28.73 वर्ग किमी में प्रकृति का अद्भुत संसार, भरतपुर का घना जैव विविधता की बना मिसाल

Last Updated:September 10, 2026, 10:34 IST
Keoladeo National Park Bharatpur: भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान, जिसे घना के नाम से भी जाना जाता है, सीमित क्षेत्र में जैव विविधता संरक्षण की अनूठी मिसाल है. करीब 28.73 वर्ग किलोमीटर में फैले इस राष्ट्रीय उद्यान में प्रवासी और स्थानीय पक्षियों के साथ सरीसृप, मछलियां, कीट-पतंगे और विभिन्न वनस्पतियों की प्रजातियां पाई जाती हैं. जलक्षेत्र, घास के मैदान, झाड़ियां और पेड़-पौधे अलग-अलग जीवों को अनुकूल आवास उपलब्ध कराते हैं. सर्दियों में देश-विदेश से आने वाले प्रवासी पक्षी इसे प्रकृति प्रेमियों और पक्षी विशेषज्ञों के लिए खास आकर्षण बनाते हैं. जलवायु परिवर्तन, तापमान में बदलाव, बारिश के बदलते पैटर्न और जल उपलब्धता जैसी चुनौतियों के बीच घना का संरक्षण और भी महत्वपूर्ण हो गया है. यह राष्ट्रीय उद्यान पर्यावरण संतुलन और जैव विविधता संरक्षण का महत्वपूर्ण उदाहरण है.
भरतपुर. राजस्थान के भरतपुर में स्थित केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान जिसे आमतौर पर घना के नाम से जाना जाता है. सीमित क्षेत्र में जैव विविधता के संरक्षण की अनूठी मिसाल पेश कर रहा है. करीब 28.73 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र में फैला यह राष्ट्रीय उद्यान अपने छोटे से दायरे में प्रकृति की ऐसी विविधता समेटे हुए है, जो इसे देश ही नहीं बल्कि दुनिया के महत्वपूर्ण वेटलैंड क्षेत्रों में शामिल करती है. बदलते पर्यावरण जलवायु परिवर्तन और ग्लोबल वार्मिंग के दौर में केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है.
यहां अलग-अलग मौसम में देश-विदेश से आने वाले प्रवासी पक्षियों के साथ स्थानीय पक्षियों की भी बड़ी संख्या देखने को मिलती है. सर्दियों के मौसम में यहां का वातावरण पक्षियों की आवाजों से गूंज उठता है और यह क्षेत्र प्रकृति प्रेमियों तथा पक्षी विशेषज्ञों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र बन जाता है. घना में पक्षियों के अलावा सरीसृपों मछलियों, कीट-पतंगों और विभिन्न प्रकार की वनस्पतियों की भी कई प्रजातियां पाई जाती है. यही विविधता इस राष्ट्रीय उद्यान को एक महत्वपूर्ण पारिस्थितिकी तंत्र बनाती है.
घना जीव-जंतुओं को उनके अनुकूल आवास उपलब्ध कराते हैं
घना में मौजूद जलक्षेत्र, घास के मैदान, झाड़ियां और पेड़-पौधे अलग-अलग जीव-जंतुओं को उनके अनुकूल आवास उपलब्ध कराते हैं. केवलादेव की खासियत यह भी है कि इतने सीमित क्षेत्र में अलग-अलग तरह के जीवों और वनस्पतियों का संतुलित सह-अस्तित्व देखने को मिलता है. यही कारण है कि यह क्षेत्र पर्यावरण संरक्षण और जैव विविधता पर अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं के लिए भी महत्वपूर्ण है.पक्षियों के व्यवहार, प्रवास, प्रजनन और बदलते मौसम के प्रभावों को समझने के लिए यहां लगातार अध्ययन किए जाते हैं. हालांकि जलवायु परिवर्तन के कारण तापमान में बदलाव, वर्षा के पैटर्न में परिवर्तन और जल उपलब्धता जैसी चुनौतियां इस पारिस्थितिकी तंत्र के सामने बनी हुई है.
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का संरक्षण बेहद जरूरी
केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान का संरक्षण सिर्फ भरतपुर के लिए ही नहीं बल्कि पर्यावरण संतुलन के लिए भी जरूरी है. घना यह संदेश देता है कि प्रकृति के संरक्षण के लिए क्षेत्र का बड़ा होना ही जरूरी नहीं, बल्कि उपलब्ध संसाधनों का बेहतर प्रबंधन और जैव विविधता को सुरक्षित रखने की प्रतिबद्धता भी उतनी ही महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि भरतपुर का केवलादेव राष्ट्रीय उद्यान आज बदलते पर्यावरण के बीच जैव विविधता संरक्षण की एक जीवंत मिसाल बना हुआ है.About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Bharatpur,Rajasthan
First Published :
September 10, 2026, 10:34 IST



