न सड़क, न मोबाइल नेटवर्क, फिर भी पर्यटकों की पसंद है ये गांव, 5 KM ट्रैकिंग के बाद दिखता है जन्नत सा नजारा

Last Updated:September 15, 2026, 06:50 IST
Remote Villages of Rajasthan: सिरोही के अरावली पर्वतमाला के बीच बसा उतरज गांव आज भी सड़क और मोबाइल नेटवर्क जैसी कई मूलभूत सुविधाओं से दूर है, लेकिन इसकी प्राकृतिक खूबसूरती पर्यटकों को अपनी ओर खींचती है. समुद्र तल से करीब 1400-1500 मीटर की ऊंचाई पर बसे इस गांव तक गुरुशिखर से करीब 5 किलोमीटर पहाड़ी पगडंडी पर ट्रैकिंग करके पहुंचना पड़ता है. बारिश में यहां धुंध, हरियाली और झरनों का नजारा देखने को मिलता है. गांव में करीब 40 से 60 परिवार रहते हैं, जिनकी आजीविका खेती और पशुपालन पर निर्भर है. दूसरी तरफ सड़क के अभाव में ग्रामीणों को इलाज और रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी मुश्किलों का सामना करना पड़ता है.
सिरोही: राजस्थान में अरावली पर्वतमाला के बीच बसा एक ऐसा दुर्गम गांव है, जहां आज भी मोबाइल नेटवर्क, सड़क समेत कई मूलभूत सुविधाएं नहीं है. इसके बावजूद इस गांव को देखने के लिए दूर-दराज से पर्यटक पहाड़ों के बीच ट्रैकिंग कर यहां पहुंचते हैं. जी हां हम बात कर रहे हैं उतरज गांव की. समुद्र तल से लगभग 1400 से 1500 मीटर की ऊंचाई पर बसा ये गांव किसी जन्नत से कम नहीं है. चारों तरफ हरियाली और अरावली की पहाड़ियां, दूर दूर प्रदूषण और शोर शराबे का कोई नामोनिशान नहीं. माउंट आबू के स्थानीय टूरिस्ट एंड ट्रेवल गाइड चिंटू यादव ने बताया कि उतरज गांव माउंट आबू वन्यजीव अभ्यारण्य के पास बना एक दुर्गम गांव हैं.
यहां पहुंचने के लिए आपको राजस्थान और अरावली पर्वतमाला की सबसे ऊंची चोटी गुरुशिखर से करीब 5 किलोमीटर पहाड़ी पगडंडी से पैदल चलकर ओर ट्रैकिंग करते हुए पहुंचना पड़ता है. यहां बारिश के समय चारों तरफ धुंध और झरने के नजारे कई स्थानों पर देखने को मिलते हैं. इस गांव में करीब 40 से 60 परिवार निवास करते हैं, जिनकी आजीविका का मुख्य आधार पारंपरिक पशुपालन और खेती है. आज भी यहां के घर कच्चे और केलूपोशनुमा है.
चुनौतियों से भरा है गांव का जीवन
गुरुशिखर निवासी महेंद्र सिंह ने बताया कि इस गांव को देखने के लिए कई पर्यटक ट्रैकिंग कर यहां पहुंचते हैं. नेचुरल ब्यूटी से भरपूर होने के बावजूद इस गांव के लोगों का जीवन चुनौतियों से भरा हुआ है. उतरज तक पहुंचने के लिए आज भी कोई पक्की सड़क मौजूद नहीं है. कार या बाइक जैसे आधुनिक वाहन यहां नहीं लाई जा सकती है. इस गांव में पहला ट्रैक्टर भी पिछले वर्ष आया. लोगों ने अलग-अलग पार्ट्स को कंधे पर उठाकर यहां लाकर असेंबल करवाया था. गांव में एक स्कूल भी है, जहां स्थानीय बच्चे पढ़ते हैं. यहां पढ़ाने आने वाले शिक्षक गुरुशिखर से रोजाना 5 किलोमीटर पैदल चलकर यहां आते हैं. वहीं कोई इमरजेंसी होने पर मरीज को चारपाई में उठाकर 5 किलोमीटर दूर गुरशिखर लाना पड़ता है.
शाम के समय आवाजाही हो जाती है खतरनाक
इस गांव का रास्ता पथरीली, उबड़-खाबड़ पगडंडियों और घने जंगलों के रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में रात के समय इस रास्ते से जाना नए लोगों के लिए खतरे से खाली नहीं है, क्योंकि रास्ता भटकने के अलावा यह पूरा वन क्षेत्र होने से भालू और लेपर्ड जैसे खतरनाक जानवरों के हमला करने का खतरा भी बना रहता है. पर्यटकों से शाम के बाद यहां आवाजाही नहीं करने की अपील ग्रामवासियों द्वारा की जाती है.
शेरगांव में महाराणा प्रताप ने बिताया था अज्ञातवास
इस गांव के पास दो प्रमुख मंदिर केदारनाथ और बद्रीनाथ बने हुए हैं. इनके दर्शन करने के लिए श्रावण मास में दूर-दराज से भक्त यहां पहुंचते हैं. इस गांव से करीब 7 किलोमीटर दूर एक अन्य दुर्गम गांव शेरगांव है. इसी दुर्गम गांव में महाराणा प्रताप ने हल्दी घाटी युद्ध के बाद अपना अज्ञातवास बिताया था. यहां ईशान भेरू गुफा, प्राचीन शिव मंदिर बने हुए हैं, जहां महारान प्रताप ने अज्ञातवास के दौरान भक्ति की थी.
About the Authorदीप रंजन सिंह Content Producer
दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…
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Sirohi,Rajasthan
First Published :
September 15, 2026, 06:50 IST



