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जेपी नड्डा का एम्स में एंजियोग्राफी, क्यों कराई जाती है यह जांच, क्या हार्ट पर खतरा होता है? कार्डियोलॉजिस्ट से जानें सारी बात

Last Updated:August 14, 2026, 18:26 IST

JP Nadda Coronary Angiography: केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जे पी नड्डा का अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स में कोरोनरी एंजियोग्राफी हुई है. आखिर यह कोरोनरी एंजियोग्राफी जांच होती क्यों है. किसलिए यह जांच कराई जाती है. क्या यह हार्ट के लिए कोई गंभीर संकेत तो नहीं है. इस पूरे मामले पर न्यूज 18 ने फोर्टिस अस्पताल, नई दिल्ली में कार्डियोलॉजी डिपार्टमेंट के डायरेक्टर डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी से बात की और यह जानना चाहा कि कोरोनरी एंजियोग्राफी की नौबत क्यों आती है.जेपी नड्डा का एम्स में एंजियोग्राफी, क्यों कराई जाती है यह जांच Zoomजेपी नड्डा को क्यों हुई कोरोनरी एंजियोग्राफी.

JP Nadda Coronary Angiography : केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को असहज महसूस होने के बाद दिल्ली के एम्स में भर्ती कराया गया. यहां 13 अगस्त 2026 की शाम उनकी कोरोनरी एंजियोग्राफी कराई गई. एम्स की ओर से जारी बयान में उनकी हालत स्थिर बताई गई है और उन्हें एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में निगरानी में रखा गया है. उनकी कई और जांचें हुई है. बयान में कहा गया है कि केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जेपी नड्डा को असहज महसूस होने के बाद जांच के लिए लाया गया. वह फिलहाल स्थिर हैं और एम्स के कार्डियोलॉजी विभाग में निगरानी के लिए भर्ती हैं. अब सवाल है कि कोरोनरी एंजियोग्राफी है क्या बला. इसे कराने की जरूर क्यों होती है. क्या यह हार्ट में किसी बड़ी अनहोनी का संकेत है. इस एंजियोग्राफी में क्या निकलकर सामने आता है. इन सारे मुद्दों पर हमने फोर्टिस अस्पताल में कार्डियोलॉजी और इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी डिपार्टमेंट के प्रिंसपल डायरेक्टर डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी से बात की.

क्यों की जाती है कोरोनरी एंजियोग्राफी

डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी ने बताया कि जब भी छाती में भारीपन महसूस होता है या नाभि से लेकर कान तक किसी भी हिस्से में दर्द हो रहा होता है तो हमलोग हार्ट सही से काम कर रहा है या नहीं, इसके लिए ईसीजी टेस्ट कराते हैं. ईसीजी टेस्ट बहुत आसान है. इसमें एक-दो मिनट के अंदर जांच हो जाती है. इससे हार्ट के रिद्म का पता चलता है. अगर उसमें बहुत ज्यादा ऊंच-नीच होता है तो हमलोग कोरोनरी एंजियोग्राफी टेस्ट करते हैं. कोरोनरी एंजियोग्राफी में हम यह पता लगाते हैं कि हार्ट की तीनों प्रमुख धमनियां और इससे जुड़े ब्लड वैसल्स में कोलेस्ट्रॉल या किसी अन्य वजहों से सिकुड़ तो नहीं गए हैं. इस कोरोनरी एंजियोग्राफी से यह पता चलता है कि हार्ट की ओर जाने वाली खून की नलियों में कहीं ब्लॉकेज या ब्लॉकेज होने की आशंका तो नहीं है. अगर इन नलियों में 60-70 प्रतिशत तक सिकुड़न या ब्लॉकेज होता है तो हमलोग तत्काल कुछ नहीं करते. कुछ दवाइयों के साथ लाइफस्टाइल में सुधार करने की सलाह देते हैं. अगर इससे ज्यादा ब्लॉकेज आ गया है तो तत्काल बायपास या स्टंट लगाने की जरूरत होती है. यह इसी जांच के साथ-साथ हो जाता है.

