Child Health Care Tips: रोटी-दाल छोड़ बच्चे खा रहे पिज्जा-बर्गर? बदलती डाइट सेहत के लिए खतरनाक, डॉक्टर ने दी खास सलाह

अंबाला: आजकल बच्चों के टिफिन में घर की रोटी-सब्जी की जगह पिज्जा, बर्गर, चाउमीन और पैकेट बंद स्नैक्स ने जगह बना ली है. दरअसल स्कूल से लौटते ही भूख लगने पर बच्चे फल या घर का बना नाश्ता खाने के बजाय चिप्स, भुजिया, नमकीन और अन्य जंक फूड की तरफ बढ़ रहे हैं. स्वाद के लिए शुरू हुई यह आदत अब बच्चों की सेहत पर भारी पड़ती दिखाई दे रही है. बदलती जीवनशैली और खान-पान की खराब आदतों के बीच फैटी लीवर जैसी समस्या अब केवल बड़ों तक सीमित नहीं रह गई है, बल्कि बच्चों और युवाओं में भी इसके मामले सामने आ रहे हैं.
बता दें कि अंबाला शहर के नागरिक अस्पताल की ओपीडी में इन दिनों पेट दर्द, गैस, कब्ज और लीवर से जुड़ी शिकायतों वाले मरीज पहुंच रहे हैं. मिली जानकारी के अनुसार, प्रतिदिन करीब 25 से 30 मरीज लीवर संबंधी परेशानी लेकर अस्पताल पहुंच रहे हैं. इनमें बच्चों और युवाओं की संख्या भी काफी देखने को मिल रही है. चिकित्सकों के अनुसार, लगातार जंक फूड और पैकेट बंद खाद्य पदार्थों का सेवन, शारीरिक गतिविधि की कमी और असंतुलित खान-पान फैटी लीवर की समस्या का बड़ा कारण बन सकता है.
जंक फूड का सेवन चिंता का विषयवही अंबाला शहर नागरिक अस्पताल में कार्यरत होम्योपैथिक चिकित्सक डॉ. रजिता ने लोकल 18 को बताया कि बच्चों में जंक फूड का बढ़ता सेवन चिंता का विषय है. उन्होंने फास्ट फूड को ‘मीठा जहर’ बताते हुए कहा कि इसका लगातार सेवन शरीर में अतिरिक्त वसा बढ़ा सकता है और लीवर की कोशिकाओं में फैट जमा होने की समस्या पैदा हो सकती है. इससे धीरे-धीरे लीवर प्रभावित होने लगता है.
डॉ. रजिता के मुताबिक, बच्चों में शुरुआत में पेट दर्द, गैस, कब्ज, सुस्ती या पेट बाहर निकलने जैसे सामान्य लक्षण दिखाई दे सकते हैं. कई बार माता-पिता इन्हें मामूली परेशानी समझकर नजरअंदाज कर देते हैं, लेकिन समस्या लगातार बनी रहे तो चिकित्सकीय सलाह लेना जरूरी है और जरूरत पड़ने पर अल्ट्रासाउंड और अन्य जांचों के माध्यम से लीवर की स्थिति का पता लगाया जा सकता है.
सुबह, दोपहर और शाम में क्या खाएं?उन्होंने बताया कि बच्चों में सुबह और शाम के समय पैकेट बंद खाद्य पदार्थ, भुजिया, नमकीन और मैदे से बनी चीजों का सेवन बढ़ गया है. इसके साथ ही मीठे पेय और कम पानी पीने की आदत भी समस्या को बढ़ा सकती है. उन्होंने अभिभावकों से बच्चों की डाइट पर विशेष ध्यान देने की अपील की. उन्होंने कहा कि बच्चों की डाइट में ताजे फल, हरी पत्तेदार सब्जियां, सलाद, दालें और साबुत अनाज को शामिल करना चाहिए. सुबह की शुरुआत पर्याप्त पानी, फल या थोड़े ड्राई फ्रूट्स से की जा सकती है. दोपहर के भोजन में दाल, रोटी, हरी सब्जी और सलाद बेहतर विकल्प है. वहीं रात का खाना हल्का रखने के साथ नियमित व्यायाम और योग को दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए.
गुणवत्ता पर नियंत्रण रखना जरूरीडॉ. रजिता ने कहा कि यदि बच्चे जंक फूड छोड़ने के लिए तैयार नहीं हैं, तो अभिभावक घर पर ही पिज्जा, बर्गर या अन्य पसंदीदा स्नैक्स को अपेक्षाकृत स्वस्थ तरीके से बनाकर दे सकते हैं. इससे इस्तेमाल होने वाले तेल और सामग्री की गुणवत्ता पर नियंत्रण रहेगा. उन्होंने बाजार में बार-बार इस्तेमाल किए जाने वाले तेल से तैयार खाद्य पदार्थों से बचने की सलाह दी. उन्होंने बच्चों को कोल्ड ड्रिंक की जगह पानी, नींबू पानी और नारियल पानी जैसे विकल्प देने की सलाह दी.
इसके साथ ही डॉक्टर ने दूध को भी संतुलित आहार का हिस्सा बताया. लगातार पेट दर्द, गैस, कब्ज या अन्य परेशानी को सामान्य समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. किसी भी तरह की समस्या होने पर अपनी मर्जी से दवा लेने के बजाय नजदीकी चिकित्सक से परामर्श लेकर आवश्यक जांच करवानी चाहिए.
Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



