AAP ने कैसे जीता बारां नगर परिषद का चुनाव? 1 शख्स कमल राठौर ने पलट दी पूरी कहानी

बारां. राजस्थान निकाय चुनाव में इस बार सबसे चौंकाने वाला जो परिणाम सामने आया है वो बारां नगर परिषद का है. यहां आम आदमी पार्टी (AAP) ने सभी सियासी समीकरणों को धत्ता बनाते हुए शहरी सरकार की सत्ता हासिल कर ली और बीजेपी तथा कांग्रेस देखती रह गई. इस पूरे सियासी उलटफेर की कहानी केवल एक शख्स के इर्दगिर्द रही. पूर्व मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और पूर्व मंत्री प्रमोद भाया के प्रभाव वाले इस इलाके में जिस पार्टी का चुनाव से पहले कोई मजबूत संगठन या बड़ा स्थानीय कैडर नजर नहीं आता था उसने नगर परिषद की 60 में से 31 सीटों पर कब्जा कर लिया. इस अप्रत्याशित नतीजे के केंद्र में रहे पूर्व सभापति कमल राठौर.
कमल राठौर लंबे समय से नगर परिषद चुनाव को लेकर तैयारी कर रहे थे. वे सभी 60 सीटों पर निर्दलीय प्रत्याशी खड़े कर रहे थे. वे सभी प्रत्याशियों के लिए सिंबल की जोड़-तोड़ में लगे रहे लेकिन उनकी पार नहीं पड़ी. चुनाव से कुछ समय पहले उन्होंने आम आदमी पार्टी का दामन थामा. बाद में देखते ही देखते पूरे नगर परिषद क्षेत्र में अपना चुनावी नेटवर्क खड़ा कर दिया. सभी 60 वार्डों में प्रत्याशी उतारना अपने आप में बड़ा दांव था. चुनाव के नतीजों ने उनकी रणनीति को और ज्यादा अहम बना दिया. कमल राठौर खुद भी चुनाव जीते और उनकी पत्नी ने भी जीत दर्ज की. अब उनकी पत्नी सभापति की प्रबल दावेदार है. यहां निकाय प्रमुख की सीट महिला के लिए रिजर्व है.
स्थानीय स्तर पर नाराजगी को मुद्दा बनाकर लगातार प्रचार कियादरअसल राठौर पहले कांग्रेस से जुड़े हुए थे. वे पूर्व में करीब ढाई साल तक नगर परिषद के सभापति की जिम्मेदारी भी संभाल चुके हैं. सभापति रहते कराए गए विकास कार्यों को उन्होंने चुनाव प्रचार का आधार बनाया. इसके साथ ही भाजपा और कांग्रेस दोनों के खिलाफ स्थानीय स्तर पर नाराजगी को मुद्दा बनाकर लगातार प्रचार किया. उनकी राजनीतिक दिशा बदलने के पीछे फर्जी पट्टों से जुड़ा मामला अहम रहा था. पिछली सरकार के दौरान इस मामले में कमल राठौर को जेल जाना पड़ा था. इसके बाद उनका पूर्व मंत्री प्रमोद भाया से राजनीतिक विरोध बढ़ गया. बाद में यही टकराव आगे चलकर उनकी सियासी रणनीति का हिस्सा बन गया.
अरविंद केजरीवाल की तस्वीर तक का इस्तेमाल नहीं किया गयादिलचस्प बात यह रही कि राठौर ने चुनाव में आम आदमी पार्टी का सिंबल तो इस्तेमाल किया लेकिन प्रचार को पूरी तरह स्थानीय चेहरों और स्थानीय मुद्दों तक सीमित रखा. प्रचार में पार्टी के किसी भी नेता के चेहरों को जगह नहीं दी गई. अरविंद केजरीवाल की तस्वीर तक का इस्तेमाल नहीं किया गया. इससे उन्होंने खुद को सीधे तौर पर भाजपा-कांग्रेस के विकल्प यानी तीसरे मोर्चे के रूप में पेश किया.
