39 साल के मेसी जब वर्ल्ड कप खेल सकते हैं सकते हैं, तो कोहली-रोहित क्यों नहीं? भज्जी बोले-फिटनेस हो तो उम्र से फर्क नहीं पड़ता

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’39 के मेसी जब वर्ल्ड कप खेल सकते हैं सकते हैं, तो कोहली-रोहित क्यों नहीं?’
Last Updated:August 13, 2026, 17:48 IST
Harbhajan Singh on Virat Koli 2027 ODI World Cup: हरभजन सिंह ने विराट कोहली और रोहित शर्मा के 2027 वनडे वर्ल्ड कप खेलने का पुरजोर समर्थन किया है. भज्जी ने कहा कि 37 की उम्र में भी कोहली मैदान पर 20 साल के युवाओं को मात दे रहे हैं. लियोनल मेसी का उदाहरण देते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि करियर का मापदंड उम्र नहीं, बल्कि फिटनेस और परफॉर्मेंस होना चाहिए. हरभजन के मुताबिक, कोहली ने ही 2014 में कप्तान बनकर भारतीय टीम में जीत की मानसिकता और बेहतरीन फिटनेस कल्चर की शुरुआत की थी.हरभजन सिंह ने विराट और रोहित के 2027 वनडे विश्व कप में खेलने का किया सपोर्ट.
नई दिल्ली. उम्र सिर्फ एक आंकड़ा है. खेल जगत में यह जुमला पुराना हो चुका है, लेकिन जब बात भारतीय क्रिकेट के दो स्तंभों विराट कोहली और रोहित शर्मा की आती है, तो यह लाइन बिल्कुल सटीक बैठती है. हाल में हरभजन सिंह ने दोनों स्टार बल्लेबाजों के भविष्य को लेकर चल रही तमाम अटकलों पर विराम लगाते हुए एक बड़ा बयान दिया है. हरभजन का साफ मानना है कि अगर खिलाड़ी मैदान पर अपना शत-प्रतिशत दे रहा है और पूरी तरह फिट है, तो बर्थडे के पन्नों से उसकी काबिलियत नहीं नापी जानी चाहिए.
हरभजन सिंह (Harbhajan Singh) ने ‘पीटीआई’ के साथ बातचीत में एक बेहद ही दिलचस्प तुलना पेश की. उन्होंने फुटबॉल की दुनिया के सबसे महान खिलाड़ियों में शुमार लियोनेल मेसी का हवाला दिया. हरभजन ने कहा, ‘अगर 39 साल की उम्र में लियोनल मेसी दुनिया के सबसे बड़े मंच (FIFA वर्ल्ड कप) पर अर्जेंटीना को विश्व विजेता बना सकते हैं, और मैदान पर पांच-पांच डिफेंडर उन्हें रोक नहीं पाते, तो फिर विराट कोहली और रोहित शर्मा 2027 का वनडे वर्ल्ड कप क्यों नहीं खेल सकते?’ भज्जी का तर्क बहुत सीधा है.किसी भी एथलीट का आकलन उसकी उम्र से नहीं, बल्कि उसकी मैदान पर परफॉर्मेंस, फिटनेस और मैच जिताने की क्षमता से होना चाहिए.
20 साल के युवाओं को मात देते 37 के कोहलीविराट कोहली (Virat Kohli) अपनी फिटनेस को लेकर जिस स्तर पर हैं, वह आज की युवा पीढ़ी के लिए एक बहुत बड़ा मापदंड है. हरभजन सिंह ने कोहली की फिटनेस की तारीफ करते हुए कहा कि विराट भले ही 30 के दशक के उत्तरार्ध में हों, लेकिन जब बात मैदान पर दौड़ने, डाइव लगाने या चुस्ती-फुर्ती दिखाने की आती है, तो वे टीम के 20-22 साल के युवाओं को भी पीछे छोड़ देते हैं.जब कोई खिलाड़ी अपनी फिटनेस के मामले में टीम के सबसे युवा खिलाड़ियों से भी बेहतर प्रदर्शन कर रहा हो, तो उसके करियर पर उम्र के आधार पर सवाल उठाना बेमानी है.
2027 वर्ल्ड कप में रोहित-विराट की जरूरतक्रिकेट गलियारों में यह चर्चा लंबे समय से चल रही है कि क्या रोहित शर्मा और विराट कोहली 2027 के वनडे वर्ल्ड कप तक खेल पाएंगे? इस पर भज्जी का रुख बिल्कुल स्पष्ट है. उनका मानना है कि अगर इन दोनों दिग्गजों के अंदर खेलने की इच्छाशक्ति और विश्वास है, तो उन्हें रोकने का कोई कारण नहीं बनता. रोहित शर्मा का नेतृत्व और उनकी आक्रामक बल्लेबाजी, साथ ही विराट कोहली की एंकरिंग और रन चेज़ करने की क्षमता ये दो ऐसी चीजें हैं जो किसी भी बड़ी आईसीसी (ICC) ट्रॉफी को जीतने के लिए किसी भी टीम के पास होना बेहद जरूरी हैं.
कोहली ने बदली भारतीय क्रिकेट की सोचबातचीत के दौरान हरभजन सिंह ने विराट कोहली की कप्तानी के उस दौर को भी याद किया, जिसने भारतीय टेस्ट क्रिकेट का चेहरा हमेशा के लिए बदल दिया. भज्जी ने स्वीकार किया कि 2014-15 में जब विराट ने टेस्ट टीम की कमान संभाली, तो उन्होंने ड्रेसिंग रूम में एक अलग तरह की ‘विनिंग मेंटालिटी’का बीजारोपण किया. विराट के आने से पहले, हम कभी यह नहीं सोचते थे कि मैच के पांचवें दिन 400 रनों का लक्ष्य भी हासिल किया जा सकता है. कोहली ने भारतीय क्रिकेट में फिटनेस का जो बेंचमार्क सेट किया, उसने सीनियर खिलाड़ियों को भी यह सोचने पर मजबूर कर दिया कि उनकी वास्तविक सीमाएं उससे कहीं ज्यादा हैं जो वे सोचते थे. कोहली ने टीम को यह विश्वास दिलाया कि हम दुनिया के किसी भी कोने में जाकर किसी भी विरोधी को हरा सकते हैं.
About the AuthorKamlesh Raiचीफ सब एडिटर
कमलेश कुमार राय नेटवर्क18 ग्रुप में बतौर चीफ सब एडिटर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं. वह बीते 15 सालों से खेल पत्रकारिता की पिच पर डटे हुए हैं. हिंदी स्पोर्ट्स सेक्शन में वह खेल कंटेंट की गहरी समझ, सटीक विश्लेषण और ब…
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New Delhi,Delhi
First Published :
August 13, 2026, 17:48 IST



