40 साल पहले बिछड़ीं, 30 साल से दोस्त, DNA टेस्ट से खुला राज, भारत से हजारों मील दूर दो सगी बहनों की कहानी

अक्सर आपने कुंभ के मेले में परिवारों के बिछुड़ने की कहानियां सुनी होंगी. कैसे मेले में बिछुड़े बच्चे वर्षों बाद अपने माता-पिता या भाई-बहनों को मिल गए, हो सकता है कि भारत में घटी ऐसी घटनाओं को आप सच न भी मानते हों, लेकिन दिल्ली से हजारों मील दूर नीदरलैंड में 40 साल बाद मिली दो बिछुड़ी बहनों की अनोखी कहानी सुनकर आप न केवल यकीन करेंगे बल्कि कुदरत के इस करिश्मे पर आश्चर्य भी करेंगे. इसके साथ ही दिलचस्प बात ये भी है कि भले ही ये दोनों बहनें डच परिवारों के साथ नीदरलैंड में रह रही हों, लेकिन इनका बेहद मजबूत कनेक्शन भारत से है.
एकदम फिल्मी ये कहानी है दो बहनों मीना गेलटिंक और मिनल टिजसेन की. इन दोनों ही बहनों का जन्म एक भारतीय परिवार में हुआ था लेकिन किन्ही वजहों से दोनों बहनों को अनाथालय में छोड़ दिया गया. संयोग और प्रकृति की योजना देखिए यहीं से शुरू होती है. इन दोनों बहनों को ही नीदरलैंड के रहने वाले अलग-अलग डच परिवारों ने गोद ले लिया.
दोनों बहनों को नीदरलैंड में अलग-अलग परवरिश मिली, अलग-अलग सरनेम मिले. एक गेलटिंक और दूसरी टिजसेन. हालांकि उनके भारतीय नाम मीना और मिनल ही रहे जो शायद उनके जैविक माता-पिता ने दिए होंगे या उस अनाथालाय ने दिए हों जहां वे छोड़ दी गई थीं.
बचपन से लेकर करीब 10 साल की उम्र तक दोनों आराम से डच परिवारों के साथ रह रही थीं. यह कुदरत की योजना का दूसरा पड़ाव था कि तभी 1996 में नीदरलैंड में एक गोद लिए गए बच्चों का सम्मेलन हुआ. जिसमें बाकी बच्चों के साथ ये दोनों बहनें भी पहुंचीं.
11 अगस्त को जब दोनों बहनें मिलीं तो उन्होंने बहनों के रूप में पहली सेल्फी ली, उससे पहले वे दोस्त थीं.
सभी बच्चों की तरह ये दोनों भी वहां मिलीं. एक दूसरे के बारे में पूछा और बातचीत की तो पता चला कि दोनों का जन्म भारत में हुआ था और वहीं से परिवारों ने उन्हें गोद लिया. नीदरलैंड में भी उनके घरों के बीच में ज्यादा दूरी नहीं थी बस करीब 100 मील की दूरी थी. दोनों ने उस दिन खूब बातें की. काफी ज्यादा चेहरा भी मिलने के कारण कई बच्चों ने उन्हें बहनें तक कहना शुरू कर दिया.
दोनों अपने-पने घर पहुंचीं लेकिन दोनों को एक दूसरे में कुछ खास और गहरा अपनापन लगा था जो वे घर पहुंचने तक मिस करती रहीं. हालांकि फिर भी दोनों को सालों तक इस बात का बिल्कुल अंदाजा नहीं था कि उनकी अपनी सगी बहन उतनी ही पास रहती है.
इसके बाद कुछ समय तक दोनों फोन या पत्रों से एक दूसरे से संपर्क में रहीं, लेकिन जिंदगी की भागदौड़ में करीब 15 साल तक के लिए यह रिश्ता टूट गया.मीना अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों में और मिनल अपने घर परिवर और पति के साथ व्यस्त हो गई.
हालांकि इतने लंबे समय में कई बार मीना को दिल में एक खालीपन महसूस होता रहा. वह अक्सर कहती थीं कि उनके दिल में कोई सुराख है. कमोबेश यही हालत मिनल की भी थी, वे अपने बायलॉजिकल परिवार को भी देखना चाहती थीं. हालांकि 40 साल बाद उन्हें समझ आ गया है कि वह खालीपन क्यों था.
इसी अप्रैल 2026 में अचानक मिनल ने माय हेरिटेज का डीएनए टेस्ट करवाया. फोन पर जब जांच का परिणाम आया तो एकबारगी मीरा सन्न रह गई. उसमें लिखा था कि मीना-सिस्टर’, यानि उनकी एक बहन है मीना. पहले तो मीना को यकीन ही नहीं हुआ कि क्या मीना ही उनकी बहन है, जिसे मजाक में सभी दोस्त उसकी बहन बता रहे थे और जिससे वह उस सम्मेलन में मिली थी. मिनल ने कन्फर्म करना चाहा और फिर उन्होंने सोशल मीडिया पर मीना को खोजा. तस्वीरें देखकर मीना की पूरी पहेली सुलझने लगी. डीएनए टेस्ट ने उन दोनों का 100 प्रतिशत मैच दिखाया. अब साबित हो चुका था कि दोनों सगी बहनें थीं.
इतना कन्फर्म होते ही मिनल के आंसू निकल आए, उन्होंने कहा, “हम पहले दोस्त थे, बहन बाद में बनीं लेकिन असल में हम हमेशा बहनें थीं, बस हमें पता नहीं था.” मिनल ने ये जानकारी तुरंत अपनी बहन मीना को दी और अब दोनों ही पुरानी यादों को एकदम नई नजर से देखने लगीं. वह लड़की जो कभी सिर्फ गोद ली गई एक और बच्ची लगती थी, असल में उनकी अपनी बहन निकली.
हाल ही में 11 अगस्त को दोनों नीदरलैंड्स में आमने-सामने आईं. दोनों खूब गले लगीं, आंसू बहाए, रोईं-हंसी और फिर पहली बार दोनों ने बहनों के रूप में सेल्फी ली. मीना ने मिनल से कहा, “जब मैं तुम्हें देखती हूं तो लगता है जैसे घर आ गई हूं.” उनके लिए यह खोज सिर्फ खुशी नहीं, बल्कि सालों से महसूस हो रहे खालीपन का जवाब भी थी. उन्होंने कहा, “जैसे पहेली का एक गायब टुकड़ा मिल गया हो.”
मिनल साफ कहती हैं कि बहन मिलने से उनके गोद लिए गए परिवार का प्यार कम नहीं होता. डच माता-पिता और भाई-बहनों ने भी उन्हें भरपूर प्यार दिया. लेकिन साथ ही एक अकेलापन भी था कि जन्म के रिश्तेदारों का कोई रिकॉर्ड नहीं था. अब वह अकेलापन खत्म हो गया है.
आज मिनल फ्रांस में अपने पार्टनर और दो बेटों के साथ रहती हैं. जबकि मीना तीन बच्चों की मां हैं. दोनों रोज घंटों बात करती हैं, मैसेज करती हैं और उन सालों की कमी पूरी कर रही हैं जो एक-दूसरे के बिना बीते.
ये असली कहानी बताती है कि कभी-कभी हम जिस परिवार को सालों ढूंढते रहते हैं, वह हमसे बहुत करीब होता है. मीना और मिनल के लिए वह परिवार एक किशोर दोस्ती के रूप में पहले से मौजूद था. बस पहचानना बाकी था. अब वह गुमनाम खोई हुई पहचान भी मिल गई है.