कोरोनरी एंजियोग्राफी किसे कराने की है जरूरत

डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी कहते हैं कि आमतौर पर जब सीने में असहजता हो, सीने पर भारपन महसूस हो, दर्द हो. कुछ मिनटों से अधिक समय तक सीने में जकड़न लगे, नाभि से लेकर कान तक में कहीं भी दर्द हो और यह दर्द हाथ, जबड़े, पीठ, गर्दन या कंधे तक फैल जाए, दूसरी तरफ अचानक सांस फूलने की समस्या हो, बेहोशी, चक्कर आए तो इस स्थिति में पहले ईसीजी कराई जाती है. अगर ईसीजी रिपोर्ट में कुछ बड़ा संकेत मिलता है तो कोरोनरी एंजियोग्राफी कराई जाती है.

क्या कोरोनरी एंजियोग्राफी सीटी स्कैन है

नहीं, सीटी स्कैन रेडियोलॉजिस्ट की निगरानी में होता है लेकिन कोरोनरी एंजियोग्राफी कैथ लैब में होता है. कोरोनरी एंजियोग्राफी कार्डियोलॉजिस्ट ही करते हैं. इसमें आमतौर पर 20 से 30 मिनट का समय लगता है. मरीज को होश में रखा जाता है, लेकिन आराम महसूस कराने के लिए हल्की दवा दी जा सकती है. जांघ या कलाई के हिस्से को सुन्न किया जाता है और सूई घुसाकर कैथेडर डाला जाता है. इस कैथेडर के माध्यम से खून की नली में बहुत पतली और लचीली प्लास्टिक की नलिका डाली जाती है. एक्स-रे मॉनिटर की मदद से इस कैथेटर को धीरे-धीरे हार्ट की कोरोनरी धमनियों तक पहुंचाया जाता है. इसमें एक खास तरल पदार्थ छोड़ा जाता है जिसके कारण ब्लड वैसल्स लाल और काले रंग में स्पष्ट उभर आता है. इस दौरान एक्सरे इमेजेस और लाइव वीडियो रिकॉर्डिंग के माध्यम से यह देखा जाता है कि ब्लॉकेज कितना है. खून का फ्लो सही हो रहा या नहीं. डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी कहते हैं कि अगर ब्लॉकेज 70 प्रतिशत तक है तो कुछ नहीं किया जाता लेकिन अगर 70 प्रतिशत से ज्यादा ब्लॉकेज है तो इसके साथ ही हमलोग कुछ प्रोसेस करते हैं. हार्ट को मुख्य रूप से तीन धमनियों के माध्यम से खून पहुंचता है. अगर इन तीनों में ब्लॉकेज है तो तुरंत बाय पास सर्जरी करनी पड़ती है. अगर किसी एक में ब्लॉकेज है तो स्टंट से काम चल जाता है.

क्या करें कि ऐसी जांच की जरूरत ही नहीं हो

डॉ. नित्यानंद त्रिपाठी कहते हैं कि हार्ट की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए सही खान-पान, नियमित एक्सरसाइज, पर्याप्त नींद और तनाव रहित जीवन की जरूरत होती है. इसके साथ पर्यावरण के प्रतिकुल असर से भी बचना होता है. ऐसे में जैसे हमारे बुजुर्गों का रहन-सहन था, वही तरीका अपनाइए. फास्ट फूड, जंक फूड, प्रोसेस्ड फूड, तली-भुनी चीजें आदि से दूर रहें. शुद्ध कुदरती अनाजों से बना खाना, हरी साग सब्जियों का सेवन करें. रोज फल और सीड्स खाएं. ज्यादा चीनी और ज्यादा नमक न खाएं. रोज आधा घंटा एक्सरसाइज करें. तनाव से दूर रहें. हर व्यक्ति के जीवन में तनाव रहता है लेकिन इसका मैनेज करना जरूरी है. इसके लिए योग मेडिटेशन कीजिए. इसके साथ सुकून भरी नींद की भी बहुत जरूरत है.

About the AuthorLakshmi Narayan

मीडिया में 20 साल से ज्यादा का अनुभव रखने वाले लक्ष्मी नारायण पत्रकारिता के हर विधा में माहिर हैं. भविष्य की आहट और ट्रेंड्स को समय से पहले भांपने की अद्भुत कला उनके अंदर समाहि…

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New Delhi,New Delhi,Delhi

First Published :

August 14, 2026, 18:26 IST

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