IST



