चुनाव बहिष्कार पर अड़ा डारडाहिंद गांव, ग्रामीण बोले- पहले टोंक को शहर बनाओ, हमें गांव ही रहने दो

Last Updated:August 31, 2026, 09:00 IST
Tonk Nagar Nikay Chunav 2026: टोंक नगर परिषद के परिसीमन का विरोध कर रहा डारडाहिंद गांव अब निकाय चुनाव के पूर्ण बहिष्कार पर अड़ गया है. करीब 18 महीने से नगर परिषद में शामिल किए जाने का विरोध कर रहे ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत बहाल होने तक मतदान नहीं करने का ऐलान किया है. नामांकन से ठीक पहले एसडीएम सीमा खेतान, तहसीलदार अजित पाल सिंह यादव और पुलिस टीम ने गांव पहुंचकर ग्रामीणों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वार्ता विफल रही. ग्रामीणों ने गांव में ‘मतदान का पूर्ण बहिष्कार’ का पोस्टर भी लगाया है. उनका कहना है कि गांव की अधिकांश आबादी खेती और पशुपालन पर निर्भर है और नगर परिषद में शामिल होने से उन्हें कोई फायदा नहीं हुआ. ग्रामीणों ने वार्ड नंबर 2 से प्रत्याशी नहीं उतारने और मतदान के दिन बाहरी लोगों के प्रवेश का भी विरोध करने की बात कही है.
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टोंक नगर परिषद के परिसीमन का विरोध कर रहा डारडाहिंद गांव अब निकाय चुनाव के पूर्ण बहिष्कार पर अड़ गया है
टोंक. राजस्थान के टोंक नगर परिषद के परिसीमन को लेकर डारडाहिंद गांव में शुरू हुआ विरोध अब निकाय चुनाव के बहिष्कार तक पहुंच गया है. गांव को नगर परिषद में शामिल कर वार्ड नंबर 2 बनाए जाने से नाराज ग्रामीणों ने चुनाव में मतदान नहीं करने का ऐलान किया है. ग्रामीण पिछले करीब 18 महीने से गांव को नगर परिषद में शामिल किए जाने का विरोध कर रहे हैं. नामांकन प्रक्रिया शुरू होने से ठीक पहले प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों से बातचीत करने गांव पहुंचे, लेकिन समझाइश के बावजूद कोई सहमति नहीं बन सकी. ग्रामीणों ने ग्राम पंचायत को बहाल करने की मांग दोहराते हुए निकाय चुनाव ही नहीं, बल्कि आगे होने वाले सभी चुनावों के बहिष्कार की चेतावनी दी है. गांव में मतदान बहिष्कार का बड़ा पोस्टर भी लगाया गया है.
ग्रामीणों को मनाने के लिए टोंक एसडीएम सीमा खेतान, तहसीलदार अजित पाल सिंह यादव और पुलिस टीम डारडाहिंद गांव पहुंची. अधिकारियों ने ग्रामीणों से लोकतंत्र के पर्व में शामिल होकर मतदान करने की अपील की. प्रशासन की ओर से निकाय में शामिल होने के बाद मिलने वाले प्रशासनिक और कानूनी फायदों की जानकारी भी ग्रामीणों को दी गई. इसके बावजूद ग्रामीण अपनी मांग पर अड़े रहे. ग्रामीणों का कहना है कि उनकी मुख्य मांग गांव को दोबारा ग्राम पंचायत का दर्जा देने की है. उनका तर्क है कि डारडाहिंद की आबादी का बड़ा हिस्सा खेती और पशुपालन पर निर्भर है. ऐसे में गांव को नगर परिषद में शामिल करने का कोई औचित्य नहीं है. ग्रामीणों के मुताबिक, उन्हें रोजमर्रा के काम और स्थानीय स्तर की सुविधाएं ग्राम पंचायत के माध्यम से ही आसानी से मिलती थीं.
ग्रामीणों ने कहा- ‘गांव को गांव ही रहने दो’
ग्रामीणों ने गांव में लगाए पोस्टर के जरिए अपना विरोध दर्ज कराया है. पोस्टर पर स्पष्ट रूप से ‘मतदान का पूर्ण बहिष्कार’ लिखा गया है. ग्रामीणों का कहना है कि पहले टोंक को पूरी तरह शहर के रूप में विकसित किया जाए, इसके बाद गांवों को शहर में शामिल करने की बात हो. उनका नारा है- ‘गांव को गांव ही रहने दो’. ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि नगर परिषद में शामिल किए जाने के बाद से उनकी कई ग्रामीण योजनाओं और सुविधाओं पर असर पड़ा है. उन्होंने विशेष रूप से वीबी जी राम जी योजना के बंद होने का दावा किया. ग्रामीणों का कहना है कि जब गांव की अर्थव्यवस्था खेती और पशुपालन पर आधारित है, तो शहरी निकाय का हिस्सा बनने से उन्हें लाभ के बजाय परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
वार्ड 2 से प्रत्याशी नहीं उतारने का दावा
डारडाहिंद के ग्रामीणों ने निकाय चुनाव को लेकर अपना रुख और स्पष्ट कर दिया है. उनका कहना है कि वार्ड नंबर 2 से कोई प्रत्याशी टिकट नहीं लेगा और न ही गांव के लोग मतदान करेंगे. ग्रामीणों ने यह भी कहा है कि मतदान के दिन गांव में किसी बाहरी व्यक्ति या नेता की एंट्री नहीं होने दी जाएगी. हालांकि सरकारी वाहनों को गांव की सीमा में प्रवेश की अनुमति देने की बात कही गई है. गांव में ग्रामीणों की एकजुटता भी नजर आ रही है. बड़ी संख्या में लोग एक साथ प्रशासन के सामने अपनी मांग रख रहे हैं. उनका कहना है कि जब तक ग्राम पंचायत बहाल नहीं की जाती, तब तक वे चुनाव प्रक्रिया में शामिल नहीं होंगे.
प्रशासन के सामने मतदान के लिए मनाना बड़ी चुनौती
डारडाहिंद के ग्रामीणों के चुनाव बहिष्कार के ऐलान ने प्रशासन की चुनौती बढ़ा दी है. प्रशासन की ओर से ग्रामीणों को मतदान के लिए मनाने की कोशिश की जा रही है, लेकिन फिलहाल वार्ता बेनतीजा रही है. अब प्रशासन के सामने मतदान से पहले ग्रामीणों की नाराजगी दूर करने और उन्हें मतदान के लिए तैयार करने की चुनौती है. एसडीएम सीमा खेतान और अन्य अधिकारियों की समझाइश के बाद भी ग्रामीणों ने अपना फैसला नहीं बदला है. ऐसे में अब नजर इस बात पर है कि मतदान से पहले प्रशासन और ग्रामीणों के बीच कोई समाधान निकलता है या नहीं. यदि ग्रामीण अपने फैसले पर कायम रहते हैं, तो मतदान के दिन डारडाहिंद गांव में चुनाव बहिष्कार का असर साफ दिखाई दे सकता है.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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August 31, 2026, 09:00 IST



