Agriculture: कम पानी में ज्यादा कमाई का फॉर्मूला, सरकार ने तैयार किए खेती के 5 नए मॉडल, किसानों की बढ़ेगी कमाई

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कम पानी में ज्यादा कमाई, सरकार लाई खेती के 5 नए मॉडल, बदलेगी किसानों की तकदीर
Last Updated:August 17, 2026, 06:57 IST
Panchayati Raj Ministry Agriculture Scheme: खेती में पानी की बढ़ती कमी और मौसम के बदलते मिजाज को देखते हुए सरकार अब किसानों को टिकाऊ कृषि मॉडल अपनाने के लिए प्रोत्साहित कर रही है. पंचायतीराज मंत्रालय ने पांच मॉडल ग्राम पंचायतों की वार्षिक योजनाओं में शामिल करने के निर्देश दिए हैं. रिले क्रॉपिंग से धान के बाद खेत खाली नहीं रहेगा, जबकि ड्रिप और मल्चिंग से कम पानी में ज्यादा सब्जी उत्पादन किया जा सकेगा. बागवानी में खाली जगह पर दलहन, तिलहन और सब्जियां उगाकर अतिरिक्त आय मिलेगी. फार्म पौंड में मछली-बत्तख पालन और कम उपजाऊ जमीन पर कृषि-वानिकी से भी कमाई के नए रास्ते बनेंगे. इन मॉडलों से किसानों की लागत और जोखिम घटाने के साथ आय बढ़ाने पर जोर है.
मौसम के बदलते मिजाज और लगातार गिरते भूजल स्तर ने खेती के सामने नई चुनौती खड़ी कर दी है. ऐसे में अब खेती को सिर्फ ज्यादा उत्पादन तक सीमित रखने के बजाय कम पानी, बेहतर मिट्टी और सालभर आय से जोड़ने की तैयारी है. पंचायतीराज मंत्रालय ने जलवायु अनुकूल खेती और टिकाऊ आजीविका के पांच नए मॉडल ग्राम पंचायतों की वार्षिक योजनाओं में शामिल करने के दिशा-निर्देश जारी किए हैं. इन मॉडलों को अपनाने वाले किसानों को वीबी जी रामजी सहित अन्य सरकारी योजनाओं से अनुदान का लाभ मिल सकेगा.
पहला मॉडल धान के बाद खेत खाली नहीं छोड़ने की सोच पर आधारित है. इसमें रिले क्रॉपिंग के जरिए धान की कटाई से पहले ही खेत में मौजूद नमी का इस्तेमाल करते हुए दलहन या अन्य फसल बोई जाएगी. यानी पहली फसल पूरी तरह खेत से निकलने से पहले ही दूसरी फसल की शुरुआत हो जाएगी. इससे धान कटाई के बाद खेत खाली रहने की अवधि घटेगी और रबी फसल के लिए अलग से सिंचाई की जरूरत कम होगी. दलहनी फसलों से मिट्टी में नाइट्रोजन की उपलब्धता बढ़ाने में भी मदद मिलेगी.
दूसरा मॉडल कम जमीन में ज्यादा और लगातार उत्पादन का रास्ता दिखाएगा. इसके तहत ड्रिप सिंचाई, मल्चिंग और स्थायी उठी हुई क्यारियों पर सघन सब्जी उत्पादन किया जाएगा. किसान एक ही खेत में मौसम के अनुसार अलग-अलग सब्जियों की मल्टी-क्रॉपिंग कर सकेंगे. ड्रिप से पानी सीधे पौधों की जड़ों तक पहुंचेगा, जबकि मल्चिंग मिट्टी की नमी को लंबे समय तक बनाए रखने में मदद करेगी. इससे पानी की बर्बादी घटेगी और सीमित सिंचाई वाले क्षेत्रों में भी किसानों को नियमित आमदनी का अवसर मिलेगा.
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तीसरा मॉडल बागवानी को खाली जमीन की बजाय अतिरिक्त कमाई का माध्यम बनाएगा. आम, अमरूद और नींबू जैसे फलदार पौधों के बीच शुरुआती वर्षों में पर्याप्त जगह खाली रहती है. सामान्य तौर पर इस अवधि में किसान को बाग से पूरी आय शुरू होने का इंतजार करना पड़ता है. नए मॉडल में इन्हीं खाली स्थानों पर कम अवधि वाली दलहन, तिलहन और सब्जियां उगाई जाएंगी. इससे पेड़ों के बड़े होने तक जमीन का उपयोग जारी रहेगा और किसान को अतिरिक्त आय मिलती रहेगी.
चौथा मॉडल एक ही फार्म से खेती के कई स्रोतों से आमदनी जोड़ने पर केंद्रित है. इसमें फार्म पौंड को केवल सिंचाई के पानी के भंडारण तक सीमित न रखकर मछली और बत्तख पालन से जोड़ा जाएगा. एक ही स्थान पर फसल उत्पादन, मछली पालन और बत्तख पालन को एक साथ करने से किसान की आय के कई माध्यम तैयार होंगे. तालाब आधारित गतिविधियों से मिलने वाले संसाधनों का दोबारा उपयोग भी संभव होगा, जिससे छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह मॉडल टिकाऊ आजीविका का विकल्प बन सकता है.
पांचवां मॉडल कृषि-वानिकी के जरिए कम उपजाऊ जमीन को भविष्य की संपत्ति में बदलने पर जोर देगा. बंजर या कम उत्पादक जमीन पर फसलों के साथ इमारती लकड़ी देने वाले पेड़, चारा और औषधीय पौधे लगाए जाएंगे. पेड़ खेत में कार्बन सोखने के साथ तेज हवा के प्रभाव को कम करने और फसलों की सुरक्षा में मदद करेंगे. वहीं चारा उपलब्ध होने से पशुपालन को सहारा मिलेगा और इमारती लकड़ी के पेड़ किसानों के लिए लंबी अवधि में अतिरिक्त आर्थिक मूल्य तैयार करेंगे.
इन पांचों मॉडलों की खासियत यह है कि इनका लक्ष्य केवल उत्पादन बढ़ाना नहीं, बल्कि पानी बचाना, मिट्टी की सेहत सुधारना और किसान की आय को कई स्रोतों से जोड़ना है. बदलते मौसम में कभी कम बारिश तो कभी अनियमित बारिश की स्थिति किसानों की लागत और जोखिम बढ़ा रही है. ऐसे में रिले क्रॉपिंग, ड्रिप-मल्चिंग, अंतरफसल, एकीकृत मत्स्य-बत्तख पालन और कृषि-वानिकी जैसे मॉडल खेती को अधिक फायदेमंद बनाया जा सकता है.
First Published :
August 17, 2026, 06:57 IST



