जयपुर के इन गणेश मंदिरों में दर्शन मात्र से पूरी होती है मनोकामना? गणेश चतुर्थी पर जानें खास मान्यताएं

Last Updated:September 13, 2026, 16:43 IST
Ganesh Chaturthi 2026: जयपुर में हर साल गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति के दर्शन के लिए भक्तों की जमकर भीड़ उमड़ती हैं, वैसे तो जयपुर में सैकड़ों गणेश मंदिर हैं लेकिन कुछ मंदिर जिनका इतिहास वर्षों पुराना हैं. इन मंदिरों की खास मान्यताएं और परम्पराएं इन्हें खास बनाती हैं, इसलिए यहां गणेश चतुर्थी पर लाखों की संख्या में भक्त भगवान गणपति के दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
जयपुर में हर साल गणेश चतुर्थी पर भगवान गणपति के दर्शन के लिए भक्तों की जमकर भीड़ उमड़ती हैं.वैसे तो जयपुर में सैकड़ों गणेश मंदिर हैं, लेकिन कुछ मंदिर जिनका इतिहास वर्षों पुराना हैं. इन मंदिरों की खास मान्यताएं और परम्पराएं इन्हें खास बनाती हैं, इसलिए यहां गणेश चतुर्थी पर लाखों की संख्या में भक्त गणपति के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. इन खास मंदिरों में गढ़ गणेश, मोती डूंगरी, नहर के गणेशजी, सिद्धिविनायक, लाल डूंगरी गणेश जी, काले गणेश जी, परकोटा वाले गणेश जी जहां आप भी गणेश चतुर्थी पर दर्शन कर सकते है.
जयपुर के ब्रह्मपुरी माउंट रोड़ पर स्थित देश का पहला बिना सुंड वाले गणपति यहां विराजमान हैं. मंदिर के इतिहास के बारे में कहां जाता कि सवाई जयसिंह ने 18वीं शताब्दी में जयपुर की स्थापना के लिए गुजरात के से पंडितों को यहां बुलाकर अश्वमेध यज्ञ करवाया था और गढ़ गणेश मंदिर की स्थापना की थी. मंदिर में जाने के लिए भक्तों को 500 फिट की ऊंचाई पर चढ़ कर पहुंचना पड़ता हैं. भक्तों का मानना है यहां भगवान गणेश को चिट्ठी लिखकर अपने मन की बात भगवान गणेश को बताते हैं और फिर उसे पुरी करने के लिए कहते हैं.
जयपुर में स्थित नहर के गणेश जी मंदिर भी जयपुर के प्राचीन मंदिरों में से एक हैं. यह मंदिर तकरीबन 250 साल पुराना है. यह मंदिर नाहरगढ़ पहाड़ी के तलहटी में बसा होने को चलते यह मंदिर नहर के गणेश जी के नाम से प्रसिद्ध है. यहां पर दाहिनी सूंड वाले दक्षिणमुखी भगवान गणेश विराजे हैं. इस मंदिर मंदिर उलटे स्वास्तिक बनाने की भी बड़ी मान्यताएं है. कहा जाता है कि उल्टा स्वास्तिक बनाने से लोगों के सारे बिगड़े काम बनने शुरू हो जाता हैं. इसलिए यहां आने वाले भक्त उलटा स्वास्तिक बनाते हैं.
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मुंबई में हैं सिर्फ सिद्धिविनायक गणेश नहीं बल्कि जयपुर में भी एक सिद्धि विनायक मंदिर है. जिसे चमत्कारी मंदिर के रूप में जाना जाता हैं. गुलाबी नगरी के परकोटे में भी स्थित सिद्धिविनायक गणेश मंदिर करीब 250 वर्ष से ज्यादा पुराना मंदिर है. जहां जयपुर के राजा सवाईराम सिंह गलताजी से तीर्थ स्नान करके यहां दूध का अभिषेक करके अपनी गद्दी पर बैठते थे. इसलिए आज भी इस मंदिर में सिंदूर की जगह दूध और सांप की यज्ञोपवीत चढ़ता है. मंदिर में भगवान गणपति की श्वेत प्रतिमा स्थापित हैं जिसपर नागदेवता से लिपटे हुए हैं.
जयपुर के चांदपोल बाजार में स्थित परकोटे वाले गणेश भी जयपुर के प्रसिद्ध मंदिरों में से एक हैं. इस मंदिर के बारे में कहां जाता हैं कि जयपुर परकोटे के निर्माण के दौरान चांदपोल गेट के बाहर परकोटे में गणेशजी प्रकट हुए थी. उसी समय यहां भगवान गणेशजी का मंदिर बनवाकर जयपुर के विकास की प्रार्थना की गई. जयपुर स्थापना से लेकर आज भी ये गणपति लोगों के बीच आस्था का केन्द्र बना हुआ है. 300 साल पुराने इस मंदिर में स्थापित भगवान गणपति की मूर्ति प्राकृतिक व चमत्कारिक मूर्ति हैं.
जयपुर के चारदीवारी बाजार के अंदर ही नहीं बल्कि बाहर भी भगवान गणपति के प्राचीन मंदिर हैं, इन्हीं में से एक गलता गेट के नज़दीक लाल डूंगरी गणेश मंदिर जिसकी स्थापना जयपुर बसने से पहले ही हो गई थी. यह मंदिर 400 वर्ष पुराना है. यहां पर भगवान गणेश की मूर्ति पांच फीट ऊंची है और दक्षिणमुखी सूंड वाले गणेशजी यहां विराजमान हैं. योग स्वरूप की मुद्रा में यहां गणपति स्थापित है. इस मंदिर की सबसे खास बात यह हैं. यह मंदिर संतों ने तपस्या का स्थान रहा हैं. जिसके चलते यहां विशाल वट वृक्ष और बावड़ी मौजूद हैं.
जयपुर के सबसे लोकप्रिय गणेश मंदिर में मोतीडूंगरी मंदिर सबसे ज्यादा प्रसिद्ध हैं. जहां गणेश चतुर्थी पर सबसे ज्यादा भीड़ उमड़ती हैं. मोती डूंगरी (शंकरगढ़ी) की तलहटी में स्थित है. इसकी स्थापना जयपुर के बसने के कुछ समय बाद 1761 में की गई थी. यहां भगवान गणपति की मूर्ति गुजरात के मावली लाई गई थी. जो प्रतिमा 500 साल से भी ज्यादा पुरानी हैं. मान्यता के अनुसार भगवानी गणेश की यह प्रतिमा बैलगाड़ी में लाई जा रही थी और शंकरगढ़ी के नीचे बैलगाड़ी स्वतः रुक गई. जहां बैलगाड़ी रूकी वहीं मंदिर का निर्माण किया गया.
जयपुर में हर इलाके में भगवान गणपति के अलग-अलग प्रतिमाएं और मूर्तियां स्थापित हैं, लेकिन जयपुर के चौड़ा रास्ता में स्थित काले गणेश जी मंदिर जिसका निर्माण 1978 में कराया गया था. इस मंदिर में गणेश जी की सवा फीट की काले पत्थर की मूर्ति है जो दक्षिण भारत से मंगवाई गई थी. इसलिए जयपुर में यह एकमात्र गणेश मंदिर हैं. जहां भक्तों को भगवान गणेश की काली मूर्ति के रूप में दर्शन होते हैं.
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September 13, 2026, 16:43 IST



