पिछले साल छलका था बीसलपुर बांध, इस बार 74% पर अटका, राजस्थान में कम बारिश ने बिगाड़ा पानी का गणित

जयपुर. राजस्थान में मानसून की कमजोर होती रफ्तार अब सिर्फ बारिश के आंकड़ों में ही नहीं, बल्कि प्रदेश के सबसे अहम जलस्रोतों में से एक बीसलपुर बांध की स्थिति में भी नजर आने लगी है. राज्य में पिछले एक सप्ताह से बारिश की गतिविधियां कमजोर बनी हुई हैं और अब तक सामान्य से 21 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. 23 अगस्त तक राजस्थान में 336.5 एमएम बारिश होनी थी, लेकिन वास्तविक बारिश 265.8 एमएम ही दर्ज हुई है. हालात यह हैं कि पूरा प्रदेश कम बारिश वाले क्षेत्र की श्रेणी में आ गया है. वहीं जयपुर, अजमेर और टोंक की बड़ी पेयजल जरूरतें पूरी करने वाले बीसलपुर बांध में भी पानी की आवक धीमी पड़ गई है.
22 अगस्त तक बांध में जलस्तर करीब 314.6 मीटर और पानी करीब 28.5 टीएमसी बताया जा रहा है. बांध की कुल भराव क्षमता 315.50 आरएल मीटर है, यानी अभी करीब 10 टीएमसी पानी की जरूरत है. पिछले साल अगस्त में बीसलपुर पूरी तरह भर गया था, लेकिन इस बार अगस्त का आखिरी सप्ताह शुरू होने के बावजूद बांध पूर्ण भराव से दूर है. ऐसे में अब बीसलपुर के कैचमेंट में होने वाली बारिश पर प्रदेश की पेयजल व्यवस्था की उम्मीदें टिकी हैं.
राजस्थान में सामान्य से 21 फीसदी कम हुई है बारिश
राजस्थान में मानसून की मौजूदा स्थिति चिंताजनक बनी हुई है. प्रदेश में अब तक सामान्य बारिश 336.5 एमएम होनी थी, जबकि 265.8 एमएम बारिश ही दर्ज हुई है. इस तरह राज्य में सामान्य से 21 फीसदी कम बारिश हुई है. बारिश की कमी का असर प्रदेश के 17 जिलों में सबसे ज्यादा दिखाई दे रहा है. जालौर में सामान्य से 54 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है. पाली में 43 फीसदी, बांसवाड़ा में 40 फीसदी, जैसलमेर में 38 फीसदी और डूंगरपुर में सामान्य से 31 फीसदी कम बारिश हुई है. राजधानी जयपुर में भी सामान्य से 23 फीसदी कम बारिश दर्ज की गई है.
बीसलपुर में मात्र 74.16 फीसदी पानी
प्रदेश के ज्यादातर जिलों में बारिश सामान्य से कम रही है. अब तक सिर्फ दो जिले ऐसे हैं जहां सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गई है. झुंझुनूं में सामान्य से 29 फीसदी ज्यादा बारिश हुई है, जबकि भरतपुर में सामान्य से 26 फीसदी अधिक बारिश दर्ज की गई है. कम बारिश का असर बीसलपुर बांध पर भी नजर आ रहा है. 22 अगस्त तक बांध का जलस्तर करीब 314.6 मीटर दर्ज किया गया है और इसमें करीब 28.5 टीएमसी पानी होने का अनुमान है. बीसलपुर का पूर्ण भराव स्तर 315.50 आरएल मीटर है. इस हिसाब से बांध अभी करीब 25.84 फीसदी खाली है और पूर्ण भराव तक पहुंचने के लिए करीब 10 टीएमसी पानी की और जरूरत है.
पिछले साल अगस्त में खुल चुके थे गेट
पिछले साल अगस्त में बीसलपुर बांध पूरी तरह भर गया था और अतिरिक्त पानी की निकासी के लिए इसके गेट भी खोलने पड़े थे. इस बार स्थिति इसके उलट है. अगस्त का अंतिम सप्ताह शुरू होने के बावजूद बांध पूर्ण भराव से दूर है. बीसलपुर में पानी की आवक की रफ्तार भी धीमी हो गई है. 16 से 19 अगस्त के बीच बांध का जलस्तर महज 3 सेंटीमीटर बढ़ा. कैचमेंट क्षेत्र में बारिश कम होने से पानी की आवक प्रभावित हुई है. त्रिवेणी नदी का गेज भी घटा है. 17 अगस्त को त्रिवेणी का गेज 2.60 मीटर था, जो 18 अगस्त को घटकर 2.50 मीटर रह गया.
जयपुर समेत तीन जिलों की पेयजल व्यवस्था पर पड़ सकता है असर
बीसलपुर बांध जयपुर, अजमेर और टोंक की पेयजल व्यवस्था के लिए बेहद महत्वपूर्ण है. इन तीन जिलों के करीब 2,491 गांव बीसलपुर से जुड़ी पेयजल योजनाओं पर निर्भर हैं. टोंक, देवली और उनियारा शहरों को भी बांध से पानी मिलता है. टोंक परियोजना के जरिए 464 गांवों को पेयजल उपलब्ध कराने की योजना है. राजधानी जयपुर की बड़ी आबादी भी बीसलपुर के पानी पर निर्भर है. ऐसे में बांध में पानी की धीमी आवक ने पेयजल व्यवस्था को लेकर चिंता बढ़ा दी है. अब बीसलपुर के कैचमेंट क्षेत्र में अच्छी बारिश ही बांध को पूर्ण भराव के करीब पहुंचा सकती है. अगर आने वाले दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई तो इस बार बीसलपुर के पूरी तरह भरने की संभावना मुश्किल हो सकती है.



