White vs Blue Aparajita: सफेद या नीली अपराजिता, कौन-सा फूल सेवन के लिए बेस्ट? जानें आयुर्वेदिक फायदे

Last Updated:August 27, 2026, 11:12 IST
White vs Blue Aparajita: सफेद और नीली अपराजिता के दोनों फूल अपने-अपने गुणों के कारण जानें जाते हैं. लेकिन जब सेवन की हो तो इस बात का ध्यान रखना बहुत जरूरी है कि आप किन परेशानियों को दूर करना चाहते है. वैसे तो नीली अपराजिता के फूल की चाय ज्यादा फेमस है, लेकिन कुछ मामलों में अपराजिता का सफेद ज्यादा कागरगर साबित होता है. यहां जानिए दोनो के फायदे-
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अपराजिता का पौधा भारतीय घरों और बगीचों में आसानी से देखने को मिल जाता है. इसके नीले और सफेद रंग के फूल बहुत ही कॉमन है. ये सिर्फ अपनी खूबसूरती के लिए ही नहीं जाने जाते हैं, बल्कि आयुर्वेद में भी इनका विशेष महत्व है. अपराजिता को कई जगहों पर शंखपुष्पी के नाम से भी जाना जाता है और इसे याददाश्त बढ़ाने, मानसिक शांति देने वाला माना जाता है. आजकल अपराजिता की चाय भी काफी पॉप्युलर है. हालांकि अक्सर लोगों के मन में सवाल रहता है कि सफेद अपराजिता और नीली अपराजिता में से सेवन के लिए कौन-सी बेहतर है.
आयुर्वेदिक ग्रंथों में दोनों किस्मों का उल्लेख मिलता है, लेकिन मॉर्डन रिसर्च बताते हैं कि दोनों के गुणों में कुछ अंतर जरूर है. ऐसे में यह समझना जरूरी है कि आपकी जरूरत के अनुसार कौन-सी किस्म अधिक फायदेमंद हो सकती है.
नीली-सफेद अपराजिता में अंतर नीली अपराजिता में एंथोसाइनिन नामक शक्तिशाली एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं, जो इसके गहरे नीले रंग के लिए जिम्मेदार होते हैं. ये तत्व शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करने और कोशिकाओं को नुकसान से बचाने में मदद कर सकते हैं. वहीं सफेद अपराजिता में एंथोसाइनिन नहीं होते, लेकिन इसमें कैल्शियम, पोटैशियम और अन्य खनिज अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में पाए गए हैं.
अपराजिता के फायदे आयुर्वेद में अपराजिता को “मेध्य” यानी मस्तिष्क के लिए लाभकारी औषधि माना गया है. इसे याददाश्त, एकाग्रता और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने के लिए उपयोग किया जाता रहा है. दोनों प्रकार की अपराजिता में ये गुण मौजूद हैं.
सेवन के लिए कौन-सी बेहतर है?
ये आपकी जरूरत पर निर्भर करता है. 2024 में प्रकाशित एक तुलनात्मक अध्ययन में पाया गया कि सफेद अपराजिता खनिजों से भरपूर होने के कारण हड्डियों के स्वास्थ्य के लिए अधिक लाभकारी हो सकती है. दूसरी ओर नीली अपराजिता में एंटीऑक्सीडेंट गतिविधि अधिक देखी गई, साथ ही इसमें संभावित एंटी-डायबिटिक और एंटीफंगल गुण भी पाए गए.
विशेषज्ञों के अनुसार, यदि आपका लक्ष्य एंटीऑक्सीडेंट्स प्राप्त करना और हर्बल टी के रूप में स्वास्थ्य लाभ लेना है, तो नीली अपराजिता बेहतर विकल्प मानी जा सकती है. वहीं यदि आप खनिजों से भरपूर विकल्प चाहते हैं, तो सफेद अपराजिता फायदेमंद हो सकती है. हालांकि किसी भी फूल को औषधि की तरह नियमित मात्रा में लेने से पहले आयुर्वेद विशेषज्ञ या डॉक्टर की सलाह लेना जरूरी है.
About the Authorशारदा सिंहSenior Sub Editor
शारदा सिंह एक अनुभवी लाइफस्टाइल पत्रकार हैं, जिनके पास डिजिटल मीडिया और कंटेंट लेखन के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से…
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New Delhi,Delhi
First Published :
August 27, 2026, 11:12 IST
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