Child health : पेट भर रहा, लेकिन घट रही ताकत…बच्चों की ये आदत हो सकती है जानलेवा, जानिए कैसे?

Last Updated:September 07, 2026, 19:58 IST
Child health Tips : पिज्जा, बर्गर, चिप्स, मोमोज और चाउमीन जैसे फास्ट फूड किसे नहीं पसंद. बच्चे इन्हें इन्हें बार-बार खाने की जिद करते हैं. लोकल 18 से गाजियाबाद के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन उपाध्याय बताते हैं कि ऐसे बच्चों के कमजोर होने के साथ उनके शारीरिक विकास और रोगों से लड़ने की क्षमता भी कम हो जाती है. कुपोषण बढ़ने लगता है.
डॉ. विपिन बताते हैं कि कुपोषण को प्रोटीन एनर्जी मालन्यूट्रिशन कहते हैं. इसमें शरीर को प्रोटीन और पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती. बच्चों के लिए प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट संतुलित मात्रा में लेना जरूरी है.
गाजियाबाद. बच्चों को पिज्जा, बर्गर, चिप्स, मोमोज और चाउमीन जैसे फास्ट फूड काफी पसंद आते हैं. स्वाद के चलते बच्चे इन्हें बार-बार खाने की जिद करते हैं, लेकिन यही आदत धीरे-धीरे उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती है. डॉक्टरों का कहना है कि फास्ट फूड से पेट तो भर जाता है लेकिन शरीर को विकास के लिए जरूरी प्रोटीन, विटामिन, मिनरल्स और दूसरे पोषक तत्व पर्याप्त मात्रा में नहीं मिल पाते. ऐसे में बच्चों के कमजोर होने के साथ उनके शारीरिक विकास और रोगों से लड़ने की क्षमता पर भी असर पड़ सकता है. गाजियाबाद एमएमजी अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. विपिन उपाध्याय लोकल 18 से बताते हैं कि कुपोषण को प्रोटीन एनर्जी मालन्यूट्रिशन कहा जाता है. इसमें शरीर को प्रोटीन और पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिल पाती. बच्चों के लिए प्रोटीन, फैट और कार्बोहाइड्रेट संतुलित मात्रा में लेना जरूरी है. इनकी कमी होने पर बच्चों की ग्रोथ प्रभावित हो सकती है. उनकी लंबाई और वजन उम्र के हिसाब से कम रह सकता है और रोगों से लड़ने की क्षमता यानी इम्युनिटी कमजोर हो सकती है. ऐसे बच्चे बार-बार बीमार भी पड़ते हैं.
पेट दर्द, डायरिया
डॉ. विपिन ने बताया कि फास्ट फूड स्वाद में अच्छा जरूर लगता है लेकिन इसमें शरीर के लिए जरूरी पोषण कम होता है. इनमें अधिक मात्रा में वसा, नमक और अन्य हानिकारक तत्व हो सकते हैं. लगातार फास्ट फूड खाने से बच्चों को गैस, पेट दर्द, डायरिया और संक्रमण जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं. सबसे बड़ी समस्या यह है कि फास्ट फूड खाने के बाद बच्चे का पेट भर जाता है और वह घर का पौष्टिक खाना खाने से बचने लगता है. इससे लंबे समय तक जरूरी पोषक तत्वों की कमी हो सकती है.
मौसमी फल रामबाण
डॉ. विपिन के मुताबिक, बच्चों की डाइट में मौसमी फल, हरी सब्जियां, सलाद, दाल, दूध-दही, अंडा और अन्य पौष्टिक खाद्य पदार्थ शामिल करना चाहिए. मौसमी फलों से शरीर को जरूरी विटामिन और मिनरल्स मिलते हैं जबकि हरी सब्जियों और सलाद में फाइबर होता है जो पाचन के लिए फायदेमंद है. गुड़ भी आयरन का अच्छा स्रोत है और संतुलित आहार के साथ इसे डाइट में शामिल किया जा सकता है. छह महीने तक के शिशुओं के लिए मां का दूध सबसे जरूरी है. इस अवधि में बच्चे को केवल मां का दूध देना चाहिए और सामान्य परिस्थितियों में पानी की भी जरूरत नहीं होती. मां के दूध में ऐसे तत्व होते हैं जो बच्चे की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करते हैं इसके बाद उम्र के अनुसार पौष्टिक आहार शुरू किया जाना चाहिए.
खुश करने के लिए करें ये काम
डॉ. विपिन का कहना है कि बच्चों को फास्ट फूड की आदत न लगने दें, बच्चे को खुश करने के लिए हल्का-फुल्का फास्ट फूड दिया जा सकता है लेकिन इसे रोज की डाइट का हिस्सा नहीं बनाना चाहिए. बच्चों को पौष्टिक खाना देने के साथ उन्हें बाहर खेलने और शारीरिक गतिविधियों के लिए भी प्रोत्साहित करना जरूरी है. मोबाइल और टीवी का अधिक इस्तेमाल कम कर बच्चों की दिनचर्या में खेल-कूद को शामिल करें. अगर बच्चे का वजन या लंबाई बढ़ना रुक जाए, वह बार-बार बीमार पड़े, लगातार पेट की समस्या या संक्रमण से परेशान रहे अथवा खाने में परेशानी होने लगे तो अभिभावकों को डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए.
About the AuthorPriyanshu Gupta
प्रियांशु को एक दशक से ज्यादा हो गए पत्रकारिता में. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म की पढ़ाई पूरी कर अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. यहां लंबे समय तक हरिया…
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Ghaziabad,Uttar Pradesh
First Published :
September 07, 2026, 19:58 IST



