बीजेपी कांग्रेस के लिए अब शुरू होगी असली जंग, बगावत ने फुलाई दोनों पार्टियों की सांसें

जयपुर. राजस्थान में निकाय चुनाव को लेकर बीजेपी और कांग्रेस के सामने अब नामांकन से ज्यादा बड़ी चुनौती अपने ही खेमे में उठ रहे विरोध को संभालने की है. निकाय चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने का आज आखिरी दिन है, लेकिन दोनों प्रमुख दलों ने कई निकायों में अब तक प्रत्याशियों की अधिकृत सूची सार्वजनिक नहीं की है. पार्टी स्तर पर आखिरी समय में प्रत्याशियों को टेलीफोन के जरिए सिंबल की सूचना देने की तैयारी चल रही है. ऐसे में आज टिकट वितरण के साथ ही बगावत का खतरा भी बढ़ गया है. पिछले तीन दिनों से बीजेपी और कांग्रेस में लगातार बैठकों का दौर जारी है.
स्थानीय नेताओं, पदाधिकारियों और वरिष्ठ नेताओं से फीडबैक लेकर उम्मीदवारों के नाम तय किए जा रहे हैं. इसके बावजूद कई वार्डों में दावेदारों के बीच सहमति नहीं बन पा रही है. टिकट की दौड़ में शामिल नेताओं को अपना नाम कटने का डर सता रहा है. वहीं जिन दावेदारों को टिकट मिलने की उम्मीद थी, वे अंतिम समय तक पार्टी नेतृत्व पर दबाव बना रहे हैं. कई जगह विरोध के स्वर तेज हैं और कुछ नेता निर्दलीय मैदान में उतरने की चेतावनी भी दे रहे हैं.
टिकट वितरण को लेकर बीजेपी के सामने बगावत का संकट
राजस्थान के निकाय चुनाव में टिकट वितरण से पहले ही बीजेपी के सामने बगावत का संकट खड़ा हो गया है. कई निकायों में स्थानीय कार्यकर्ता और दावेदार टिकट को लेकर नाराज हैं. पाली में बीजेपी के पूर्व जिला नेता और पांच बार पार्षद रहे राकेश भाटी टिकट और राजनीतिक समीकरणों से असंतुष्ट होकर कांग्रेस में शामिल हो चुके हैं. अजमेर में बीजेपी के पूर्व दो बार मेयर रहे धर्मेंद्र गहलोत भी पार्टी से नाराजगी के चलते बगावती तेवर दिखा चुके हैं. भीलवाड़ा में महिला मोर्चा की स्थानीय पदाधिकारियों ने टिकट वितरण में अनदेखी और परिवारवाद का आरोप लगाकर विरोध जताया. वहीं उदयपुर समेत कई निकायों में स्थानीय कार्यकर्ताओं ने पैराशूट उम्मीदवारों के खिलाफ मोर्चा खोल रखा है. टिकट नहीं मिलने पर कई दावेदार निर्दलीय के तौर पर मैदान में उतरने की तैयारी में हैं. ऐसे में बीजेपी के सामने अधिकृत प्रत्याशी तय करने के साथ नाराज नेताओं को साधने की चुनौती है.
कांग्रेस में भी बागियों ने बढ़ाई टेंशन
कांग्रेस भी टिकट वितरण को लेकर अंदरूनी खींचतान से जूझ रही है. झालावाड़ के पूर्व सभापति मनीष शुक्ला ने चुनाव समिति और टिकट वितरण को लेकर सवाल उठाते हुए नाराजगी जाहिर की है. परिसीमन और वार्ड आरक्षण के बाद कई पुराने दावेदारों के समीकरण बिगड़ गए हैं. पैनल में नाम होने के बावजूद टिकट नहीं मिलने वाले स्थानीय नेताओं में भी असंतोष है. कुछ दावेदार पार्टी से अलग होकर निर्दलीय चुनाव लड़ने की तैयारी में हैं. स्थानीय निवासियों को टिकट देने समेत पार्टी के नए नियमों ने भी कई पुराने कार्यकर्ताओं की दावेदारी प्रभावित की है. ऐसे में कांग्रेस के सामने भी बागियों को रोकना बड़ी चुनौती बन गया है. नामांकन के आखिरी दिन दोनों दलों में टिकट के साथ-साथ बगावत का भी असली चेहरा सामने आने की संभावना है.
