बॉलीवुड की सबसे पढ़ी-लिखी अदाकारा, मजबूरी में की एक्टिंग, दिलीप कुमार-राज कपूर संग काम कर बनीं सबसे हिट ‘मां’

Last Updated:September 09, 2026, 04:03 IST
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा में कुछ कलाकार ऐसे रहे हैं, जिनकी कहानी सिर्फ उनकी फिल्मों तक सीमित नहीं रही. उनकी असली जिंदगी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं थी. संघर्ष, जिम्मेदारियां और मुश्किल हालातों में घिरी इस अदाकारा की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. आज भले ही नई पीढ़ी के बहुत से दर्शक उनका नाम न जानते हों, लेकिन एक दौर ऐसा था जब वह हिंदी सिनेमा की लोकप्रिय अदाकाराओं में गिनी जाती थीं. गुजरे जमाने की ये अभिनेत्री लीला चिटनिस हैं.
लीला चिटनिस ने उस समय अभिनय को करियर बनाया, जब महिलाओं के लिए फिल्मों में काम करना आज की तरह आम बात नहीं थी. उन्होंने अपनी जिंदगी से एक मिसाल कायम की.लीला चिटनिस का जन्म 9 सितंबर 1909 को कर्नाटक के धारवाड़ में एक मराठी ब्राह्मण परिवार में हुआ था. उनका शुरुआती नाम लीला नागरकर था.
एक्ट्रेस के पिता अंग्रेजी साहित्य के प्रोफेसर थे और शायद यही वजह रही कि उन्हें बचपन से ही घर में पढ़ाई-लिखाई का माहौल मिला. जिस दौर में लड़कियों को पढ़ाना-लिखाना आम बात नहीं थी. उच्च शिक्षा तो बहुत दूर की बात उन्हें स्कूल तक नहीं भेजा जाता था. उस समय लीला ने आर्ट्स में बीए की पढ़ाई पूरी की. वह अपने समय की सबसे पढ़ी-लिखी महिलाओं में शामिल थीं और उन्हें महाराष्ट्र की पहली ग्रेजुएट महिलाओं में से एक के तौर पर भी याद किया जाता है.
लीला चिटनिस को आज भी बॉलीवुड की सबसे पढ़ी-लिखी अदाकारा के तौर पर याद किया जाता है, लेकिन पढ़ाई के बाद उनकी जिंदगी उस दिशा में नहीं गई, जिसकी शायद उन्होंने कल्पना की होगी. महज 16 साल की उम्र में लीला की शादी डॉ. गजानन यशवंत चिटनिस से हो गई. शादी के बाद वह परिवार और बच्चों की जिम्मेदारियों में व्यस्त हो गईं. वो 4 बच्चों की मां बनीं. एक्ट्रेस ने पति के साथ रहते हुए देश के स्वतंत्रता आंदोलन से भी हिस्सा लिया था.
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जहां एक तरफ सबकुछ ठीक चल रहा था, वहीं दूसरी तरफ उनकी निजी जिंदगी में भूचाल आ गया था. एक्ट्रेस के पति शराब के आदि थे. पति की शराब की लत जैसी समस्याओं ने उनकी शादीशुदा जिंदगी पर असर डाला. आखिरकार दोनों के रिश्ते में दरार इतनी बढ़ गई कि उन्होंने तलाक ले लिया.
लीला के सामने सबसे बड़ी चुनौती थी अपने बच्चों का पालन-पोषण करना. तलाक के बाद लीला चिटनिस ने कुछ समय तक टीचर के रूप में काम किया. इसके बाद उनका जुड़ाव थिएटर से हुआ. वह ‘नाट्य मनवंतर’ जैसे थिएटर ग्रुप का हिस्सा बनीं. मंच ने उन्हें अभिनय की दुनिया को करीब से समझने का मौका दिया और यहीं से धीरे-धीरे फिल्मों की राह खुली.
साल 1935 में उन्होंने फिल्म ‘श्री सत्यनारायण’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा. शुरुआत भले ही साधारण रही, लेकिन जल्द ही उनकी प्रतिभा पर लोगों की नजर पड़ने लगी.1937 की ‘जेंटलमैन डाकू’ से उन्हें पहचान मिली और फिर 1939 में आई ‘कंगन’ उनके करियर के लिए बड़ा मोड़ साबित हुई. फिल्म सिल्वर जुबली हिट रही और लीला चिटनिस का नाम हिंदी सिनेमा की प्रमुख अभिनेत्रियों में शामिल हो गया.
समय के साथ फिल्म इंडस्ट्री में लीला की छवि बदली. 1940 के दशक के आखिर तक इंडस्ट्री ने उन्हें साइड रोल तक सीमित कर दिया. लीड रोल से हटकर अब लीला चिटनिस मां के किरदार में नजर आने लगी थीं. ‘शहीद’ में उन्होंने पहली बार मां का किरदार निभाया. इसके बाद ‘आवारा’, ‘नया दौर’, ‘साधना’, ‘हम दोनों’, ‘गंगा जमुना’ और ‘गाइड’ जैसी फिल्मों में उन्होंने मां के किरदार को अलग-अलग रंग दिए.
लीला चिटनिस ने पर्दे पर दिलीप कुमार, राज कपूर, भारत भूषण, देव आनंद जैसे एक्टर्स की मां का रोल अदा किया था. उनके नाम एक और बेहद खास रिकॉर्ड है. वो लक्स का ऐड करने वाली पहली भारतीय एक्ट्रेस हैं.
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September 09, 2026, 04:03 IST



