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राजस्थान विधानसभा सत्र 20 अगस्त से, आचार संहिता के बीच क्या सरकार कर पाएगी बड़ी घोषणाएं? जानें पूरा गणित

जयपुर. राजस्थान विधानसभा का सत्र 20 अगस्त से शुरू होने जा रहा है. इस बार विधानसभा का सत्र इसलिए भी खास माना जा रहा है, क्योंकि प्रदेश में निकाय और पंचायत चुनाव की प्रक्रिया के बीच सदन की बैठक होने जा रही है. निकाय चुनाव के लिए आरक्षण की लॉटरी निकल चुकी है, जबकि पंचायत चुनाव की लॉटरी अभी होनी है. इसके बाद चुनावी प्रक्रिया आगे बढ़ेगी और आचार संहिता लागू होने की स्थिति में विधानसभा का सत्र भी इसी माहौल के बीच चलेगा.

ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही है कि आचार संहिता लागू होने के बाद विधानसभा के कामकाज पर कितना असर पड़ेगा. क्या सरकार सदन के अंदर बड़ी घोषणाएं कर सकेगी और अगर सरकार कोई घोषणा करती है तो क्या चुनाव आयोग उस पर रोक लगा सकता है. फिलहाल जानकारों का कहना है कि विधानसभा की कार्यवाही और आचार संहिता दोनों अलग-अलग विषय हैं.

आचार संहिता से सदन की कार्यवाही नहीं रुकेगीआचार संहिता लागू होने का सीधा मतलब यह नहीं है कि विधानसभा की कार्यवाही रुक जाएगी. सदन में सवाल-जवाब होंगे, चर्चा होगी और जरूरी विधायी काम भी चलते रहेंगे. फर्क सरकार की घोषणाओं और चुनाव से जुड़ी गतिविधियों पर पड़ सकता है. विधानसभा के सेवानिवृत संपादक सुरेश चंद जैन के मुताबिक आचार संहिता विधानसभा की संवैधानिक कार्यवाही पर रोक नहीं लगाती. इसका असर सरकार की उन गतिविधियों पर होता है, जिनसे चुनाव में मतदाताओं को प्रभावित करने की आशंका हो. ऐसे में सरकार को चुनाव आयोग की तय सीमाओं का ध्यान रखना होगा.

नई योजनाओं और घोषणाओं पर लग सकता है ब्रेकआचार संहिता के दौरान सरकार की ओर से नई योजनाओं की घोषणा, नई भर्तियों का ऐलान, चुनाव को प्रभावित करने वाली नई घोषणाएं, लोकार्पण और शिलान्यास जैसे कार्यक्रमों पर चुनाव आयोग की नजर रहती है. इसलिए विधानसभा के भीतर सरकार के सामने भी यह चुनौती रहेगी कि सदन में चर्चा के दौरान कौन सा फैसला या घोषणा चुनावी असर पैदा कर सकती है. सरकार की घोषणाओं पर विपक्ष की भी नजर रहेगी. विधानसभा सत्र के दौरान अगर कोई बड़ी घोषणा होती है तो विपक्ष उसे चुनाव से जोड़कर सरकार पर सवाल उठा सकता है.

टीकाराम जूली ने सरकार पर लगाए आरोपनेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने इस पूरे मामले को लेकर भाजपा सरकार पर निशाना साधा है. उनका कहना है कि चुनाव के दौरान अगर भाजपा अपने किसी उम्मीदवार को मंत्री बना सकती है तो फिर आचार संहिता का क्या मतलब रह जाएगा. जूली ने आरोप लगाया कि सरकार आचार संहिता को मानने वाली नहीं है. उन्होंने यह भी कहा कि अभी आचार संहिता लागू नहीं हुई थी, तब भी सरकार ने कितनी वेलफेयर योजनाओं की घोषणाएं कीं और कितने काम करवाए गए, इस पर सवाल उठते हैं. जूली ने आरोप लगाया कि सरकार विधानसभा से बचने का रास्ता ढूंढ रही है.

UCC और ट्री प्रोटेक्शन एक्ट पर रह सकती है नजर
उधर सरकार की ओर से भी यह माना जा रहा है कि विधानसभा सत्र के दौरान चुनावी माहौल के कारण बड़ी घोषणाओं की गुंजाइश सीमित रहेगी. यूडीएच मंत्री झाबर सिंह खर्रा के मुताबिक इस सत्र में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा होने की संभावना है. अगर सरकार UCC से जुड़ा विधेयक विधानसभा में पेश करती है तो यह राजस्थान की राजनीति में बड़ा मुद्दा बन सकता है. इसके अलावा खेजड़ी को बचाने के लिए ट्री प्रोटेक्शन एक्ट लाने की तैयारी भी सरकार की ओर से की जा रही है. वाणिज्यिक कराधान यानी कमर्शियल टैक्सेशन से जुड़े संशोधन विधेयक भी सदन में पेश किए जाने की संभावना है.

चुनाव आयोग की घोषणाओं पर रहेगी नजरराजस्थान में वन स्टेट वन इलेक्शन के तहत निकाय और पंचायत चुनाव की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है. निकाय चुनाव के लिए आरक्षण की लॉटरी हो चुकी है और पंचायत चुनाव की लॉटरी अभी बाकी है. चुनावी प्रक्रिया शुरू होने के साथ ही आचार संहिता का असर सरकार के फैसलों पर दिखाई दे सकता है. ऐसे में 20 अगस्त से शुरू होने वाला विधानसभा सत्र कई मायनों में महत्वपूर्ण रहेगा. सदन चलता रहेगा, विधायक अपने सवाल उठाएंगे और सरकार विधायी कामकाज आगे बढ़ाएगी, लेकिन चुनावी असर वाली घोषणाओं को लेकर सरकार को सावधानी रखनी होगी. विधानसभा के भीतर होने वाली हर बड़ी घोषणा पर विपक्ष के साथ चुनाव आयोग की भी नजर रहने वाली है.

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