टिकटों पर भाजपा-कांग्रेस में महाभारत, जयपुर में हंगामा, अजमेर में बगावत

जयपुर. राजस्थान में नगर निकाय चुनाव 2026 के लिए टिकट फाइनल करने का समय जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, भाजपा और कांग्रेस दोनों ही प्रमुख राजनीतिक दलों में अंदरूनी खींचतान खुलकर सामने आने लगी है. जयपुर में टिकटों को लेकर दोनों दलों की बैठकों में जमकर हंगामा हुआ. भाजपा में भरतपुर संभाग के टिकटों पर चल रही बैठक के दौरान पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव और भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह जादौन के बीच विवाद की स्थिति बन गई. मामला इतना बढ़ा कि राजकुमारी जाटव की ओर से चप्पल दिखाने और जिलाध्यक्ष की ओर से दुपट्टे से अपनी गर्दन कसने की बात सामने आई.
वहीं कांग्रेस के वार रूम में अजमेर संभाग के टिकटों पर मंथन के दौरान पूर्व मंत्री रामलाल जाट और धीरज गुर्जर के बीच तीखी बहस हो गई. दोनों नेताओं के समर्थक भी आमने-सामने आ गए और गाली-गलौज तक की नौबत पहुंच गई. दूसरी ओर अजमेर में टिकट वितरण से नाराज कार्यकर्ताओं की ओर से विरोध प्रदर्शन और टायर जलाने की चेतावनी ने पार्टी नेतृत्व की चिंता बढ़ा दी है. ऐसे में टिकटों की घोषणा से पहले ही दोनों दलों के सामने बगावत और असंतोष को संभालने की बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है.
भाजपा की बैठक में टिकटों को लेकर बढ़ा विवाद
भाजपा में भरतपुर संभाग के नगर निकाय चुनाव के लिए प्रत्याशियों के नामों पर चर्चा जयपुर में चुनाव प्रभारी अशोक परनामी के आवास पर हुई. बैठक में भरतपुर संभाग के विभिन्न निकायों के वार्डों से जुड़े संभावित उम्मीदवारों के नामों पर विचार किया जा रहा था. इसी दौरान टिकटों को लेकर नेताओं के बीच मतभेद सामने आए. मामला उस समय गरमा गया, जब पूर्व विधायक राजकुमारी जाटव और भाजपा जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह जादौन के बीच विवाद हो गया. दोनों के बीच कहासुनी बढ़ने पर स्थिति तनावपूर्ण हो गई. राजकुमारी जाटव ने चप्पल दिखाई, जबकि जिलाध्यक्ष गोविंद सिंह जादौन ने दुपट्टे से अपनी गर्दन कसने की कोशिश की.
मौके पर मौजूद लोगों ने हस्तक्षेप कर दोनों को अलग किया और स्थिति को संभाला. बैठक में टिकटों के अलावा संगठन से जुड़े पुराने विवाद भी सामने आने की बात कही गई है. स्थानीय स्तर पर कई वार्डों में एक से अधिक दावेदार होने के कारण पार्टी के लिए नाम तय करना मुश्किल हो रहा है. कुछ नेताओं की ओर से पुराने कार्यकर्ताओं और स्थानीय समीकरणों को प्राथमिकता देने की मांग की जा रही है.
जयपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में नामों को लेकर खींचतान जारी
भाजपा की टिकट प्रक्रिया के दौरान जयपुर के अलग-अलग क्षेत्रों में भी संभावित प्रत्याशियों को लेकर असहमति सामने आई. सिविल लाइंस विधानसभा क्षेत्र में पर्यवेक्षक की ओर से तीन नाम भेजे जाने को लेकर विवाद की स्थिति बनी. वहीं मालवीय नगर में विधायक से जुड़े व्यक्ति का नाम चर्चा में आने पर भी आपत्ति जताई गई. विद्याधर नगर क्षेत्र में एक वार्ड के लिए चार नाम सामने आने से पार्टी के सामने चयन को लेकर पेच फंस गया. टिकट के दावेदार अपने-अपने पक्ष में संगठन के वरिष्ठ नेताओं से पैरवी कर रहे हैं. पार्टी नेतृत्व के लिए चुनौती यह है कि ऐसे नामों का चयन किया जाए, जिनकी स्थानीय स्तर पर मजबूत पकड़ हो और चुनाव के बाद बगावत की स्थिति न बने.