राठौर ने जनता से बदलाव की अपील की
बारां की जनता के लिए भी स्थानीय मुद्दे इस चुनाव में बड़ा फैक्टर रहे. शहर में लंबे समय से कांग्रेस का बोर्ड रहा. हाल के वर्षों में भाजपा को भी सत्ता संभालने का मौका मिला. इसके बावजूद कई इलाकों में सड़क, पानी, बिजली और सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर शिकायतें बनी रही. इसी स्थानीय नाराजगी को राठौर ने चुनावी मुद्दे में बदल दिया. उन्होंने भाजपा और कांग्रेस दोनों को एक ही तराजू में रखकर जनता से बदलाव की अपील की.
मतदाताओं ने तीसरे मोर्चे को सत्ता की चाबी सौंप दीनतीजे बताते हैं कि यह रणनीति काम कर गई. आम आदमी पार्टी के सिंबल पर लड़ा गया चुनाव असल में कमल राठौर के स्थानीय चेहरे, पुराने राजनीतिक संबंधों और दोनों प्रमुख दलों के खिलाफ बनी नाराजगी का चुनाव बन गया. यानी बारां में इस बार सिर्फ पार्टी का सिंबल नहीं जीता, बल्कि भाजपा-कांग्रेस से अलग विकल्प की तलाश कर रहे मतदाताओं ने तीसरे मोर्चे को सत्ता की चाबी सौंप दी.
आम आदमी पार्टी ने 60 में से 31 वार्डों में जीत हासिल कीराठौर की रणनीति का नतीजा यह रहा कि बारां नगर परिषद में आम आदमी पार्टी ने भाजपा और कांग्रेस को बड़ी शिकस्त देते हुए पूर्ण बहुमत हासिल कर लिया. यहां भाजपा तीसरे पायदान पर रही. बारां नगर परिषद में कुल 60 सीटों पर मतदान हुआ था. उसमें से आम आदमी पार्टी ने 31 वार्डों में जीत हासिल की. कांग्रेस को महज 18 पर और बीजेपी 9 ही सीट हासिल कर पाई. यहां 2 निर्दलीय प्रत्याशी भी विजयी हुए हैं. आम आदमी पार्टी यहां पूर्व सभापति रहे कमल राठौर के चेहरे पर चुनाव लड़ रही थी जो खुद को तीसरे मोर्चे के रूप में दावेदारी कर रही थी. लेकिन यह चुनाव आम आदमी पार्टी से ज्यादा कमल राठौर के ईदगिर्द ही रहा.
केजरीवाल बोले कांग्रेस बीजेपी ने राज्य बेड़ा गर्क कर दियाइस जीत के बाद आम आदमी पार्टी के सुप्रीमो अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर लिखा कि राजस्थान में भी अब बदलाव की हवा चलने लगी है. शिक्षा मंत्री के इलाके बारां में झाड़ू चल गई है और आम आदमी पार्टी सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है. पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर राजस्थान के खस्ताहाल सरकारी स्कूलों के वीडियो लगातार वायरल हो रहे थे. लोगों में बहुत गुस्सा है. कांग्रेस और बीजेपी ने पूरे राज्य का बेड़ा गर्क कर दिया है. लोग बीजेपी-कांग्रेस की जुगलबंदी से तंग आ चुके हैं. अब लोगों के पास ‘आप’ के रूप में एक मजबूत विकल्प है.
बारां के मांगरोल में रह चुका है आम आदमी पार्टी का चेयरमैनआम आदमी पार्टी ने बारां जिले में कोई पहली बार दस्तक नहीं दी है बल्कि यहां की मंगरोल नगर पालिका में भी पूर्व में आम आदमी पार्टी का अध्यक्ष जीत चुका है. आम आदमी पार्टी जब अस्तित्व में उसी समय उसने बारां जिले में दस्तक दे दी थी. आम आदमी पार्टी का पहला जनप्रतिनिधि भी बारां जिले के मांगरोल नगर पालिका में चुना गया था. साल 2012 में जब निकाय प्रमुख के चुनाव पार्षदों के जरिये ना होकर सीधे हुए थे. तब अशोक जैन आम आदमी पार्टी से मांगरोल नगर पालिका के चेयरमैन चुने गए थे.



