सरकार कहती है रोज दूध मिलता है… लेकिन आंगनवाड़ी में क्या है सच्चाई? जोधपुर में ‘मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना’ का रियलिटी चेक

Last Updated:August 14, 2026, 12:41 IST
Jodhpur Ground report: जोधपुर की आंगनवाड़ियों में ‘मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना’ के तहत चलाए जा रहे दूध वितरण का ग्राउंड रियलिटी चेक किया गया. सूरसागर की लोहार और बरगी बस्ती के केंद्रों में बच्चों ने बताया कि उन्हें सप्ताह में 5 दिन सुबह 9 बजे दूध और मुरमुरे मिलते हैं. कार्यकर्ता हेमलता के अनुसार, बच्चों की उपस्थिति के हिसाब से ताजा दूध तैयार किया जाता है, जिससे योजना का लाभ कागजों से निकलकर सीधे बच्चों तक पहुंचने की पुष्टि होती है.
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Jodhpur: राजस्थान सरकार की ओर से नौनिहालों के पोषण और स्वास्थ्य का स्तर सुधारने के लिए कई महत्वाकांक्षी योजनाएं चलाई जा रही हैं. इन्हीं में से एक है ‘मुख्यमंत्री अमृत आहार योजना’, जिसके तहत आंगनवाड़ी केंद्रों पर 3 से 6 वर्ष तक के बच्चों को सप्ताह में 5 दिन पौष्टिक गर्म दूध देने का प्रावधान है. इस योजना का लाभ वास्तव में बच्चों तक पहुंच रहा है या यह सिर्फ दावों तक सीमित है, इसकी जमीनी हकीकत जानने के लिए जोधपुर के आंगनवाड़ी केंद्रों की ग्राउंड रिपोर्टिंग की गई.
पड़ताल की शुरुआत आंगनवाड़ी केंद्रों में मौजूद बच्चों से सीधी बातचीत के साथ हुई. जब बच्चों से पूछा गया कि उन्हें दूध कभी-कभार मिलता है या रोज, तो बच्चों ने उत्साह के साथ बताया कि उन्हें केंद्र पर नियमित रूप से दूध पीने को मिलता है. बच्चों से जब यह पूछा गया कि उन्हें दूध कैसा पसंद है, तो किसी ने गर्म तो किसी ने ठंडा दूध मिलने और पीने की बात कही. बच्चों की इन मासूम बातों से साफ हुआ कि दूध उनके दैनिक पोषण आहार का एक मुख्य हिस्सा बन चुका है.
सूरसागर की लोहार और बरगी बस्ती के केंद्रों का जायजायोजना की जमीनी स्थिति देखने के लिए जोधपुर के सूरसागर क्षेत्र स्थित लोहार बस्ती और बरगी बस्ती के आंगनवाड़ी केंद्रों का दौरा किया गया. लोहार बस्ती के केंद्र पर कार्यकर्ता बच्चों को अपने सामने बैठाकर दूध पिलाती नजर आईं. वहीं बरगी बस्ती के केंद्र तक पहुंचने तक बच्चों को दूध का वितरण किया जा चुका था. अलग-अलग बच्चों से बातचीत करने पर उन्होंने पुष्टि की कि उन्हें आंगनवाड़ी में रोजाना दूध दिया जाता है.
बच्चों की संख्या के आधार पर तैयार होता है ताजा दूधलोहार बस्ती केंद्र की आंगनवाड़ी कार्यकर्ता हेमलता ने बताया कि केंद्र पर रोजाना जितने बच्चे उपस्थित होते हैं, उसी के अनुसार दूध तैयार किया जाता है. उन्होंने स्पष्ट किया— “यदि केंद्र पर 15 बच्चे आते हैं तो 15 के हिसाब से, और 20 बच्चे आते हैं तो 20 बच्चों के लिए ताजा दूध तैयार किया जाता है.” बच्चों को सोमवार से शुक्रवार यानी सप्ताह में पूरे पांच दिन दूध उपलब्ध कराया जाता है.
सुबह 8 बजे खुलता है केंद्र, 9 बजे मिलता है दूध और मुरमुरेकार्यकर्ता के अनुसार, आंगनवाड़ी केंद्र सुबह 8 बजे खुल जाता है. इसके बाद बच्चों की उपस्थिति दर्ज की जाती है और जरूरी प्रक्रिया पूरी करने के बाद पोषण आहार तैयार होता है. सुबह करीब 9 बजे बच्चों को दूध के साथ मुरमुरे (पोषण आहार) दिए जाते हैं. तय समय सारणी के अनुसार बच्चों को नाश्ता देने की यह व्यवस्था योजना के सफल क्रियान्वयन को दर्शाती है.
सतत निगरानी और निरीक्षण से ही बनी रहेगी गुणवत्तासरकारी योजनाओं का वास्तविक उद्देश्य तभी पूरा होता है जब उनका लाभ कागजी आंकड़ों से बाहर निकलकर सीधे लक्षित वर्ग तक पहुंचे. जोधपुर के आंगनवाड़ी केंद्रों की इस ग्राउंड रिपोर्ट से यह राहतभरी तस्वीर सामने आई है कि बच्चों को नियमित दूध मिल रहा है. हालांकि, इस व्यवस्था में निरंतरता और दूध की गुणवत्ता बनी रहे, इसके लिए संबंधित विभाग द्वारा समय-समय पर आकस्मिक निरीक्षण और निगरानी बेहद जरूरी है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jodhpur,Jodhpur,Rajasthan
First Published :
August 14, 2026, 12:41 IST



