48 डिग्री की तपती रेत में बेटियों का कमाल, बाड़मेर से निकाल रहीं देश का ‘काला सोना’

Last Updated:September 15, 2026, 10:39 IST
Barmer Oil Field Women Engineers: कभी पानी की कमी और बेटियों के लिए बदनाम रहा बाड़मेर आज ऊर्जा उत्पादन और महिला सशक्तिकरण की नई कहानी लिख रहा है. जिले के मंगला, भाग्यम, रागेश्वरी समेत कई ऑयल फील्ड में 130 से ज्यादा महिला इंजीनियर काम कर रही हैं. पेट्रोकेमिकल, इलेक्ट्रिकल, मैकेनिकल, प्रोडक्शन, ड्रिलिंग और प्लांट मेंटेनेंस जैसे क्षेत्रों में ये बेटियां पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर जिम्मेदारियां संभाल रही हैं. सुरभि पुरोहित, रिचा सिन्हा और सुरुचि शर्मा जैसी इंजीनियर तकनीकी मोर्चे पर अपनी पहचान बना रही हैं. बाड़मेर की रेत से तेल निकालती इन बेटियों की कहानी बदलते समाज और नई सोच की मिसाल है.
एक जमाना हुआ करता था जब रेतीला बाड़मेर पानी के अभावों की जमीन कहा जाता था और बेटियों की कब्रगाह के नाम से कुख्यात हुआ करता था, लेकिन समय का पहिया ऐसा घूमा कि आज उसी रेतीले बाड़मेर में देश का सबसे ज्यादा पेट्रोलियम यहीं से निकल रहा है और सबसे सुखद बात यह है कि इस पेट्रोल के उत्पादन से लेकर रिफाइन होने की प्रक्रिया में 130 से ज्यादा बेटियां बतौर इंजीनियर यहां अपने काम को बखूबी अंजाम दे रही है.
बाड़मेर के मंगला, भाग्यम, रागेश्वरी, सरस्वती, विजया, कामेश्वरी, वंदना, दुर्गा, ऐश्वर्या, शहीद तुकाराम ऑयल फील्ड में काम कर रही हैं. यहां पेट्रो केमिकल, मड, इलेक्ट्रिक, प्लांट मेंटेनेंस, मेकेनिकल, प्रोडक्शन, ड्रिलिंग इंजीनियर के तौर पर 130 से ज्यादा बेटियां इंजीनियर के तौर पर ना केवल अपने काम को अंजाम दे रही है बल्कि पुरुषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर काम कर रही है.
राजस्थान में केयर्न के आरजे साउथ गैस क्षेत्र में कार्यरत युवा ड्रिलिंग इंजीनियर मयंक कुमार उन सैकड़ों इंजीनियरों में से एक हैं जो धरती की गहराइयों में मौजूद ऊर्जा संसाधनों को देश के विकास से जोड़ने का कार्य कर रहे हैं. ड्रिलिंग कार्य के दौरान उन्हें बदलती भूगर्भीय परिस्थितियों और तकनीकी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है लेकिन उनकी टीम का लक्ष्य स्पष्ट है घरेलू ऊर्जा उत्पादन बढ़ाकर भारत की ऊर्जा आत्मनिर्भरता को मजबूत बनाना है.
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इसी तरह बाड़मेर के रागेश्वरी ऑयल फील्ड में कार्यरत युवा इंजीनियर प्रांजीत कलिता उन नई पीढी के इंजीनियरों में शामिल हैं जो तकनीक और ऑटोमेशन के माध्यम से ऊर्जा क्षेत्र में बदलाव ला रहे हैं. इंस्ट्रुमेंटेशन विभाग में कार्यरत प्रांजीत फील्ड इंस्ट्रुमेंटेशन, प्रोसेस ऑटोमेशन और कंट्रोल सिस्टम्स से जुड़े कार्य संभालते हैं. उनका कहना है कि ऊर्जा क्षेत्र में काम करने का सबसे बड़ा आकर्षण यह है कि यहां इंजीनियरिंग का सीधा संबंध देश की प्रगति और ऊर्जा सुरक्षा से है.
वेदांता ऑयल एंड गैस के 650 से अधिक इंजीनियर ड्रिलिंग, प्रोडक्शन, सबसर्फेस, मैकेनिकल, इंस्ट्रुमेंटेशन, डिजिटल, प्रोजेक्ट्स और एचएसई जैसे विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत हैं. राजस्थान के रेगिस्तानी तेल एवं गैस क्षेत्रों से लेकर देश के तटीय ऊर्जा परिसंपत्तियों तक, ये इंजीनियर आधुनिक तकनीकों के माध्यम से उत्पादन बढ़ाने, परिचालन दक्षता सुधारने और सुरक्षा के उच्चतम मानकों को सुनिश्चित करने का कार्य कर रहे हैं.
कंपनी की इंजीनियरिंग टीम की एक बड़ी विशेषता इसका युवा स्वरूप है. 60 फीसदी से अधिक इंजीनियर 35 वर्ष या उससे कम आयु वर्ग के हैं. वहीं तकनीकी भूमिकाओं में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी ऊर्जा क्षेत्र में नए बदलाव की कहानी भी बयां कर रही है. इंजीनियर सुरभि पुरोहित, पेट्रो केमिकल इंजीनियर रिचा सिन्हा, सुरुचि शर्मा उनके जैसी 130 से अधिक उन इंजीनियर बेटियों को सलाम करता है जो रेत के दरिया से तेल निकाल रही है.
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September 15, 2026, 10:37 IST



