Rajasthan

न सरकारी मदद, न इंतजार, 17 साल की काव्या ने लगा दिए 35 हजार पेड़, ऐसे बचा रहीं हरियाली

Last Updated:August 17, 2026, 07:41 IST

Kavya Bhardwaj Inspiring Story: जयपुर की 17 वर्षीय काव्या भारद्वाज ने महज कक्षा 8 में पर्यावरण संरक्षण की मुहिम शुरू की और अब तक करीब 35 हजार पेड़ लगाने का दावा है. निजी स्कूल में कक्षा 12वीं की छात्रा काव्या ने बिना किसी सरकारी मदद के निंबार्क पथ फाउंडेशन के तहत ‘चैलेंज फॉर ग्रीन’ अभियान शुरू किया था. शुरुआत अकेले हुई, लेकिन अब करीब 15 बच्चों की टीम उनके साथ पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है. अभियान की खास बात सिर्फ पौधे लगाना नहीं, बल्कि उन्हें बचाने पर भी जोर देना है. टीम पौधों की लोकेशन और स्थिति पर नजर रखने के लिए जियो-ट्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल करती है. इस सीजन में लालसोट क्षेत्र में करीब 5 हजार पौधे लगाए गए हैं. काव्या का अगला लक्ष्य ज्यादा लोगों को अभियान से जोड़कर पौधों को एडॉप्ट करवाना है. वह भविष्य में सस्टेनेबल डेवलपमेंट की पढ़ाई कर पर्यावरण संरक्षण को करियर बनाना चाहती हैं.

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जयपुर: अगर एक बच्ची अपने मन में उठे सवाल को संकल्प बना ले, तो बदलाव की शुरुआत कितनी बड़ी हो सकती है. जयपुर की 17 वर्षीय काव्या भारद्वाज इसकी मिसाल हैं. जयपुर की एक प्राइवेट स्कूल में पढ़ने वाली कक्षा 12वीं की स्टूडेंट काव्या ने अब तक बिना किसी सरकारी मदद के हजारों पेड़ लगा दिए हैं. कक्षा 8 में काव्य में पर्यावरण संरक्षण का जिम्मा अपने नन्हे हाथों में उठाया था. न कोई साथ और न कोई मदद उस समय नन्हीं काव्या पौधे लगाने और उनकी देखरेख में जुट गई. आज उनकी इस मुहिम में दर्जनों लोग जुड़ चुके हैं.

काव्या की यह कहानी सिर्फ पौधरोपण की नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ी को पर्यावरण की जिम्मेदारी सौंपने की एक खास मुहिम बन चुकी है. काव्या ने बताया कि दूसरे देशों की हरियाली, साफ-सफाई और पर्यावरण के प्रति लोगों की जागरूकता ने उन्हें काफी प्रभावित किया. इसी दौरान उनके मन में विचार आया कि बदलाव के लिए किसी और का इंतजार क्यों किया जाए.

35 हजार पेड़ अब तक लगा चुके हैं

इसी सोच के साथ उन्होंने निंबार्क पथ फाउंडेशन के तहत चैलेंज फॉर ग्रीन अभियान शुरू किया. शुरुआत छोटी थी, लेकिन धीरे-धीरे इससे बच्चे और पर्यावरण प्रेमी जुड़ते गए और अभियान का दायरा बढ़ता चला गया. काव्या और उनकी टीम अब तक करीब 35 हजार पेड़ लगा चुकी हैं. इस अभियान की खास बात यह है कि इसका उद्देश्य सिर्फ पौधे लगाकर तस्वीर खिंचवाना नहीं है. टीम लगाए गए पौधों को जीवित रखने पर भी उतना ही जोर दे रही है. पौधों की लोकेशन और उनकी स्थिति पर नजर रखने के लिए जियो-ट्रैकिंग तकनीक का इस्तेमाल किया जा रहा है.

15 बच्चों की टीम बनी मुहिम की ताकत

काव्या ने बताया कि इस सीजन में लालसोट क्षेत्र में करीब 5 हजार पौधे लगाए गए हैं. काव्या के साथ करीब 15 बच्चों की टीम भी लगातार पर्यावरण संरक्षण के लिए काम कर रही है. यह टीम लोगों को पौधे लगाने के साथ उनकी देखभाल के लिए लोगों का भी प्रेरित कर रही है. अब अभियान का अगला लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा लोगों को इससे जोड़ना और पेड़ों को एडॉप्ट करवाना है, ताकि पौधों की देखभाल की जिम्मेदारी समाज के अलग-अलग लोगों तक पहुंच सके.

क्या एक दिन ऑक्सीजन भी खरीदनी पड़ेगी?

काव्या के मन में पर्यावरण को लेकर यह चिंता बचपन से रही है. उनका कहना है कि उन्होंने अपने आसपास पेड़ों को कटते और प्रदूषण को लगातार बढ़ते देखा है. इसी ने उन्हें सोचने पर मजबूर किया कि अगर पेड़ों की कटाई इसी रफ्तार से जारी रही तो क्या भविष्य में ऐसा दिन आएगा, जब लोगों को पानी की बोतल की तरह ऑक्सीजन भी खरीदनी पड़ेगी? यही सवाल उनके लिए चैलेंज फॉर ग्रीन की शुरुआत की वजह बना.

पर्यावरण पढ़ने के साथ जिम्मेदारी भी समझाना चाहती हैं

काव्या का मानना है कि अगली पीढ़ी को केवल किताबों में पर्यावरण संरक्षण पढ़ाना काफी नहीं है. बच्चों को प्रकृति की जिम्मेदारी भी समझानी होगी और उन्हें जमीन पर काम करने का अवसर देना होगा. इसी सोच के साथ वह अपनी मुहिम को लगातार विस्तार दे रही हैं. भविष्य में काव्या सस्टेनेबल डेवलपमेंट की पढ़ाई करना चाहती हैं और पर्यावरण संरक्षण को अपने करियर से जोड़ना चाहती हैं. आज 17 साल की उम्र में 35 हजार पेड़ों की जिम्मेदारी संभाल रही है.

About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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Jaipur,Rajasthan

First Published :

August 17, 2026, 07:41 IST

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