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Agriculture News I खेत-खलिहान से सड़क किनारे तक ‘गाजर घास’ का कब्जा, सेहत और फसलों पर मंडरा रहा खतरा

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भीलवाड़ा में गाजर घास का आतंक, खेतों से खाली भूखंडों तक तेजी से पसार रही पैर

Last Updated:September 09, 2026, 13:31 IST

Agriculture News: भीलवाड़ा में विदेशी खरपतवार ‘गाजर घास’ तेजी से फैल रही है। खेतों, खाली भूखंडों और सड़क किनारे उगने वाली यह घास फसलों के उत्पादन को प्रभावित करने के साथ इंसानों और पशुओं की सेहत के लिए भी खतरा बन सकती है. कृषि विभाग ने लोगों से फूल आने से पहले इसे जड़ सहित हटाने और सावधानी बरतने की अपील की है.

गाजर घास,चटक चांदनी और सफेद टोपी जैसे नाम से पहचानी जाने वाली विदेशी खरपतवार अब भीलवाड़ा में तेजी से फैल रही है. खेतों, खाली भूखंडों और सड़क किनारे उगने वाली यह घास फसलों के साथ पशुधन और इंसानों की सेहत के लिए भी नुकसानदायक है. वर्ष 1955 में अमेरिका से आयातित गेहूं के साथ भारत पहुंची यह खरपतवार अब देशभर में फैल चुकी है. बताया जाता है कि यह करीब 3.5 करोड़ हेक्टेयर क्षेत्र को प्रभावित कर रही है.

गाजर घास का जीवन चक्र महज तीन से चार माह का होता है, लेकिन यह पूरे साल उगती रहती है. इसका एक पौधा करीब 5 हजार से 25 हजार तक छोटे बीज पैदा कर सकता है. हवा और पानी के साथ ये बीज तेजी से एक जगह से दूसरी जगह पहुंच जाते हैं. यही वजह है कि जहां यह घास एक बार उग जाती है, वहां से आसपास के क्षेत्रों में भी इसका फैलाव तेजी से होने लगता है.

गाजर घास का असर फसलों के उत्पादन पर भी पड़ता है, इस पौधे में सेस्क्युटरपिन लैक्टोन नामक विषैला रसायन पाया जाता है, जो आसपास उगने वाले पौधों की बढ़वार को प्रभावित करता है. खेत में इसका प्रकोप ज्यादा होने पर फसल उत्पादन में 40 प्रतिशत तक की कमी आने की बात सामने आई है. इससे किसानों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है.

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इस खरपतवार से इंसानों और पशुओं को भी नुकसान हो सकता है, लगातार इसके संपर्क में रहने से त्वचा में एलर्जी, बुखार और सांस से जुड़ी परेशानी जैसे अस्थमा की समस्या हो सकती है. वहीं, अगर पशु इसे खा लेते हैं तो उनके स्वास्थ्य पर बुरा असर पड़ सकता है और दूध के स्वाद में कड़वाहट आने की शिकायत भी होती है.

गाजर घास को फैलने से रोकने के लिए इसे फूल आने से पहले ही जड़ सहित उखाड़ देना चाहिए. पौधे को हटाते समय हाथों में दस्ताने और चेहरे पर मास्क पहनना जरूरी है ताकि त्वचा और सांस के जरिए इसके संपर्क से बचा जा सके. उखाड़े गए पौधों का सुरक्षित तरीके से निस्तारण करना भी जरूरी है, ताकि इनके बीज दोबारा न फैलें.

कृषि विभाग के अनुसार गाजर घास के नियंत्रण के लिए जैविक उपाय भी अपनाया जा सकता है. प्रभावित क्षेत्रों में मैक्सिकन बीटल नामक मित्र कीट छोड़ा जाता है जो गाजर घास की पत्तियां खाकर उसके फैलाव को कम करने में मदद करता है. जिले में इसके बढ़ते प्रकोप को देखते हुए किसानों और आमजन को समय रहते सावधानी बरतने और गाजर घास को फूल आने से पहले हटाने की जरूरत है.

First Published :

September 09, 2026, 13:31 IST

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