Jaipur News: Eco-Friendly Seeded Rakhi

Last Updated:August 28, 2026, 06:26 IST
Jaipur Eco-Friendly Seeded Rakhi: जयपुर ग्रामीण के आसलपुर गांव स्थित धेनूकृपा गौशाला गोमय केन्द्र में गाय के गोबर से खास ईको-फ्रेंडली राखियां तैयार की जा रही हैं. इन राखियों में कालमेघ, अश्वगंधा और तुलसी के बीज शामिल किए गए हैं ताकि कलाई से उतरने के बाद मिट्टी में डालने पर पौधे उग सकें. राखी के साथ गोबर से बने सुंदर नेकलेस और ईयररिंग्स भी बनाए जा रहे हैं जिनकी मांग विदेशों तक है. यह पहल पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण महिलाओं को आजीविका और रोजगार देने में बेहद कारगर साबित हो रही है.
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Jaipur News: रक्षाबंधन के त्योहार पर बाजार रंग-बिरंगी आकर्षक और सुंदर राखियों से सजने लगे हैं. बाजार में इस बार कई तरह की डिजाइनर राखियां लोगों को अपनी ओर आकर्षित कर रही हैं, लेकिन जयपुर ग्रामीण के आसलपुर गांव में तैयार हो रही एक खास राखी अपने अनोखे अंदाज के कारण चर्चा में है. यहां धेनूकृपा गौशाला गोमय केन्द्र में गाय के गोबर से राखियां तैयार की जा रही हैं. खास बात यह है कि इन राखियों में बीज भी डाले जा रहे हैं, ताकि भाई की कलाई से उतरने के बाद यह राखी मिट्टी में पहुंचकर पौधे के रूप में फिर से जीवन का संदेश दे सके. गोबर से बनी इन राखियों को पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है. राखी बनाते समय गोबर और विशेष शीट का इस्तेमाल किया जाता है. इसके बाद इसमें अलग-अलग प्रकार के बीज लगाए जाते हैं. इन राखियों में कालमेघ, अश्वगंधा और तुलसी जैसे पौधों के बीज शामिल किए जा रहे हैं. राखी उतारने के बाद इसे मिट्टी में डालने पर अनुकूल परिस्थितियों में इन बीजों से पौधे उग सकते हैं. इस तरह यह राखी कुछ समय तक भाई की कलाई की शोभा बढ़ाने के बाद धरती पर हरियाली बढ़ाने का माध्यम बन सकती है.
धेनूकृपा गोमय केन्द्र के संचालक मनोज कुमावत के अनुसार गोबर से तैयार उत्पादों को सुंदर और ईको-फ्रेंडली रंगों से सजाया जाता है. इसके बाद इसमें धागा पिरोकर राखी का रूप दिया गया है. राखियां अलग-अलग डिजाइन और आकार में तैयार की गई हैं. देखने में ये राखियां हल्की और साधारण होने के साथ सुंदर भी हैं. खास बात यह है कि प्राकृतिक सामग्री से तैयार होने के कारण इन राखियों को पर्यावरण के अनुकूल तैयार किया गया है. इनमें किसी तरह के केमिकल का उपयोग नहीं किया गया है.
राखी के साथ नेकलेस और ईयर रिंग्स भीगोमय केन्द्र में गाय के गोबर से केवल राखियां ही नहीं बनाई जा रही हैं. यहां नेकलेस और ईयर रिंग्स सहित कई तरह के उत्पाद भी तैयार किए जा रहे हैं. इन उत्पादों को आकर्षक डिजाइन देकर ईको-फ्रेंडली रंगों से सजाया जाता है. रक्षाबंधन को देखते हुए राखियों की विशेष तैयारी की गई है. केंद्र से जुड़े लोगों का कहना है कि इन उत्पादों की मांग स्थानीय बाजारों के अलावा दूसरे क्षेत्रों और विदेशों तक भी पहुंच रही है.
ग्रामीण महिलाओं को मिल रहा रोजगारगोबर से राखी बनाने की यह पहल ग्रामीण महिलाओं के लिए भी आजीविका का जरिया बन रही है. स्थानीय स्तर पर महिलाएं इन उत्पादों को तैयार करने के काम से जुड़ रही हैं. इससे उन्हें घर और गांव के आसपास रहकर रोजगार का अवसर मिल रहा है. त्योहारों के समय राखियों की मांग बढ़ने से महिलाओं को अतिरिक्त काम और आमदनी का अवसर भी मिल रहा है. इस तरह गोबर से बनी राखी पर्यावरण संरक्षण के साथ ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने का भी संदेश दे रही है. रक्षाबंधन पर भाई की कलाई पर राखी बांधना भाई-बहन के प्रेम और विश्वास का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में बीज वाली गोबर की राखी इस परंपरा को प्रकृति से जोड़ने का प्रयास है. राखी उतारने के बाद उसे कचरे में फेंकने के बजाय मिट्टी में डालकर पौधा उगाने का विचार इसे दूसरी राखियों से अलग बनाता है.
About the Authorvicky Rathore
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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Jaipur,Jaipur,Rajasthan
First Published :
August 28, 2026, 06:26 IST



