Health

Health Tips : बढ़ाएंगे इम्यूनिटी, लेकिन स्किन के लिए घातक…जानिए हल्दी के पत्तों का सही इस्तेमाल

Last Updated:September 15, 2026, 19:33 IST

Turmeric leaves benefits and side effects : उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में हल्दी के पत्तों का उपयोग व्यंजनों और घरेलू उपचारों में किया जाता है. इन पत्तों में एंटीऑक्सीडेंट और सूजनरोधी गुण पाए जाते हैं, जो पाचन और त्वचा के लिए लाभकारी हैं, लेकिन इनके कुछ साइड इफेक्ट भी हैं. लोकल 18 ने इस बारे में बागेश्वर के आयुष चिकित्सक डॉ. ऐजल पटेल से बात की. डॉ. पटेल बताते हैं कि कुछ लोग इसके ताजे पत्तों का उपयोग काढ़े या भोजन में सुगंध और स्वाद बढ़ाने के लिए करते हैं. कुछ जगहों पर पत्तियों का उपयोग भाप में पकाए जाने वाले व्यंजनों, मिठाइयों या स्थानीय पकवानों में भी किया जाता है. डॉ. ऐजल पटेल कहते हैं कि हल्दी के पत्तों को सीधे त्वचा पर लगाने से पहले सावधानी जरूरी है. कुछ लोगों को एलर्जी या जलन हो सकती है.

उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हल्दी का उपयोग केवल मसाले के रूप में नहीं, बल्कि इसके पत्तों का भी पारंपरिक तौर पर इस्तेमाल किया जाता है. पहाड़ों में स्थानीय लोग हल्दी के ताजे पत्तों का उपयोग विभिन्न व्यंजनों, काढ़े और घरेलू उपचारों में करते हैं. हल्दी के पत्तों में प्राकृतिक रूप से एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-बैक्टीरियल और सूजनरोधी गुण पाए जाने की बात कही जाती है. आयुर्वेदिक और पारंपरिक ज्ञान में इन्हें शरीर के लिए उपयोगी माना गया है.

डॉ. ऐजल पटेल बताते हैं कि हल्दी के पत्तों का पारंपरिक उपयोग पाचन संबंधी समस्याओं में किया जाता रहा है. इनमें मौजूद प्राकृतिक तत्व पाचन प्रक्रिया को सुचारु बनाने में मदद कर सकते हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग ताजे पत्तों का उपयोग काढ़े या भोजन में सुगंध और स्वाद बढ़ाने के लिए करते हैं. हल्दी परिवार के पौधों में पाए जाने वाले जैविक यौगिकों पर पाचन स्वास्थ्य को लेकर कई अध्ययन किए गए हैं.

हल्दी के पत्तों में कई प्राकृतिक यौगिक पाए जाते हैं, जिनमें एंटीऑक्सीडेंट गुण होने की बात सामने आती है. एंटीऑक्सीडेंट शरीर में बनने वाले ऑक्सीडेटिव तनाव से बचाव में भूमिका निभाते हैं. पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियों में हल्दी के पौधे के विभिन्न हिस्सों का उपयोग लंबे समय से किया जाता रहा है. पहाड़ी भोजन में प्राकृतिक और स्थानीय सामग्री का महत्व अधिक होने के कारण हल्दी के पत्तों का इस्तेमाल भी देखने को मिलता है.

Add as Preferred Source on Google

हल्दी के पत्तों का पेस्ट पारंपरिक तौर पर त्वचा की देखभाल के लिए इस्तेमाल किया जाता है. ग्रामीण क्षेत्रों में इसे छोटे-मोटे घाव, त्वचा पर होने वाली जलन या सूजन वाले स्थानों पर लगाने की मान्यता है. हल्दी परिवार के पौधों में पाए जाने वाले कुछ प्राकृतिक तत्वों में सूजनरोधी और रोगाणुरोधी गुणों पर शोध हुआ है. हालांकि, हल्दी के पत्तों को सीधे त्वचा पर लगाने से पहले सावधानी जरूरी है. कुछ लोगों को प्राकृतिक पदार्थो से एलर्जी या जलन हो सकती है.

हल्दी को सामान्य रूप से सूजनरोधी गुणों वाला पौधा माना जाता है. इसी कारण इसके पत्तों का भी पारंपरिक उपयोग किया जाता है. पहाड़ी क्षेत्रों में पुराने समय से प्राकृतिक वनस्पतियों का इस्तेमाल शरीर की सामान्य परेशानियों में किया जाता रहा है. हल्दी के पत्तों से तैयार लेप या अन्य घरेलू नुस्खों को हल्की सूजन और त्वचा की जलन में उपयोगी माना जाता है, लेकिन यह समझना जरूरी है कि हर प्रकार की सूजन का कारण अलग हो सकता है.

हल्दी के पत्तों में पाए जाने वाले प्राकृतिक यौगिक शरीर के लिए लाभकारी हैं. इनमें मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और दूसरे तत्व रोग प्रतिरोधक क्षमता को अप्रत्यक्ष रूप से सहारा देते हैं. हालांकि, केवल हल्दी के पत्तों का सेवन करने से इम्युनिटी बढ़ने का दावा वैज्ञानिक रूप से पर्याप्त प्रमाणित नहीं है. मजबूत रोग प्रतिरोधक क्षमता के लिए संतुलित आहार, पर्याप्त नींद, नियमित शारीरिक गतिविधि और स्वच्छता जरूरी है.

ताजे हल्दी के पत्तों का उपयोग कई क्षेत्रों में पारंपरिक व्यंजनों और घरेलू पेय पदार्थो में किया जाता है. इनके पत्तों में विशेष सुगंध होती है, जो भोजन को अलग स्वाद प्रदान करती है. कुछ स्थानों पर पत्तियों का उपयोग भाप में पकाए जाने वाले व्यंजनों, मिठाइयों या स्थानीय पकवानों में भी किया जाता है. उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में प्राकृतिक सामग्री से तैयार भोजन की अपनी विशेष पहचान है. हालांकि, पत्तियों का सेवन हमेशा साफ-सफाई और उचित मात्रा का ध्यान रखते हुए करना चाहिए.

हल्दी के पत्तों के कई पारंपरिक उपयोग बताए जाते हैं, लेकिन इनके स्वास्थ्य लाभों को लेकर अधिक वैज्ञानिक अध्ययन की आवश्यकता है. हर व्यक्ति का शरीर अलग तरह से प्रतिक्रिया कर सकता है. गर्भवती महिलाओं, छोटे बच्चों, एलर्जी से पीड़ित लोगों या नियमित दवाएं लेने वाले व्यक्तियों को बिना चिकित्सकीय सलाह के किसी भी घरेलू नुस्खे का सेवन नहीं करना चाहिए. त्वचा पर लगाने से पहले छोटे हिस्से पर परीक्षण करना भी जरूरी है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।First Published :

September 15, 2026, 19:33 IST

Source link

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button

Uh oh. Looks like you're using an ad blocker.

We charge advertisers instead of our audience. Please whitelist our site to show your support for Nirala Samaj