कांग्रेस के वार रूम में भी आमने-सामने आए नेता
भाजपा के बाद कांग्रेस में भी टिकटों को लेकर विवाद सामने आया. जयपुर स्थित कांग्रेस के वार रूम में अजमेर संभाग की सीटों पर संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर चर्चा चल रही थी. इसी दौरान पूर्व मंत्री रामलाल जाट और धीरज गुर्जर के बीच तीखी बहस हो गई. विवाद बढ़ने के बाद दोनों नेताओं के समर्थक भी आमने-सामने आ गए. बैठक के दौरान गाली-गलौज तक की स्थिति बनने की बात सामने आई. पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और मौजूद कार्यकर्ताओं ने बीच-बचाव कर माहौल को शांत कराया. बताया जा रहा है कि विवाद के बाद रामलाल जाट बैठक से बाहर निकल गए. कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की मौजूदगी में टिकटों पर चर्चा चल रही थी. ऐसे में बैठक के भीतर नेताओं के बीच हुआ विवाद पार्टी के लिए असहज स्थिति माना जा रहा है.
अजमेर में भी टिकटों को लेकर विरोध के स्वर तेज
अजमेर में भी टिकट वितरण से पहले कांग्रेस के भीतर असंतोष देखने को मिल रहा है. संभावित उम्मीदवारों के नामों को लेकर कुछ कार्यकर्ताओं और दावेदारों ने विरोध जताया है. टिकट नहीं मिलने की स्थिति में विरोध प्रदर्शन करने और टायर जलाने तक की चेतावनी सामने आई है. पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती विवादित वार्डों पर सहमति बनाने की है. कई वार्डों में एक से ज्यादा मजबूत दावेदार हैं. ऐसे में किसी एक नाम को टिकट दिए जाने पर दूसरे दावेदारों के नाराज होने की आशंका है. निकाय चुनाव में स्थानीय नेताओं और कार्यकर्ताओं की भूमिका अहम रहती है, इसलिए टिकट वितरण के बाद बगावत रोकना दोनों दलों के लिए जरूरी होगा.
अंतिम दौर में टिकटों पर फंसा पेंच
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही पार्टियां अब टिकटों को अंतिम रूप देने के दौर में पहुंच चुकी हैं. संभागवार बैठकों के जरिए संभावित उम्मीदवारों के नामों पर चर्चा की जा रही है. लेकिन अंतिम समय में सामने आ रहे विवादों ने पार्टी नेतृत्व की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. निकाय चुनाव में विधानसभा या लोकसभा चुनाव के मुकाबले स्थानीय समीकरण ज्यादा प्रभावी होते हैं. वार्ड स्तर पर उम्मीदवार की व्यक्तिगत छवि, सामाजिक समीकरण और स्थानीय कार्यकर्ताओं का समर्थन चुनाव परिणाम को प्रभावित करता है. यही वजह है कि टिकट वितरण को लेकर नेताओं के बीच इतनी खींचतान देखने को मिल रही है.
अब नजर इस बात पर है कि दोनों पार्टियां विवादित वार्डों पर किस तरह सहमति बनाती है और किन नेताओं को टिकट देकर मैदान में उतारती है. टिकटों की घोषणा के बाद असंतुष्ट दावेदारों का रुख भी अहम होगा. यदि नाराज नेता निर्दलीय मैदान में उतरते हैं या भीतरघात करते हैं, तो इसका सीधा असर पार्टी के चुनावी प्रदर्शन पर पड़ सकता है. इसलिए टिकट फाइनल करने के साथ भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने अपने-अपने नेताओं और कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की बड़ी चुनौती है.



