Rajasthan Congress Politics । Mewaram Jain vs Harish Chaudhary । Barmer Congress Politics। PCC Chief Govind Singh Dotasra

Last Updated:August 12, 2026, 11:46 IST
Rajasthan Politics : राजस्थान कांग्रेस की राजनीति में बड़ी हलचल हो रही है. यह हलचल बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन की जयपुर में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष गोविंद डोटासरा से मुलाकात को लेकर है. मेवाराम जैन का बाड़मेर के दिग्गज नेता हरीश चौधरी से सियासी टकराव किसी से छिपा नहीं है. बताया जा रहा है कि जैन ने डोटासरा से मुलाकात के दौरान इसी टकराव पर चर्चा की. जैन बाड़मेर के कार्यकर्ताओं के दल बल के साथ जयपुर आए थे. इसे उनका पंचायती राज और निकाय चुनावों से पहले शक्ति प्रदर्शन माना जा रहा है. बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने गोविंद सिंह डोटासरा के सामने हरीश चौधरी से टकराव के मसल पर अपनी बात रखी.
Barmer Congress Politics : कांग्रेस में वापसी के बाद पूर्व विधायक मेवाराम जैन ने मंगलवार को जयपुर में बड़ा शक्ति प्रदर्शन किया. मेवाराम जैन बाड़मेर से बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधियों, पार्षदों, संगठन पदाधिकारियों और समर्थकों के साथ जयपुर स्थित PCC वॉर रूम पहुंचे और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा से मुलाकात की. मुलाकात में मेवाराम जैन ने बाड़मेर कांग्रेस में आपसी टकराव और गुटबाजी खत्म करने की जरूरत बताई. उन्होंने कहा कि पार्टी में आपसी फूट और अंर्तकलह की वजह से पिछले विधानसभा और लोकसभा चुनाव में नुकसान हुआ था. अब पार्टी को इन मतभेदों को पीछे छोड़कर एकजुट होकर आगामी पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव लड़ना चाहिए.
मेवाराम जैन को लेकर बाड़मेर कांग्रेस में लंबे समय से चल रही अंदरूनी खींचतान के बीच यह मुलाकात अहम मानी जा रही है. बाड़मेर के कांग्रेस नेता हरीश चौधरी और मेवाराम जैन के बीच सियासी टकराव पहले भी खुलकर सामने आता रहा है. ऐसे में मेवाराम जैन का समर्थकों के साथ जयपुर पहुंचना और डोटासरा से मुलाकात करना बाड़मेर कांग्रेस के सियासी समीकरणों के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है. पश्चिमी राजस्थान में हरीश चौधरी कांग्रेस और जाट समाज का बड़ा चेहरा माने जाते हैं. राहुल गांधी के करीबियों में शामिल हरीश चौधरी पंजाब के प्रभारी भी रह चुके हैं. वर्तमान में वे मध्य प्रदेश के प्रभारी हैं. वहीं मेवाराम इस इलाके में जैन समाज का बड़ा चेहरा हैं.
जैन की वापसी पर हरीश चौधरी खेमे ने काफी बवाल काटा था
बायतू से विधायक हरीश चौधरी पूर्व में गहलोत सरकार में मंत्री रह चुके हैं. बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा क्षेत्र के सांसद भी रहे हरीश चौधरी और बाड़मेर के पूर्व विधायक मेवाराम जैन के बीच राजनीतिक अदावत पुरानी है. मेवाराम जैन बाड़मेर से तीन बार विधायक रह चुके हैं. लेकिन कुछ साल पहले उनके कुछ आपत्तिजनक वीडियो वायरल हुए थे. उसके बाद उनको पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. लेकिन करीब डेढ़ साल पहले उनकी कांग्रेस में वापसी हो गई थी. इस पर हरीश चौधरी खेमे ने काफी बवाल काटा था. बाड़मेर में जमकर पोस्टर वार चला था. उसके बाद से दोनों के बीच राजनीतिक खींचतान की खबरें आती रही है. चूंकि अब पंचायत और निकाय चुनाव होने वाले हैं तो उससे पहले मेवाराम जैन का समर्थकों के साथ जयपुर में शक्ति प्रदर्शन से पश्चिमी राजस्थान की राजनीति में नई हलचल होने लग गई है.
मेवाराम बोले- वे किसी भी तरह के टकराव को बढ़ावा नहीं देना चाहतेपीसीसी चीफ से मुलाकात के बाद मेवाराम जैन ने कहा कि वे किसी भी तरह के टकराव को बढ़ावा नहीं देना चाहते और इसी उद्देश्य से PCC चीफ से बातचीत की है. उनके साथ बड़ी संख्या में समर्थकों और जनप्रतिनिधियों की मौजूदगी को उनके शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है. मुलाकात के बाद गोविंद सिंह डोटासरा ने कहा कि पार्टी को एकजुट करना उनका काम है और कांग्रेस एकजुट है. उन्होंने कहा कि मेवाराम जैन अपने जनप्रतिनिधियों और समर्थकों के साथ आए थे. उनसे संवाद किया गया है. स्थानीय स्तर पर जो भी अन्य लोग आएंगे उनसे भी बातचीत की जाएगी. डोटासरा ने साफ किया कि कांग्रेस किसी व्यक्ति विशेष की लीडरशिप में चुनाव नहीं लड़ती है. पार्टी अपनी विचारधारा और पार्टी की लीडरशिप के आधार पर चुनाव लड़ती है. उन्होंने कहा कि सभी को अपनी नाराजगी और आपसी मनमुटाव दूर कर पार्टी को मजबूत करने के लिए साथ आना होगा.
बंद लिफाफे में टिकट नहीं, जिताऊ उम्मीदवार पर होगा फैसला
आगामी पंचायती राज और स्थानीय निकाय चुनाव में टिकट वितरण को लेकर भी डोटासरा ने बड़ा संदेश दिया. उन्होंने साफ किया कि टिकट बंद लिफाफे में नहीं दिए जाएंगे. जिताऊ उम्मीदवार और पार्टी की गाइडलाइन के आधार पर टिकट का फैसला होगा. डोटासरा ने यह भी कहा कि जब दिल्ली में पार्टी आलाकमान ने मेवाराम जैन को कांग्रेस में स्वीकार किया है तो सभी को मिल-जुलकर आगे बढ़ना चाहिए. उनका संदेश साफ था कि किसी व्यक्ति विशेष के बजाय पार्टी की विचारधारा और संगठन के आधार पर चुनाव लड़ा जाएगा. अब सवाल यही है कि डोटासरा की पहल के बाद बाड़मेर कांग्रेस में गुटबाजी और आपसी टकराव कम होगा या आने वाले स्थानीय निकाय और पंचायती राज चुनाव से पहले सियासी खींचतान और तेज होगी.
(इनपुट सहयोग- प्रेमदान देथा)
About the AuthorSandeep Rathore
संदीप राठौड़ वर्तमान में न्यूज18 इंडिया में क्लस्टर हेड राजस्थान (डिजिटल) पद पर कार्यरत हैं। राजनीति, क्राइम और सामाजिक मुद्दों पर रिपोर्टिंग में रूचि रखने वाले संदीप को पत्रकारिता का ढाई दशक से ज्यादा का अनुभव…
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Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
August 12, 2026, 11:45 IST



