तेंदुए ने काटा या खरोंचा तो भूलकर भी न करें ये गलती, रेबीज का इंजेक्शन लगेगा या नहीं?

Last Updated:September 08, 2026, 16:31 IST
कर्नाटक में तेंदुए के हमले की घटना के बाद यह सवाल उठना लाजिमी है कि तेंदुए के काटने या खरोंचने पर रेबीज का इंजेक्शन जरूरी होता है या नहीं. जानिए ऐसे मामले में तुरंत क्या करना चाहिए.
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कर्नाटक के दावणगेरे में हाईवे पर कार की चपेट में आने के बाद घायल हुआ एक तेंदुआ रेस्क्यू ऑपरेशन के दौरान वन विभाग के एक अधिकारी पर हमला कर बैठा. अधिकारियों ने तेंदुए को ट्रैंक्विलाइज किया था, लेकिन उसके पूरी तरह बेहोश होने से पहले उसने अधिकारी को घायल कर दिया. इस तरह की घटनाओं के बाद एक सवाल अक्सर सामने आता है कि अगर तेंदुआ काट ले या खरोंच मार दे तो क्या रेबीज का इंजेक्शन लगवाना जरूरी होता है?
तेंदुए के काटने पर रेबीज का खतरा हो सकता है
रेबीज सिर्फ कुत्ते के काटने से होने वाली बीमारी नहीं है. यह वायरस संक्रमित स्तनधारी जानवरों की लार के जरिए फैल सकता है. इसलिए किसी जंगली जानवर के काटने या ऐसी खरोंच जिसमें त्वचा टूट गई हो, उसे संभावित रेबीज एक्सपोजर माना जा सकता है. WHO की सलाह के मुताबिक संभावित रूप से रेबीज वाले जानवर के काटने या खरोंचने के बाद तुरंत मेडिकल मदद लेनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर पोस्ट-एक्सपोजर ट्रीटमेंट यानी PEP शुरू किया जाता है.
इसका मतलब यह नहीं है कि तेंदुए के हर काटने पर हर व्यक्ति को एक ही तरह का इलाज मिलेगा. डॉक्टर जानवर के संपर्क का तरीका, घाव की गंभीरता और रेबीज के जोखिम का आकलन करके तय करते हैं कि वैक्सीन और दूसरी दवाओं की जरूरत है या नहीं. त्वचा पर मामूली खरोंच या बिना खून वाली चोट भी नजरअंदाज नहीं करनी चाहिए.
तेंदुआ काट ले तो सबसे पहले क्या करें?
काटने या खरोंच लगने के बाद सबसे जरूरी काम घाव को तुरंत साफ करना है. WHO के अनुसार घाव को साबुन और बहते पानी से कम से कम 15 मिनट तक अच्छी तरह धोना चाहिए. इससे घाव में मौजूद वायरस को हटाने में मदद मिलती है. इसके बाद जितनी जल्दी हो सके अस्पताल या स्वास्थ्य केंद्र पहुंचकर डॉक्टर से जांच करानी चाहिए.
घाव पर मिर्च, तेल, मिट्टी, पौधों का रस या कोई तेज केमिकल लगाने से बचना चाहिए. इस तरह के घरेलू उपाय नुकसान पहुंचा सकते हैं और सही इलाज में देरी भी हो सकती है.
कब लगती है रेबीज की वैक्सीन?
WHO के अनुसार अगर संभावित रेबीज वाले जानवर से ऐसा संपर्क हुआ है जिसमें त्वचा पर मामूली खरोंच या घाव हुआ है, तो रेबीज वैक्सीन की जरूरत पड़ सकती है. वहीं, अगर जानवर ने त्वचा को भेदने वाला काटा या गहरी खरोंच लगाई है, या उसकी लार किसी खुले घाव, आंख या मुंह जैसे हिस्से के संपर्क में आई है, तो यह गंभीर एक्सपोजर माना जाता है. ऐसी स्थिति में वैक्सीन के साथ रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन की भी जरूरत पड़ सकती है.
भारत के National Rabies Control Programme के अनुसार गंभीर यानी Category III बाइट वूंड में रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन देने की सलाह दी जाती है. इसलिए जंगली जानवर के काटने के बाद खुद से यह तय नहीं करना चाहिए कि इंजेक्शन लगेगा या नहीं. डॉक्टर से तुरंत सलाह लेना जरूरी है.
About the AuthorVividha SinghSub Editor
विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…
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September 08, 2026, 16:31 IST



