सीकर की RPF बेटी ने रचा इतिहास, 11 दिन के अभियान में फतह किया माउंट एल्ब्रुस, अब सातों चोटियों का लक्ष्य

Last Updated:August 22, 2026, 15:56 IST
Mount Elbrus Expedition 2026: सीकर की RPF कर्मी पूनम ने साहस और दृढ़ संकल्प की मिसाल पेश करते हुए 11 दिन के अभियान में माउंट एल्ब्रुस की चोटी फतह की. उनकी उपलब्धि से राजस्थान और सीकर का नाम गौरवान्वित हुआ है. पूनम का लक्ष्य अब दुनिया के सातों महाद्वीपों की प्रमुख चोटियों को फतह करना है. उनकी यह पर्वतारोहण यात्रा महिलाओं और युवाओं के लिए प्रेरणादायक उदाहरण बनकर सामने आई है.
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Sikar News: सीकर जिले के झाड़ली गांव की बेटी पूनम कंवर ने यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को फतेह किया है. 10 अगस्त वह RPF मुख्यालय से इसे फतह करने के लिए रवाना हुई थीं. 21 अगस्त को भारतीय समयानुसार 11:45 बजे पूनम कंवर ने 18,510 फीट ऊंची माउंट एल्ब्रुस की सफल चढ़ाई पूरी की. उन्होंने माउंट एल्ब्रुस की चोटी पर भारतीय तिरंगा और RPF का विभागीय ध्वज फहराया है. इससे पहले पूनम ने विश्व 2 सबसे ऊंची चोटियों पर तिरंगा फहरा चुकी है. यानी कुल मिलकर अब तक वह विश्व के ईसात महाद्वीपों में से तीन महाद्वीपों की तीन सबसे ऊंची चोटियों को फतेह कर चुकी है.
पूनम कंवर ने 2024 में अफ्रीका की सबसे ऊंची चोटी माउंट किलीमंजारो (19,341 फीट) फतह कर तिरंगा फहराया था. इसके बाद 2025 में ऑस्ट्रेलिया की सर्वोच्च चोटी माउंट कोजियोस्को (7,310 फीट) पर सफलता हासिल की. अब 2026 में यूरोप की सबसे ऊंची चोटी माउंट एल्ब्रुस को फतह कर उन्होंने अपनी उपलब्धियों की सूची में एक और बड़ी कामयाबी जोड़ दी है. पूनम कंवर का लक्ष्य सिर्फ तीन पर्वत चोटियों तक सीमित नहीं है. वह दुनिया के सातों महाद्वीपों की सर्वोच्च चोटियों को फतह करना चाहती हैं. हालांकि उनका सबसे बड़ा सपना दुनिया की सबसे ऊंची चोटी माउंट एवरेस्ट पर तिरंगा फहराना है.
जिस लक्ष्य के लिए निकली थीं, उसे हासिल कर लौटीं10 अगस्त को नई दिल्ली के RPF मुख्यालय के उच्च अधिकारियों ने पूनम कंवर को भारतीय तिरंगे और RPF ध्वज के साथ अभियान के लिए रवाना किया था. करीब 11 दिन बाद उन्होंने इस लक्ष्य को पूरा कर दिखाया. रूस की काकेशस पर्वत श्रृंखला में जॉर्जिया सीमा के निकट स्थित माउंट एल्ब्रुस दुनिया के सेवन समिट्स में शामिल है. ऐसे में इस चोटी को फतह करना पर्वतारोहण के क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि माना जाता है.
बचपन का खेल और NCC से पर्वतारोहण तक का सफरपूनम कंवर के पिता रतन सिंह शेखावत रिटायर्ड फौजी है. खतरों का सामना करने की हिम्मत उन्हें परिवार से बचपन से ही मिली है. पिता रतन सिंह शेखावत ने बताया कि पूनम को बचपन से ही खेलकूद और NCC एक्टिविटीज में विशेष रुचि थी. वह 2014 में रेलवे सुरक्षा विशेष बल में भर्ती हुई थी. नौकरी के बाद भी उन्होंने खेल और ट्रेनिंग करना नहीं छोड़ा. पूनम ने कमांडो ट्रेनिंग के साथ तीरंदाजी और घुड़सवारी का प्रशिक्षण भी लिया है. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की कई चोटियों पर चढ़ाई कर उन्होंने पर्वतारोहण जुड़े प्रमाण-पत्र भी हासिल किए है.
महिलाएं पुरुषों से किसी भी क्षेत्र में कम नहींपूनम कंवर वर्तमान में 16वीं वाहिनी RPSF, जयपुर में तैनात हैं और वही अभी झोटवाड़ा क्षेत्र में रहती है. पूनम का कहना है कि उनका उद्देश्य सिर्फ चोटियों को फतह करना नहीं है, बल्कि देश की महिलाओं को यह संदेश देना भी है कि वे किसी भी क्षेत्र में पुरुषों से पीछे नहीं हैं. वह चाहती हैं कि महिलाएं अपने अंदर के आत्मविश्वास पैदा करें और मुश्किल से मुश्किल लक्ष्य को हासिल करने का साहस दिखाएं. पूनम कंवर ओलंपिक खिलाड़ी और राजस्थान सरकार में उद्योग एवं वाणिज्य, युवा मामले एवं खेल विभाग में कैबिनेट मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को अपना आइडल मानती हैं. वे राठौड़ के ओलंपिक पदक जीतने और सेना से जुड़े अनुभवों ने उन्हें काफी प्रभावित है. पूनम कंवर ने बताया कि राज्यवर्धन सिंह राठौड़ पर्वतारोहण अभियान में हमेशा उनका साथ देते हैं.
About the AuthorJagriti Dubey
मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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Sikar,Rajasthan
First Published :
August 22, 2026, 15:56 IST



