निर्दलीयों की जीत पर मकराना का बड़ा दावा, कहा- स्वर्ण न्याय मंच के अपील का असर है

जयपुर. राजस्थान निकाय चुनाव के नतीजों के बाद निर्दलीय पार्षदों की जीत को लेकर श्री राजपूत करणी सेना के अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना ने बड़ा दावा किया है. जयपुर में राष्ट्रीय आमजन मोर्चा की प्रेस कॉन्फ्रेंस में मकराना ने कहा कि यूजीसी रोल बैक के मुद्दे को लेकर स्वर्ण न्याय मंच की ओर से जनता से निर्दलीय प्रत्याशियों को वोट देने की अपील की गई थी. उन्होंने दावा किया कि निर्दलीयों के समर्थन में चलाए गए अभियान का असर निकाय चुनाव के परिणामों में दिखाई दिया है.
महिपाल मकराना ने कहा कि राजस्थान के 309 निकायों में चुनाव हुए और बड़ी संख्या में निर्दलीय प्रत्याशी जीतकर आए हैं. उनके मुताबिक करीब 2,245 निर्दलीय पार्षद विजयी हुए हैं. मकराना ने इसे कुल पार्षदों का करीब 25 से 30 फीसदी बताया. हालांकि, उपलब्ध चुनाव परिणामों में निर्दलीयों की जीत का आंकड़ा करीब 2,273 वार्ड बताया गया है. मकराना ने कहा कि करीब 120 नगर निकाय ऐसे हैं, जहां निर्दलीय यह तय करने की स्थिति में हैं कि बोर्ड किसका बनेगा. उन्होंने इसे अपने अभियान और निर्दलीयों की राजनीतिक ताकत का नतीजा बताया.
इन निकायों में निर्दलीयों का दबदबा
मकराना ने कई निकायों के आंकड़े भी सामने रखे. उन्होंने बताया कि सादुलशहर नगरपालिका में 25 में से 22 सीटों पर निर्दलीय जीते हैं. पिलानी नगरपालिका में 35 में से 30 सीटें निर्दलीयों के खाते में गई हैं. मकराना नगर परिषद में उनके मुताबिक 36 निर्दलीय, 14 कांग्रेस और 4 भाजपा प्रत्याशी विजयी हुए. भरतपुर नगर निगम के 65 वार्डों में 36 निर्दलीय जीते हैं. धौलपुर में 19, बसेड़ी में 9, जयपुर नगर निगम में 14, अलवर नगर परिषद में 13 और अजमेर नगर निगम में 11 निर्दलीय पार्षदों के जीतने का दावा मकराना ने किया. जोधपुर में 11, बीकानेर में 10 और उदयपुर में 3 निर्दलीय पार्षदों की जीत का भी उन्होंने जिक्र किया. भरतपुर के 65 वार्डों में 36 निर्दलीयों की जीत की पुष्टि चुनाव परिणामों में भी हुई है.
बीजेपी और कांग्रेस पर साधा निशानामकराना ने निकाय चुनाव के परिणामों को बीजेपी और कांग्रेस दोनों के लिए सोचने का विषय बताया. उन्होंने दावा किया कि पिछले चुनाव में बीजेपी का वोट प्रतिशत करीब 70 फीसदी था, जो अब घटकर 36 फीसदी रह गया है. उन्होंने कहा कि नोटा की वजह से भी भाजपा के कुछ प्रत्याशी चुनाव हार गए. मकराना ने कांग्रेस पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कांग्रेस नेता अपनी पीठ थपथपा रहे हैं, लेकिन निर्दलीयों की बड़ी संख्या में जीत को भी समझने की जरूरत है. उन्होंने कहा कि जनता का मूड बदल रहा है और स्थापित राजनीतिक समीकरणों को लेकर लोगों में नाराजगी दिखाई दे रही है.
सीएम और बड़े नेताओं के गढ़ का भी उठाया मुद्दा
महिपाल मकराना ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, पूर्व मुख्यमंत्री और केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत के राजनीतिक प्रभाव वाले क्षेत्रों को लेकर भी सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अपने गृह क्षेत्र को नहीं बचा पाए, पूर्व मुख्यमंत्री अपने गृह क्षेत्र को नहीं बचा पाए और गजेंद्र सिंह शेखावत भी अपने गृह क्षेत्र में राजनीतिक पकड़ नहीं बचा पाए. बीकानेर में कांग्रेस ने 80 में से 42 वार्ड जीतकर स्पष्ट बहुमत हासिल किया, जबकि भाजपा 27 वार्डों पर रही. वहीं भरतपुर में निर्दलीयों ने 65 में से 36 वार्ड जीतकर सबसे बड़ी ताकत के रूप में जगह बनाई.
पंचायत चुनाव को लेकर भी किया दावा मकराना ने कहा कि निकाय चुनाव में Gen-Z और निर्दलीय उम्मीदवार जीतकर आए हैं और इसका असर आने वाले पंचायत चुनाव में भी दिखाई देगा. उन्होंने कहा कि अगर यूजीसी रोल बैक करना है तो सवर्ण समाज को एकजुट रहना होगा.
आंदोलन को लेकर किया बड़ा दावा
उन्होंने आगे कहा कि यूजीसी रोल बैक को लेकर दिल्ली की धरती पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा. मकराना ने दावा किया कि उस दिन प्रधानमंत्री को भी यूजीसी को वापस लेने की बात माननी पड़ेगी. मकराना ने कहा कि निकाय चुनाव में निर्दलीयों की भूमिका अब केवल चुनाव जीतने तक सीमित नहीं है, बल्कि कई जगह बोर्ड गठन में भी यही पार्षद निर्णायक भूमिका निभाने वाले हैं. राजस्थान के चुनाव परिणामों में निर्दलीयों की बड़ी संख्या में जीत ने भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने नई राजनीतिक चुनौती जरूर खड़ी की है. कई निकायों में स्पष्ट बहुमत नहीं होने के कारण बोर्ड गठन में निर्दलीयों की भूमिका महत्वपूर्ण रहने वाली है.



