जयपुर में लोहे के पिंजरे में चल रहा सरकारी स्कूल, कचरे की बदबू और नशेड़ियों के बीच पढ़ने को मजबूर मासूम

Last Updated:August 24, 2026, 14:42 IST
Jaipur Govt School in Cage: जयपुर के शास्त्री नगर की भौमिया बस्ती में सरकारी प्राइमरी स्कूल लोहे के पिंजरेनुमा शेड में चल रहा है. चारों तरफ कचरे का डंपिंग यार्ड है और बाहर खुलेआम नशे के इंजेक्शन लगाए जाते हैं. बिजली कनेक्शन न होने से पंखे बंद पड़े हैं. 86 बच्चे और दो शिक्षक बदबूदार हवा में पढ़ने-पढ़ाने को मजबूर हैं. जयपुर में 38 और पूरे राजस्थान में 611 स्कूल बिना भवन के चल रहे हैं, जबकि 3000 से अधिक इमारतें जर्जर हैं.
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जयपुर में पिंजरे जैसा सरकारी स्कूल, कचराघर और नशेड़ियों के बीच पढ़ाई
Jaipur: राजस्थान की राजधानी जयपुर से शिक्षा व्यवस्था को शर्मसार करने वाली एक डरावनी तस्वीर सामने आई है. शास्त्री नगर स्थित भौमिया बस्ती में एक सरकारी प्राथमिक विद्यालय बिना अपनी इमारत के लोहे के एक पिंजरेनुमा शेड में चलने को मजबूर है. सरकारी कागजों में इस स्कूल का अपना कोई भवन दर्ज ही नहीं है. जनसहयोग से बच्चों को धूप और बारिश से बचाने के लिए केवल लोहे का एक पिंजरा और शेड तैयार किया गया था, लेकिन सुविधाएं शून्य हैं.
यह पिंजरेनुमा स्कूल चारों तरफ से कचरे के बड़े डंपिंग यार्ड से घिरा हुआ है. स्कूल की सीमाओं के ठीक बाहर फैला कचरा और उससे उठती असहनीय बदबू बच्चों के स्वास्थ्य के साथ खिलवाड़ कर रही है. बारिश के दिनों में यह बदबू और भी भयानक रूप ले लेती है. भवन नहीं होने के कारण स्कूल को बिजली का कनेक्शन तक नहीं मिल सका है. हालांकि शेड के अंदर पंखे लटकाए गए हैं, लेकिन बिजली के अभाव में वे केवल शो पीस बनकर रह गए हैं. गर्मी और घुटन से राहत पाने के लिए शेड की जालियों को टीन की चद्दरों से बंद भी नहीं किया जा सकता, ताकि कम से कम हवा अंदर आ सके.
स्कूल के ठीक बाहर खुलेआम नशे का काला कारोबार
स्कूल के आसपास का माहौल शिक्षा के बिल्कुल विपरीत और खौफनाक है. स्कूल के ठीक बाहर खुलेआम स्मैक और नशे के इंजेक्शन लगाने का काम चल रहा है. जमीन पर नशे के इस्तेमाल किए गए खतरनाक इंजेक्शन और सिरिंज बिखरे पड़े रहते हैं. मीडिया टीम के मौके पर पहुंचते ही कई नशेड़ी वहां से भाग खड़े हुए, जहां एक मां अपने बेटे को नशे की लत में डूबा देखकर लाचार नजर आई. ऐसे माहौल में 86 मासूम बच्चों का बचपन और भविष्य दोनों गंभीर खतरे में हैं.
शिक्षक और छात्रों की दोहरी परीक्षा
स्कूल में नामांकित 86 विद्यार्थियों को पढ़ाने की जिम्मेदारी केवल दो शिक्षकों पर है. इन शिक्षकों को एक आंख ब्लैकबोर्ड पर और दूसरी आंख सामने मंडराते नशेड़ियों और कचरे पर रखनी पड़ती है. डंपिंग यार्ड की बदबू, बिजली के बिना गर्मी और बाहर घूमते नशेड़ियों के बीच पढ़ाना किसी नरक से कम नहीं है.
पूरे राजस्थान में स्कूल भवनों का अकाल
यह समस्या केवल शास्त्री नगर के इस एक स्कूल तक सीमित नहीं है. जयपुर जिले में ऐसे 38 सरकारी स्कूल हैं, जिनके पास अपना कोई भवन नहीं है. पूरे राजस्थान राज्य की बात करें तो 611 सरकारी स्कूल बिना इमारत के चल रहे हैं. इसके अलावा 3,000 से अधिक स्कूल भवन जर्जर हालत में हैं और तीन चौथाई से अधिक स्कूलों को तत्काल मरम्मत की दरकार है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
August 24, 2026, 15:02 IST



