Jodhpur News I नमक से बिगड़ रही जमीन, अब वैज्ञानिक खोजेंगे समाधान; कृषि विश्वविद्यालय ने बढ़ाया कदम

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खारे पानी को बनाएंगे खेती के काम का, जोधपुर कृषि विश्वविद्यालय और CSIR साथ-साथ
Last Updated:September 09, 2026, 15:18 IST
Jodhpur News: पश्चिमी राजस्थान में खारे पानी और बढ़ती लवणता से प्रभावित किसानों के लिए राहत की उम्मीद जगी है. कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने CSIR की केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान, भावनगर के साथ MoU किया है. दोनों संस्थान खारे पानी, लवणता प्रभावित जमीन, फसल उत्पादन और जैव उत्पादों से जुड़े नए तकनीकी समाधान विकसित करने पर काम करेंगे.
जोधपुर. पश्चिमी राजस्थान में खारे पानी और बढ़ती लवणता किसानों के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है. खेतों में बढ़ते नमक की वजह से जहां जमीन की उर्वरता प्रभावित हो रही है, वहीं कई जगह फसलों की पैदावार भी लगातार प्रभावित हो रही है. अब इस गंभीर समस्या के समाधान की दिशा में कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर ने महत्वपूर्ण पहल की है. विश्वविद्यालय ने वैज्ञानिक तथा औद्योगिक अनुसंधान परिषद की प्रमुख प्रयोगशाला केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान, भावनगर गुजरात के साथ समझौता ज्ञापन किया है. इस एमओयू के बाद पश्चिमी राजस्थान के खारे पानी और लवणता प्रभावित क्षेत्रों में फसलों को लेकर नए शोध और तकनीकी समाधान विकसित किए जा सकेंगे.
शनिवार को हुए समझौता ज्ञापन पर कृषि विश्वविद्यालय जोधपुर के कुलगुरु प्रोफेसर वीरेंद्र सिंह जैतावत और केंद्रीय नमक एवं समुद्री रसायन अनुसंधान संस्थान की ओर से प्रधान वैज्ञानिक डॉ. डूंगरराम चौधरी ने हस्ताक्षर किए. कुलगुरु प्रोफेसर जैतावत ने कहा कि पश्चिमी राजस्थान के कई हिस्सों में लवणता की गंभीर समस्या है, जिसका सबसे अधिक असर कृषि और दलहनी फसलों पर पड़ रहा है. ऐसे में दोनों संस्थानों का सहयोग किसानों के लिए उपयोगी साबित हो सकता है. उन्होंने कहा कि संस्थान के साथ जुड़ाव से विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों को अनुसंधान और प्रसार कार्यों में तकनीकी विशेषज्ञता के साथ आवश्यक संसाधनों का भी सहयोग मिलेगा.
खारे पानी को उपयोगी बनाने से लेकर जैव उत्पादों तक कामप्रधान वैज्ञानिक डॉ. डूंगरराम चौधरी ने संस्थान की गतिविधियों की जानकारी देते हुए बताया कि यहां नमक एवं समुद्री रसायनों के विकास, खारे पानी को मीठा बनाने, बायोडीजल, अपशिष्ट जल प्रबंधन और समुद्री संसाधनों से प्राकृतिक खाद तैयार करने जैसे क्षेत्रों में अनुसंधान किया जाता है. इसके साथ ही पर्यावरण अनुकूल जैव उत्पाद और पर्यावरण प्रबंधन से जुड़े कार्य भी किए जा रहे हैं. कृषि विश्वविद्यालय के साथ हुए इस समझौते से इन क्षेत्रों के अनुभव और तकनीक का लाभ कृषि अनुसंधान में लिया जा सकेगा.
पीएचडी शोधार्थियों को भी मिलेगा विशेषज्ञों का मार्गदर्शनएमओयू का लाभ विश्वविद्यालय के विद्यार्थियों और शोधार्थियों को भी मिलेगा. पीएचडी के दौरान शोधार्थी केंद्रीय संस्थान के वैज्ञानिकों से सह-निर्देशक के रूप में मार्गदर्शन प्राप्त कर सकेंगे. इससे विद्यार्थियों को प्रयोगशाला स्तर के शोध के साथ व्यावहारिक तकनीकी जानकारी हासिल करने का अवसर मिलेगा. वहीं कृषि क्षेत्र में नई तकनीकों के विकास के साथ ग्रामीण विकास, कौशल संवर्धन और वैज्ञानिक प्रसार को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. इस अवसर पर कृषि विश्वविद्यालय के निदेशक अनुसंधान डॉ. एम. सुंदरिया सहित अधिष्ठाता, निदेशक, अधिकारी और वैज्ञानिक मौजूद रहे.
About the Authorमोनाली पाल
नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…
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Jodhpur,Rajasthan
First Published :
September 09, 2026, 15:18 IST



