Makrana Shivraj Doliya Clothes Bank

Last Updated:August 12, 2026, 06:08 IST
Makrana Shivraj Doliya: मकराना के युवा शिवराज दोलिया ने रील्स के दौर में समाज सेवा की मिसाल पेश की है. 10 साल पहले शुरू किया गया उनका कपड़ा बैंक अभियान आज 20 हजार से अधिक जरूरतमंदों तक मदद पहुंचा चुका है. वे कपड़ों को अच्छे से धोकर और प्रेस करके सम्मानपूर्वक बांटते हैं. अब वे गरीब बच्चों को पढ़ाई की सामग्री देकर उनका भविष्य भी संवार रहे हैं. मकराना, बोरावड़ और डीडवाना-कुचामन क्षेत्र तक फैला उनका यह प्रयास युवाओं को सोशल मीडिया का सही उपयोग करने और समाज सेवा से जुड़ने का संदेश देता है.
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Nagaur: आज के डिजिटल युग में जहां अधिकतर युवाओं का समय स्मार्टफोन की स्क्रीन पर रील्स देखने और स्क्रॉल करने में बीत जाता है, वहीं राजस्थान के नागौर जिले में मकराना के रहने वाले शिवराज दोलिया ने एक अलग ही राह चुनी है. शिवराज ने अपने जीवन का उद्देश्य समाज के वंचित और जरूरतमंद वर्ग की सेवा करना बना लिया है. लगभग 10 साल पहले एक बेहद छोटे स्तर से शुरू हुआ उनका यह सेवा प्रयास आज एक विशाल ‘कपड़ा बैंक’ का रूप ले चुका है. उनकी इस निस्वार्थ भावना और अटूट लगन का ही परिणाम है कि अब तक 20,000 से भी अधिक जरूरतमंद लोगों तक मदद पहुंच चुकी है.
शिवराज दोलिया बताते हैं कि इस अभियान की नींव उनके अपने व्यक्तिगत अनुभवों और आसपास के सामाजिक माहौल को देखकर पड़ी. उन्होंने अपने जीवन में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के संघर्षों और दैनिक जरूरतों के लिए जूझते लोगों को बहुत करीब से देखा था. इसी संवेदना ने उन्हें कुछ बड़ा करने के लिए प्रेरित किया. शुरुआत में शिवराज अकेले ही ऐसे परिवारों को कपड़े ढूंढकर पहुंचाया करते थे. धीरे-धीरे जब लोगों ने उनकी ईमानदारी और समर्पण को देखा, तो समाज के अन्य लोग भी इस पहल से जुड़ने लगे. आज स्थिति यह है कि स्थानीय परिवार, सामाजिक संस्थाएं और युवा स्वयंसेवक खुद आगे आकर अपने घरों के उपयोग में न आने वाले लेकिन अच्छी स्थिति वाले कपड़े इस बैंक में दान करते हैं.
स्वाभिमान का सम्मान: मकराना से डीडवाना तक विस्तारशिवराज की इस मुहिम की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वे मदद पाने वाले व्यक्ति के आत्मसम्मान का पूरा ध्यान रखते हैं. कपड़े देने से पहले उन्हें अच्छी तरह धुलवाया जाता है, प्रेस किया जाता है और बिल्कुल नए जैसा तैयार करके ही भेंट किया जाता है ताकि लेने वाले को किसी तरह की झिझक या हीनभावना महसूस न हो. शुरुआत में यह सेवा केवल मकराना तक सीमित थी, लेकिन अब इसका दायरा बढ़कर बोरावड़, बिदियाद और डीडवाना-कुचामन जिले के विभिन्न ग्रामीण क्षेत्रों तक फैल चुका है. स्थानीय युवा भी इस नेटवर्क का हिस्सा बनकर जगह-जगह जरूरतमंदों की पहचान करने में मदद करते हैं.
तन ढकने के साथ अब भविष्य संवारने की मुहिमकपड़ों के साथ-साथ अब शिवराज ने शिक्षा के क्षेत्र में भी एक नई पहल शुरू की है. वे गरीब परिवारों के बच्चों को कॉपी, किताबें और जरूरी स्टेशनरी सामग्री उपलब्ध करवा रहे हैं. उनका स्पष्ट मानना है कि पैसों की कमी के कारण किसी भी बच्चे की पढ़ाई बीच में नहीं छूटनी चाहिए. समाज सेवा के साथ-साथ शिवराज ने एमएसडब्ल्यू (मास्टर ऑफ सोशल वर्क) की डिग्री भी हासिल की है, जिससे वे स्वच्छता, शिक्षा और सामाजिक जागरूकता अभियानों में अधिक निपुणता के साथ योगदान दे पा रहे हैं. उनके इस सराहनीय कार्य के लिए उन्हें उपखंड स्तर पर और विभिन्न सामाजिक संगठनों द्वारा कई बार सम्मानित भी किया जा चुका है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Nagaur,Nagaur,Rajasthan
First Published :
August 12, 2026, 06:08 IST