बीजेपी में टिकट के लिए जोरदार खींचतान
बीजेपी के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन कार्यकर्ताओं और नेताओं को साधने की है, जो लंबे समय से संगठन में सक्रिय रहने के बाद टिकट की उम्मीद लगाए बैठे हैं. कई निकायों में एक-एक वार्ड से कई दावेदार सामने हैं. ऐसे में किसी एक नाम पर मुहर लगते ही दूसरे दावेदारों के बगावत करने का खतरा बना हुआ है. पार्टी संगठन लगातार नाराज नेताओं से संपर्क कर रहा है. स्थानीय समीकरणों के साथ विधायकों और संगठन पदाधिकारियों की पसंद भी टिकट वितरण में अहम मानी जा रही है. बीजेपी में पहले भी स्थानीय चुनावों में टिकट वितरण को लेकर असंतोष सामने आता रहा है. तिजारा विधायक महंत बालक नाथ और अन्य स्थानीय नेताओं की सक्रियता वाले इलाकों में भी पार्टी को स्थानीय समीकरण साधने होंगे. वहीं सरकार के मंत्री जवाहर सिंह बेडम समेत संगठन के वरिष्ठ नेताओं पर भी कार्यकर्ताओं को एकजुट रखने की चुनौती है.
कांग्रेस में भी कम नहीं हो रहा घमासान
दूसरी तरफ कांग्रेस में भी टिकटों को लेकर हालात आसान नहीं हैं. कई निकायों में पुराने कार्यकर्ता और नए दावेदार आमने-सामने हैं. स्थानीय नेताओं की पसंद और कार्यकर्ताओं की मांग के बीच संतुलन बनाना पार्टी के लिए चुनौती बन गया है. टिकट नहीं मिलने पर कई दावेदार निर्दलीय मैदान में उतरने का संकेत दे चुके हैं. यही वजह है कि कांग्रेस भी प्रत्याशियों के नाम सार्वजनिक करने से पहले हर सीट पर संभावित बगावत का आकलन कर रही है. कांग्रेस के सामने सबसे बड़ा सवाल यह है कि टिकट से नाराज नेताओं को किस तरह मनाया जाए. क्योंकि निकाय चुनाव में एक वार्ड का समीकरण भी जीत-हार पर सीधा असर डाल सकता है. ऐसे में बागी प्रत्याशी आधिकारिक उम्मीदवार का खेल बिगाड़ सकते हैं.
आज साफ होगी तस्वीर, कौन रहेगा पार्टी के साथ और कौन बनेगा बागी?
नामांकन का अंतिम दिन दोनों पार्टियों के लिए बेहद अहम है. आज टिकट का सिंबल मिलने के बाद यह तस्वीर साफ होगी कि कौन पार्टी के अधिकृत प्रत्याशी के तौर पर मैदान में है और कौन बगावत का रास्ता चुनता है. फिलहाल दोनों दलों की कोशिश आखिरी समय तक नाराज दावेदारों को मनाने की है. निकाय चुनाव में मुकाबला सिर्फ बीजेपी और कांग्रेस के अधिकृत प्रत्याशियों के बीच नहीं रहने वाला. असली चुनौती उन बागियों से होगी, जो टिकट नहीं मिलने पर अपने ही दल के उम्मीदवार के खिलाफ मैदान में उतर सकते हैं. यही वजह है कि प्रत्याशियों की घोषणा के साथ ही राजस्थान के निकाय चुनाव में बीजेपी बनाम कांग्रेस की लड़ाई के साथ घर के भीतर की जंग भी खुलकर सामने आने की संभावना है.



