गणेश चतुर्थी से पहले जयपुर में सजा गणपति बाजार, 500 से 70000 तक की मूर्तियां; JLN मार्ग पर उमड़ी भीड़

जयपुर. जयपुर में गणेश चतुर्थी हर वर्ष धूमधाम से मनाई जाती है. इस बार गणेश चतुर्थी 14 सितंबर को मनाई जाएगी. इसलिए जयपुर में सड़कों से लेकर गणेश मंदिरों तक गणपति की मूर्तियां सजाई जा रही हैं. गणेश चतुर्थी से पहले लोग अपने घरों, मोहल्लों और बाजारों में भगवान गणपति की मिट्टी की मूर्ति लाकर स्थापित करते हैं. इसलिए जयपुर की सड़कों पर अभी गणपति बप्पा विराजमान हैं, जो गणेश चतुर्थी के दिन घर-घर तक पहुंचेंगे. जयपुर में सबसे सुंदर और भव्य गणपति बप्पा की मूर्तियां जयपुर के JLN मार्ग पर सजी हैं, जहां हर राज्य से शिल्पकला के कारीगर लगातार मूर्तियां तैयार कर रहे हैं.
लोकल-18 ने जयपुर के JLN मार्ग स्थित मोती डूंगरी मंदिर के पास सजी मूर्तियों की दुकानों पर पहुंचकर यहां मूर्तियां तैयार करने वाले कारीगरों से बात की. कारीगरों का कहना है कि वे पिछले 1 महीने से मूर्तियां बनाने के काम में जुटे हैं. तब जाकर गणेश चतुर्थी के लिए इतनी सारी मूर्तियां तैयार हुई हैं. गणेश चतुर्थी पर जयपुर में भगवान गणपति की मूर्तियों की काफी डिमांड रहती है, इसलिए इन्हें पहले से तैयार किया जाता है. हाथों-हाथ एक दिन में इतनी मूर्तियां नहीं बन सकतीं. जयपुर में लोग सबसे ज्यादा मूर्तियां खरीदने के लिए यहां आते हैं, क्योंकि यहां हर राज्य के कारीगर हैं, जो सुंदर मूर्तियां बनाते हैं.
500 रुपए से 55 हजार रुपए तक हैं बप्पा की मूर्तियों की कीमत
लोकल-18 से बात करते हुए गुजरात से आए एक कारीगर बताते हैं कि वैसे तो जयपुर में मूर्तियां बनाने वाले स्थानीय कारीगर भी हैं, लेकिन जयपुर में हर साल दिल्ली, मुंबई, अहमदाबाद, इलाहाबाद सहित तमाम शहरों से कारीगर मूर्तियां बनाने के लिए आते हैं. हर इलाके के कारीगर अलग-अलग तरह की मूर्तियां बनाते हैं. इनमें 1 किलो वजनी छोटे आकार की मूर्तियों से लेकर 50 से 70 किलो तक की भव्य मूर्तियां शामिल हैं. इनकी कीमत 500 रुपए से लेकर 55 से 70 हजार रुपए तक है. इसलिए जयपुर के हर इलाके से लोग गणेश चतुर्थी पर यहां सबसे ज्यादा मूर्तियां खरीदने के लिए आते हैं.
छोटी मूर्ति को भी 2 से तीन कारीगर मिलकर करते हैं तैयारछोटी मूर्तियों की बात करें तो 10-12 इंच तक की मूर्तियों को 2 से 3 कारीगरों ने मिलकर तैयार किया है. वहीं, छोटी मूर्तियां परिवार की महिलाएं भी तैयार करती हैं. लोकल-18 से बात करते हुए शिल्पकारों का कहना है कि लगातार मूर्ति बनाने के सामान से लेकर कलर और अच्छी गुणवत्ता वाली मिट्टी महंगी हो रही है. इसलिए मूर्तियों की कीमत हर साल बढ़ जाती है.
मिट्टी और मोटे कागज से तैयार होती हैं गणपति बप्पा की मूर्तियांलोकल-18 से बात करते हुए मूर्ति कारीगर बताते हैं कि गणपति बप्पा की इन छोटी मूर्तियों को मिट्टी और अन्य मोटे कागज के मटेरियल से तैयार किया जाता है. इसमें सबसे पहले मिट्टी को साफ कर सुखाया जाता है, फिर उसकी बारीक पिसाई की जाती है. इसके बाद कच्चे कागज से डमी के रूप में तैयार किया जाता है.
ऐसे तैयार किया जाता है मूर्ति का बेसइसके बाद पानी मिलाकर गीली मिट्टी से फ्रेम की मदद से प्रतिमा का बेस तैयार किया जाता है. हर दिन लेपन करने के बाद मूर्तियों को मिट्टी से काट-छांट कर एक आकार दिया जाता है. इसके बाद उन्हें अलग-अलग रंगों से रंगा जाता है और वस्त्र, मालाएं, चमक और अन्य चीजों से मूर्ति को सजाया जाता है. तब जाकर मूर्ति तैयार होती है.
बड़ी मूर्ति बनाने में लगते हैं ज्यादा वक्तछोटी मूर्तियों के अलावा बड़ी मूर्तियों को बनाने में 15 से 20 दिन का समय लगता है. इसके लिए कानोता बांध और आसपास के अन्य इलाकों से लाल और काली मिट्टी मंगवाई जाती है. बड़ी मूर्तियों को तैयार करने के बाद उन्हें लगभग एक सप्ताह तक सुखाया जाता है, जिससे वे अधिक मजबूत होती हैं.



