‘दृश्यम 3’ के वो 5 डायलॉग्स, जिसने फिल्म के ट्रेलर को बनाया सबसे दमदार, आखिरी वाला तो खड़े कर देगा रोंगटे

नई दिल्ली: फिल्म ‘दृश्यम: द कंक्लूजन’ 2 अक्टूबर को रिलीज होगी. फिल्म से आप क्या उम्मीद कर सकते हैं, इसकी झलक दमदार ट्रेलर से मिल गई है. अजय देवगन का किरदार विजय सलगांवकर कैसे इस बार खुद को कानून के शिकंजे से बचाएगा, यह अपने-आप मे बड़ा सस्पेंस हैं. फिल्म के डायलॉग से अंदाजा लग गया है कि कहानी पहले से ज्यादा इंटेंस होने वाली है. फिल्म में प्रकाश राज और जयदीप अहलावत के किरदारों ने दर्शकों का रोमांच भी दोगुना कर दिया है. आइए, आपको फिल्म के दमदार डायलॉग्स के जरिये इसकी धांसू कहानी का अंदाजा देते हैं. ट्रेलर देखने के बाद दर्शकों की उत्सुकता बढ़ गई है. वे सोच रहे हैं कि इस बार पुलिस के पास ऐसा क्या बड़ा सबूत है, जिसके आधार पर वह विजय के परिवार को घेरेंगे?
सीन 1: फिल्म के ट्रेलर के पहले सीन में सौरभ शुक्ला और तब्बू बातचीत करते दिखते हैं. सौरभ शुक्ला ने ‘दृश्यम 2’ में लेखक मुराद अली का रोल निभाया था. मीरा (तब्बू) पूछती है- ‘कहानी का सीक्वल लिखना पड़ेगा, तो आपके हिसाब से इस बार क्या करेगा विजय? मुराद अली- विजय क्या करेगा क्या नहीं करेगा, यह तो विजय जानता है या अल्लाह जानता है.
सीन 2: मीरा का पति- हमें अपने बेटे के लिए जस्टिस चाहिए.मीरा कहती है- मुझे जस्टिस नहीं बदला चाहिए.
सीन 3: पुलिसवाला, विजय से कहता है- तू गोवा का सबसे बड़ा हार्ड वर्किंग क्रिमिनल है. सरकार तुझे इनाम देना चाहती है. इसके बाद, पुलिस बने जयदीप अहलावत की एंट्री होती है.जयदीप अहलावत- मैं आदमी नहीं शनि हूं, जिस पर टेढ़ी नजर पड़ गई न. समझो उसका खराब टाइम शुरू.
सीन 4: अजय देवगन- इस वक्त खतरा कब, कैसे और कहां से आएगा, बताना मुश्किल है. अब यह खेल दिमाग का नहीं, नसीब का बन चुका है.
सीन 5: जयदीप अहलावत- इस पूरी क्रिमिनल फैमिली को सबके सामने ऐसा घसीट के लेकर जाऊंगा. अगर कोई ऐसा दोबारा करने के बारे में सोचे, तो उसकी रूह कांप उठे.अजय देवगन- फैमिली के लिए आदमी खुद को हर कदम पर तोड़ता है. सिर्फ तब तक, जब तक कोई उसकी फैमिली को धमकी न दे. घसीटना तो दूर की बात, आप सोच भी नहीं सकते कि साधारण आदमी क्या से क्या बन सकता है. फिर सामने कोई भी खड़ा हो. किसी भी वर्दी में खड़ा हो.
ट्रेलर में दिखाए फिल्म के कुछ और भी सीन हैं, जो दिलचस्पी जगाते हैं, जैसे- एक सीन में प्रकाश राज कहते हैं- अनपढ़ है, मगर बेवकूफ नहीं. और इसे मैं हल्के में लेने की गलती नहीं करूंगा. एक अन्य सीन में जयदीप अहलावत कहते हैं, ‘इंसान जुबान से तो झूट बोल लेता है, मगर दिल सब सच बता देता है.’ ‘दृश्यम: द कंक्लूजन’ का निर्देशन अभिषेक पाठक ने किया है. फ्रेंचाइजी के पिछले दो पार्ट शानदार रहे थे. उनमें विजय सलगांवकर की कहानी दिखाई गई है, जो एक शांत स्वभाव का शख्स है. वह अपने घर में हुई हत्या के बाद परिवार को कानून के शिकंजे से बचाने के लिए जो तिकड़म भिड़ाता है, वो देखने लायक है. अजय देवगन के साथ तब्बू और श्रेया सरन अपने किरदारों में ही नजर आएंगी. फिल्म में सौरभ शुक्ला का भी दिलचस्प रोल है.



