मिट्टी-पानी सही तो हल्दी की खेती देगी नई उम्मीद, किसान ऐसे उठा सकते हैं सरकारी योजना का फायदा

Last Updated:September 15, 2026, 21:09 IST
Agriculture Tips: राजस्थान के किसान अब पारंपरिक खेती के ढर्रे से बाहर निकलकर मुनाफा देने वाली मसाला फसलों की तरफ कदम बढ़ा रहे हैं. इसी कड़ी में हल्दी की खेती एक ऐसा विकल्प बनकर उभरी है, जो किसानों के लिए अतिरिक्त कमाई का तगड़ा जरिया बन सकती है. रसोई के मसाले से लेकर आयुर्वेद तक हल्दी की मांग बाजार में हमेशा बनी रहती है. यही वजह है कि राज्य में अब किसान विविधता लाते हुए हल्दी की खेती में दिलचस्पी दिखा रहे हैं.
Agriculture Tips: राजस्थान में किसान पारंपरिक फसलों के साथ अब मसाला फसलों की खेती की ओर भी बढ़ रहे हैं. हल्दी ऐसी ही फसल है, जिसकी खेती किसानों के लिए एक्ट्रा इनकम का जरिया बन सकती है. केंद्र और राज्य स्तर पर बागवानी एवं मसाला फसलों को बढ़ावा देने के लिए अलग-अलग योजनाएं संचालित की जाती हैं. इनके तहत पात्र किसानों को आर्थिक मदद मिल सकती है.
हल्दी एक अहम मसाला फसल है. इसका इस्तेमाल घरों के साथ मसाले के रूप में खाने, आयुर्वेद और कई अन्य क्षेत्रों में किया जाता है. राजस्थान के कई हिस्सों में किसान खेती में विविधता लाने के लिए कम पारंपरिक और अधिक मांग वाली फसलों का रुख कर रहे हैं. ऐसे में हल्दी की खेती किसानों के लिए एक विकल्प बन सकती है.
अनुदान के लिए जरूरी है पात्रता
हल्दी की खेती पर मिलने वाली सहायता योजना, जिले और संबंधित विभाग के दिशा-निर्देशों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है. किसानों को मदद का लाभ लेने के लिए एग्रीकल्चर या हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट की जुड़ी योजना में आवेदन करना होता है. इसके लिए किसान के दस्तावेज, भूमि संबंधी जानकारी, बीज खरीद की रसीद और अन्य जरूरी डॉक्यूमेंट मांगे जा सकते हैं.
DBT से खाते में आ सकती है राशि
कई कृषि एवं उद्यानिकी योजनाओं में योग्य किसानों को अनुदान की राशि सीधे बैंक खाते में DBT यानी Direct Benefit Transfer के माध्यम से दी जाती है. इसके लिए किसान द्वारा खरीदे गए बीज या खेती से जुड़े सामान के बिल और दस्तावेजों की जांच की जाएगी. इसके बाद विभागीय स्तर पर पात्रता और फसल का वेरिफिकेशन होने पर सहायता राशि खाते में भेजी जाती है.
किसान यहां से लें सही जानकारी
राजस्थान के किसान हल्दी की खेती शुरू करने से पहले अपने जिले के एग्रीकल्चर या हॉर्टिकल्चर डिपार्टमेंट से वर्तमान योजना के बारे जान सकते हैं. वहीं से अनुदान की राशि, पात्रता, आवेदन की अंतिम तारीख और जरूरी दस्तावेजों की जानकारी जरूर लें. बिना जानकारी के किसी निजी व्यक्ति या एजेंट को पैसे देने से बचें और बीज भी सही सोर्स से ही खरीदें.
फसल में बदलाव से बढ़ सकती है आमदनी
हल्दी जैसी मसाला फसलों को खेती में शामिल करने से किसानों को पारंपरिक फसलों के अलावा आय का एक और विकल्प मिल सकता है. हालांकि खेती शुरू करने से पहले मिट्टी, पानी, मौसम, बाजार और स्थानीय कृषि विशेषज्ञ की सलाह को ध्यान में रखना जरूरी है. सही योजना और बाजार की जानकारी के साथ हल्दी की खेती किसानों के लिए फायदे का सौदा बन सकती है.
About the Authorसज्जन कुमार दड़बीSenior Sub Editor
Sajan Kumar is a journalist with professional experience in digital news, web journalism, SEO content, copy editing and social media storytelling. He has been working in journalism since 2020 and has worked wit…
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Udaipur,Rajasthan
First Published :
September 15, 2026, 21:09 IST



