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पाकिस्तान एक फ्रॉड स्टेट, चीन 100% भरोसे लायक नहीं; डिफेंस एक्सपर्ट ने खोले दोनों पड़ोसियों के छिपे इरादे

जम्मू. जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने पाकिस्तान को फ्रॉड और विद्रोही शासन करार देते हुए कहा कि पाकिस्तानी फौज और आईएसआई एफएटीएफ टीम के दौरे से पहले 19 आतंकियों को भगोड़ा दिखाकर दुनिया को गुमराह कर रही है, जबकि भारतीय खुफिया जानकारी के मुताबिक सभी आतंकी पाकिस्तान में ही हैं. वहीं, रक्षा विशेषज्ञ डीपी पांडे ने कहा कि गलवान के बाद एलएसी पर तनाव कम हुआ है और चीन के रुख में नरमी आई है, लेकिन भारत को चीन पर सौ फीसदी भरोसा नहीं करना चाहिए.

एसपी वैद ने कहा, “जहां तक मैं जानता हूं पाकिस्तान एक फ्रॉड स्टेट है और पाकिस्तान की फौज और वहां की डीप स्टेट यानी आईएसआई दुनिया को बेवकूफ बनाती है, चाहे वो एफआईए की लिस्ट में डालकर हो या दूसरे तरीके से भगोड़ा दिखाकर. क्योंकि एफएटीएफ की टीम को वहां दौरा करना है और दुनिया को दिखाया जा रहा है कि ये लोग भगोड़े हैं, जो कि हकीकत नहीं है. हमारी इंटेलिजेंस बताती है कि सब पाकिस्तान में ही हैं. वो उन्हें गिरफ्तार के तौर पर दिखाना नहीं चाहते. कब तक दुनिया पाकिस्तान की फौज का झूठ बर्दाश्त करेगी? लिस्ट में दिखाए गए 19 लोग, जो अजहर मसूद के अलावा मुंबई अटैक में शामिल थे, वो कहां हैं?”

पूर्व डीजीपी ने कहा, “अजहर मसूद को लेकर इन्होंने पहले कहा था कि वो अफगानिस्तान में है, अफगान सरकार ने कहा, ‘हमारे पास नहीं है,’ तो और कहां जा सकता है? भारत में तो आ नहीं सकता, तो क्या पाताल में चला गया? आसमान में जाने का विकल्प नहीं है, क्योंकि पिछली बार जब ऑपरेशन सिंदूर हुआ था, तब उसे रोते हुए देखा गया था, जब उसके परिवार के 11 सदस्य मारे गए थे. बाकी सब यूएन द्वारा घोषित आतंकवादी हैं, वो अंतरराष्ट्रीय दौरा नहीं कर सकते, तो कहां जाएंगे? पाकिस्तान दुनिया को गुमराह करने के लिए धोखा कर रहा है.”

एफएटीएफ के दौरे से पाकिस्तान की बौखलाहट को लेकर पूर्व डीजीपी ने कहा, “दुनिया को समझना चाहिए, चाहे एफएटीएफ हो या बाकी यूएन संगठन, सबको समझना चाहिए कि पाकिस्तान एक विद्रोही शासन है. वहां सच नहीं बोला जाता, वहां जो वहां की फौज चाहती है वही होता है और वही उनकी स्टेट पॉलिसी है, आतंकवाद चलाना. आपने देखा होगा कि पहलगाम अटैक को लेकर जो ब्रिक्स में हुआ, चीन समेत सभी देशों ने उस पर हस्ताक्षर किए और उस हमले की निंदा की. तो पाकिस्तान जैसे देश का क्या ही कर लीजिएगा. दुनिया को इसका संज्ञान लेना चाहिए और पाकिस्तान के इस झूठ को सबके सामने लाना चाहिए.”

वहीं, रक्षा विशेषज्ञ डीपी पांडे ने कहा कि 2025 के मुकाबले एलएसी पर सैनिकों की तैनाती कम हुई है, लेकिन चीन के साथ संबंध बेहतर होने के संकेतों के बावजूद भारत को सतर्क रहना होगा. एक रिपोर्ट आई है जिसमें बताया गया है कि सेना की तैनाती में पिछले साल यानी 2025 से लेकर अब तक एलएसी पर कुछ कमी आई है. यह बात सही हो सकती है, क्योंकि पिछले कुछ सालों में, खासकर गलवान के बाद, दोनों तरफ काफी तनाव हो गया था और दोनों देशों की सेनाओं का वहां बड़ी संख्या में जमावड़ा हो गया था. उसके बाद धीरे-धीरे चीन को यह समझ आ गया कि भारत के साथ बातचीत का रास्ता ही बेहतर है. जब हमारे देश ने यह साफ कर दिया कि जब तक बॉर्डर पर रिश्ते नहीं सुधरेंगे, तब तक हम व्यापार और अन्य प्रतिबंधों को नहीं हटाएंगे, तब से चीन के रुख में काफी नरमी आई है.

रक्षा विशेषज्ञ ने कहा, “उसी हिसाब से सुरक्षा के लिहाज से उनके साथ बातचीत हो रही है. शी जिनपिंग भी हमारे देश में ब्रिक्स सम्मेलन के लिए दौरे पर आए थे और प्रधानमंत्री के साथ उनकी जो बातचीत हुई, वह भी सुरक्षा को लेकर थी. धीरे-धीरे संबंधों में सुधार होगा, मगर हमें कभी भी चीन पर सौ फीसदी विश्वास करके नहीं चलना चाहिए. वहां पर हमारी सेना को पूरी तरह सजग रहना चाहिए और मुझे यकीन है कि हमारी सेना के वरिष्ठ अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिकारी वहां हमेशा निगरानी रखेंगे, क्योंकि आज चीन के पास काफी अंदरूनी समस्याएं हैं और बाहर भी कुछ परेशानियां हैं.”

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