Meera Bai Temple Story | Meera Bai Krishna Bhakti | | Meera Bai Rajasthan Temple

Last Updated:August 27, 2026, 09:22 IST
Meera Bai Bhakti Dham 2026: मेड़ता में जन्मी भक्त शिरोमणि मीराबाई की कृष्णभक्ति का प्रभाव राजस्थान से लेकर वृंदावन, द्वारका, नूरपुर और आमेर तक फैला हुआ है. हिमाचल के नूरपुर स्थित बृजराज स्वामी मंदिर में कृष्ण के साथ राधा की जगह मीरा की प्रतिमा स्थापित है, जिसे चित्तौड़गढ़ से लाया गया था. जयपुर के आमेर स्थित जगत शिरोमणि मंदिर और गुजरात के द्वारका व डाकोर में भी मीरा के कृष्ण प्रेम की अनूठी परंपराएं और मंदिर आज भी श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र बने हुए हैं.
मेड़ता की पावन धरती पर जन्मी भक्त शिरोमणि मीराबाई की कृष्णभक्ति राजस्थान तक सीमित नहीं रही. उनके पदों और भजनों ने देशभर में कृष्ण प्रेम और भक्ति की एक अलग पहचान बनाई. मीरा की भक्ति से जुड़ी स्मृतियां आज भी कई मंदिरों और तीर्थस्थलों में देखने को मिलती हैं. मेड़ता से चित्तौड़, वृंदावन और द्वारका तक उनकी भक्ति यात्रा की परंपराएं श्रद्धालुओं को गिरधर गोपाल के प्रति उनके अटूट समर्पण की कहानी सुनाती हैं. यही वजह है कि देश के अलग-अलग हिस्सों में मीराबाई को समर्पित मंदिर और धार्मिक स्थल मौजूद हैं.
उत्तर प्रदेश का वृंदावन मीराबाई की भक्ति यात्रा से जुड़े प्रमुख स्थलों में माना जाता है. कृष्ण की लीलाभूमि के रूप में प्रसिद्ध वृंदावन में मीरा के प्रवास और साधना से जुड़ी कई धार्मिक परंपराएं आज भी सुनने को मिलती हैं. संतों की संगति, कृष्ण नाम का स्मरण और भक्ति में डूबे जीवन ने वृंदावन को मीरा के आध्यात्मिक जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव बनाया. यहां मीरा की स्मृति से जुड़े मंदिर और अन्य धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं. वृंदावन की कृष्णभक्ति परंपरा में मीराबाई का विशेष स्थान माना जाता है और उनकी जयंती भी श्रद्धा के साथ मनाई जाती है.
उत्तर प्रदेश का वृंदावन मीराबाई की भक्ति यात्रा से जुड़े प्रमुख स्थलों में गिना जाता है. कृष्ण की लीलाभूमि के रूप में प्रसिद्ध वृंदावन में मीरा के प्रवास, साधना और कृष्ण भक्ति से जुड़ी कई परंपराएं आज भी सुनने को मिलती हैं. संतों की संगति, कृष्ण नाम का निरंतर स्मरण और भक्ति में लीन जीवन ने वृंदावन को मीरा के आध्यात्मिक जीवन का महत्वपूर्ण पड़ाव बनाया. यहां मीराबाई की स्मृतियों से जुड़े मंदिर और धार्मिक स्थल भी मौजूद हैं. वृंदावन की कृष्णभक्ति परंपरा में मीरा का विशेष स्थान माना जाता है और उनकी जयंती के अवसर पर श्रद्धालु उन्हें श्रद्धापूर्वक याद करते हैं.
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हिमाचल प्रदेश के नूरपुर में स्थित बृजराज स्वामी मंदिर मीराबाई और भगवान कृष्ण की संयुक्त पूजा की परंपरा के लिए विशेष पहचान रखता है. मंदिर में भगवान कृष्ण के साथ राधा की जगह मीरा की अष्टधातु प्रतिमा स्थापित है. मान्यता के अनुसार, भगवान कृष्ण की काले संगमरमर की प्रतिमा और मीरा की प्रतिमा को चित्तौड़ से नूरपुर लाया गया था. कहा जाता है कि यह वही कृष्ण प्रतिमा है जिसकी मीराबाई आराधना किया करती थीं. इसी मान्यता के चलते मंदिर में आज भी भगवान कृष्ण के साथ मीराबाई की पूजा की अनूठी परंपरा निभाई जाती है.
जयपुर के आमेर में स्थित जगत शिरोमणि मंदिर मीरा और कृष्ण की भक्ति से जुड़ा एक प्रमुख धार्मिक स्थल माना जाता है. करीब चार सौ वर्ष पुराने इस मंदिर की धार्मिक और ऐतिहासिक पहचान बेहद खास है. मंदिर में भगवान कृष्ण के साथ मीराबाई की प्रतिमा भी स्थापित है. यहां की धार्मिक परंपरा में कृष्ण की प्रतिमा को मीरा द्वारा पूजित प्रतिमा से जोड़ा जाता है. मंदिर की भव्य स्थापत्य कला और मीराबाई की कृष्ण भक्ति से जुड़ी मान्यताएं इसे श्रद्धालुओं के लिए विशेष आस्था का केंद्र बनाती हैं.
गुजरात के डाकोर में स्थित रणछोड़राय मंदिर भी मीराबाई की कृष्ण भक्ति परंपरा से जुड़ा हुआ माना जाता है. डाकोर में भगवान कृष्ण के रणछोड़राय स्वरूप की पूजा की जाती है और यह देशभर के कृष्ण भक्तों के प्रमुख तीर्थस्थलों में शामिल है. मीरा और भगवान कृष्ण के संबंध से जुड़ी विभिन्न भक्ति परंपराओं में डाकोर का भी उल्लेख मिलता है. इस तरह राजस्थान से बाहर गुजरात और हिमाचल प्रदेश जैसे राज्यों में भी मीराबाई की कृष्ण भक्ति से जुड़ी स्मृतियां अलग-अलग धार्मिक परंपराओं के माध्यम से आज तक जीवित हैं.
मीराबाई की सबसे बड़ी पहचान उनके गिरधर गोपाल के प्रति अटूट भक्ति और समर्पण से जुड़ी है. मेड़ता से शुरू हुई उनकी भक्ति की स्मृतियां चित्तौड़, वृंदावन, द्वारका, नूरपुर, आमेर और डाकोर जैसे कई स्थानों तक पहुंचती हैं. कहीं उनकी प्रतिमा भगवान कृष्ण के साथ स्थापित है तो कहीं उनके प्रवास और साधना से जुड़ी धार्मिक परंपराएं आज भी जीवित हैं. यही वजह है कि सदियों बाद भी मीरा केवल भजनों और पदों की कवयित्री के रूप में ही नहीं, बल्कि कृष्णभक्ति और पूजा की जीवंत परंपरा के रूप में भी श्रद्धालुओं के बीच मौजूद हैं.
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August 27, 2026, 09:22 IST



